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चंडीगढ़, [दयानंद शर्मा]। हरियाणा प्रशासनिक अधिकरण के गठन के विरोध में गेट नंबर एक पर धरना दे रहे वकीलों के प्रति पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट का रुख कड़ा होता जा रहा है। हाई कोर्ट की फुल बेंच ने बुधवार को बार एसोसिएशन को कहा कि वकील गेट एक के पास लगा धरना हटा लें और प्रदर्शन के तरीके को बदलें। कोर्ट ने कहा कि अगर वकीलों में हिम्मत है तो वे हरियाणा विधानसभा या सीएम निवास का घेराव करें। तब उन्हें पता चलेगा।

कोर्ट ने कहा कि अगर बार ऐसा नहीं करेगी तो कोर्ट को मजबूरन चंडीगढ़ प्रशासन को इस बाबत आदेश देना पड़ेगा। इस पर बार के प्रधान व सचिव ने अनुरोध किया कि इस बाबत उनको हाउस की बैठक बुलाकर निर्णय लेना पड़ेगा। इसके बाद हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई शुक्रवार तक स्थगित कर दी और हाउस के निर्णय की जानकारी देने के आदेश जारी कर दिए।

क्या किसी उद्योगपति को अपने संस्थान के बाहर धरने पर बैठे देखा है

इससे पहले हाई कोर्ट के निर्देशों पर अमल करते हुए हड़ताली वकीलों ने बुधवार को 21 दिन बाद न्यायिक कार्यों से अदालत में जाने वाले याचियों को नहीं रोका। चंडीगढ़ के प्रशासक के सलाहकार, डीजीपी व गृह सचिव बुधवार को कोर्ट में उपस्थित हुए। दोपहर बाद सुनवाई शुरू होते ही चीफ जस्टिस कृष्ण मुरारी, जस्टिस राजीव शर्मा व जस्टिस आरके जैन पर आधारित फुल बेंच ने बार के विरोध करने के तरीके पर सवाल उठाए।

चीफ जस्टिस ने कहा कि हड़ताल करना आपका अधिकार है, लेकिन इससे किसी को भी परेशानी नहीं होनी चाहिए। बेंच ने कहा कि हाई कोर्ट वकीलों की संपति नहीं है। हड़ताल में लाउड स्पीकर के इस्तेमाल पर चीफ जस्टिस नाराज हुए। उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट आपका काम करने का स्थान है। क्या किसी दुकानदार या उद्योगपति को अपने संस्थान के बाहर ताला लगाकर धरने पर बैठे देखा है।

याची को रोकना गैरकानूनी

चीफ जस्टिस ने कहा कि अगर आपका पड़ोसी पूरा दिन आपके दरवाजे पर लाउड स्पीकर बजाता रहे तो आपको कैसा लगेगा। चीफ जस्टिस ने हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष डीपीएस रंधावा और सचिव रोहित सूद से कहा कि हमें आपकी हड़ताल से कुछ लेना देना नहीं, लेकिन किसी याची को हाई कोर्ट में प्रवेश नहीं करने देना गैरकानूनी है।

वकीलों से पूछा किस लिए कर रहे हड़ताल

हाई कोर्ट ने कहा कि हम ट्रिब्यूनल के पास जाने वाले केस हाईकोर्ट में सुने जाने के आदेश दे चुके हैं। हरियाणा सरकार भी मुख्य सचिव की अध्यक्षता में इस ट्रिब्यूनल की कानूनी वैधता, महत्व और कार्यक्षमता पर गौर करने के लिए कमेटी गठित कर चुकी है। फिर हड़ताल किस मंशा से की जा रही है।

चीफ जस्टिस ने कहा सुप्रीम कोर्ट खारिज कर चुकी पहले की हड़तालें

चीफ जस्टिस ने हाईकोर्ट बार की हड़ताल के मद्देनजर शीर्ष अदालत के कई फैसलों को पढ़ा, जहां सुप्रीम कोर्ट ने वकीलों की इस तरह की हड़ताल को अवैध करार दिया था। चीफ जस्टिस ने कहा कि वकील विरोध स्वरूप प्रेस स्टेटमेंट जारी कर सकते है। बैनर लगाकर, काली पट्टी बांधकर व प्रेस से बातचीत कर अपना विरोध जता सकते हैं। कोर्ट परिसर से बाहर जाकर उन्हें विरोध प्रदर्शन करना होगा।

बड़े मुद्दों का फैसला अदालतें करती हैं

चीफ जस्टिस के इस तर्क पर बार के अध्यक्ष ने कहा कि हम एक बड़े मुद्दे का विरोध कर रहे हैं। चीफ जस्टिस ने कहा कि बड़े मुद्दों का फैसला अदालतों द्वारा किया जाता है। नियमों के अनुसार वकीलों को हड़ताल करने का कोई अधिकार नही है।

Posted By: Sunil Kumar Jha

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