यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 28, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
जाट आंदोलन : हरियाणा में हाई अलर्ट, जिलों में अर्द्ध सैनिक बलों का फ्लैग मार्च
हरियाणा में जाट एक बार फिर आंदोलन के लिए तैयार हैं। ऐसे में राज्य में कड़ी सुरक्षा की गई है।हाई ...और पढ़ें

जेएनएन, चंडीगढ़। जाटों के रविवार से शुरू हो रहे आंदोलन के लिए राज्य सरकार ने कड़े इंतजाम किए हैं। राज्य के 19 जिलों में शुरू हो रहे इस आंदाेलन के मद्देनजर विभिन्न शहरों में पुलिस और अर्द्ध सैनिक बलों ने मोर्चा संभाल लिया है। राज्य में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है। हिसार, रोहतक, कैथल, जींद सहित अधिकतर शहराें में फ्लैग मार्च हुआ। पिछले साल आंदोलन के दौरान जो कुछ हुआ उसे देखते हुए इस बार सरकार कोई ढि़लाई नही बरतना चाहती। हिसार सहित संवेदनशील जिलों में धारा 144 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी गई है।
जाट आंदोलन से निपटने को सरकार ने पूरी ताकत झोंक दी है। प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी पूरे हालात पर नजर रखे रहे हैं। पुलिस व अर्द्धसैनिक बलों के जवानों ने कई शहरों में फ्लैग मार्च किया। रोहतक, हिसार, जींद, कैथल, भिवानी, झज्जर और सोनीपत जिलों पर खास नजर रखी जा रही है। हिसार शहर और हांसी में पुलिस अौर अर्द्ध सैनिक बलाें ने फ्लैग मार्च किया।

रोहतक में शनिवार को फ्लैग मार्च करते अर्द्ध सैनिक बलों के जवान।
हिसार में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए आगामी आदेशों तक धारा 144 लागू कर दी गई है। ऐसा ही अन्य जिलों में भी किया गया है। आंदोलन के दौरान गैर कानूनी गतिविधियां, सड़क-रेल मार्ग को बाधित करने और वाटर चैनल और बिजली घर आदि की सेवाएं बाधित करने पर कडी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
देखें तस्वीरें: जाट आंदोलन के मद्देनजर हरियाणा में हाई अलर्ट, फ्लैग मार्च
आदेशों के अनुसार पांच या इससे अधिक व्यक्तियों के एकत्रित होने, किसी भी प्रकार का घातक हथियार लेकर चलने पर पूर्णतया पाबंदी लगा दी गई है। इन हथियारों में अग्नि अस्त्र, तलवार, लाठी, बरछा, कुल्हाड़ी, जेली, गंडासे,चाकू व अन्य कोई भी हथियारनुमा वस्तु शामिल हैं।
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कैथल में पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स ने जिले भर में फ्लैग मार्च किया। टुकडि़यां लघु सचिवालय से चलकर पिहोवा चौक होते हुए कलायत, बालू, कसान, किठाना, जाखौली, देबन टुकड़ियां। एसपी सुमेर प्रताप सिंह, एडीसी कैप्टन शक्ति सिंह तीन एसडीएम सहित तमाम अधिकारी फ्लैग मार्च में शामिल हुए।
चरखी दादरी जिले में भी पुलिस और अर्द्ध सैनिक बलों ने फ्लैग मार्च किया। दादरी शहर में भी फ्लैग मार्च हुआ। फ्लैग मार्च एसपी सुनील दलाल के नेतृत्व में हुआ। जींद में भी पुलिस और अर्द्ध सैनिक बलाें ने फ्लैग मार्च किया। जवानों ने शहर और आसपास के क्षेत्रों में भी फ्लैग मार्च किया।
यह भी पढ़ें: खापें दो फाड़ फिर भी आंदोलन को तैयार हैं जाट, अर्द्ध सैनिक बलों की 55 कंपनियां तैनात बता दें कि पिछले साल फरवरी में हुए जाट आंदोलन के दौरान 30 लोगों की मौत हो गई थी और अरबों की संपत्ति का नुकसान हुआ। संवेदनशील जिलों में अर्द्धसैनिक बलों की 55 कंपनियों के साथ ही रैपिड एक्शन फोर्स, हरियाणा पुलिस और सात हजार से अधिक होमगार्डों ने मोर्चा संभाल लिया है। रोहतक, झज्जर, जींद, सोनीपत, कैथल, पानीपत, भिवानी और हिसार सहित दर्जनभर जिलों में चप्पे-चप्पे पर जवान तैनात किए गए हैं।

कैथल में फ्लैग मार्च करते पुलिस और अर्द्ध सैनिक बलाें के जवान।
दिल्ली को जलापूर्ति करने वाली मूनक नहर की सुरक्षा बढ़ाते हुए रेलवे टै्रक और हाईवे पर अतिरिक्त फोर्स की तैनाती की गई है। सभी जिलों के पुलिस अधिकारियों के साथ नियमित वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की व्यवस्था की गई है। हर रोज सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की जाएगी। पुलिस कर्मियों और प्रशासनिक अधिकारियों की छुट्टियां पहले ही रद की जा चुकी हैं।
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सरकार ने उठाए कदम
-गांवों में शांति कमेटियों का गठन, धरना स्थलों की वीडियोग्राफी होगी।
-पेट्रोल पंपों पर खुले रूप में पेट्रोल व डीजल सहित अन्य ज्वलनशील पदार्थ बेचने पर प्रतिबंध।
-टीवी चैनल व केबल पर धरना प्रदर्शन से संबंधित किसी भी प्रकार की आपत्तिजनक भाषा व चलचित्र के प्रसारण पर रोक।
-राष्ट्रीय राजमार्ग, रेलवे लाइन, बिजली स्टेशन तथा अन्य सरकारी संपत्ति की सुरक्षा के लिए पुख्ता प्रबंध। इनके पास धरना-प्रदर्शन की अनुमति नहीं।
-पंच-सरपंचों की सहायता से लोगों को समझाएंगे डीसी व एसपी।
-एचसीएस अधिकारियों के अलावा जिला राजस्व अधिकारी, डीडीपीओ, तहसीलदारों, नायब तहसीलदारों एवं बीडीपीओ को गांवों में तैनात किया।
-कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए धरना स्थलों पर ड्यूटी मजिस्ट्रेट तैनात।
-प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से अफवाह फैलाने पर कानूनी कार्रवाई।
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-सोशल मीडिया पर रखी जा रही नजर। आपत्तिजनक व भड़काऊ भाषा के इस्तेमाल पर कार्रवाई।
-सार्वजनिक व निजी संपत्ति को नुकसान होने पर आंदोलनकारियों से होगी भरपाई।
-कानून का उल्लंघन हुआ तो धारा 120 बी के तहत दोषियों पर आपराधिक मुकदमा दर्ज होगा।
-भीड़ में मौजूद सभी व्यक्ति चाहे वे आंदोलन से जुड़े न हों तो भी उन्हें दोषी माना जाएगा।
-भीड़ व दंगाइयों द्वारा प्रयोग किए गए वाहन का मालिक व चालक भी दोषी माने जाएंगे चाहे वे मौके पर न हों।
-साउंड सिस्टम लगाने और लंंगर चलाने वालों पर भी होगी कार्रवाई।
- मूनक और पिचौलिया हेड पर अतिरिक्त फोर्स की तैनाती।
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कानून का उल्लंघन किया तो होगी सख्ती
जाट आंदोलनकारियों से निपटने के लिए किए जा रहे तमाम प्रयासों के बीच शनिवार को पुलिस महानिदेशक डॉ. केपी सिंह ने उच्च स्तरीय बैठक ली। सचिवालय में करीब एक घंटे तक चली इस बैठक में एडीजीपी व आइजी लेवल के अधिकारियों ने कानून व्यवस्था बनाए रखने की रणनीति बनाई।
डीजीपी ने पूरी स्थिति पर रिपोर्ट लेने के बाद अधिकारियों को निर्देश दिया कि अपने अधीन जिलों के पुलिस अधीक्षकों से तालमेल बनाए रखें। समय-समय पर रिपोर्ट लेकर ऊपर भेजें। व्यवस्था में अगर कहीं झोल है तो इसे तुरंत दुरुस्त किया जाए। अगर कहीं हालात बिगड़ते हैं तो आंदोलनकारियों से सख्ती से निपटा जाए। उन्होंने कहा कि जो भी व्यक्ति कानून के दायरे में रहकर अपनी बात कहेगा, उसका स्वागत किया जाएगा। तोडफ़ोड़ और गैर कानूनी काम बर्दाश्त नहीं होंगे।
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बता दें कि मुख्य सचिव डीएस ढेसी खुद संवेदनशील माने जा रहे आठ जिलों में जाकर स्थिति का जायजा लेते हुए अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दे चुके हैं। डीजीपी भी आंदोलनकारियों को समझाने तथा कानून व्यवस्था का जायजा लेने के लिए फील्ड में उतर चुके। मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव राजेश खुल्लर और गृह सचिव रामनिवास के बीच बैठकों के दौर जारी हैैं।
एडीजीपी (कानून) मोहम्मद अकील और आइजी (सीआइडी) अनिल कुमार राव फील्ड में पुलिस अधिकारियों के साथ बैठकें कर रहे हैैं। मुख्यालय का जिम्मा मुख्य सचिव डीएस ढेसी और गृह सचिव रामनिवास ने संभाला हुआ है। पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा मिल रहे फीडबैक के बारे में मुख्यमंत्री कार्यालय को नियमित रिपोर्ट भेजी जा रही है।
जेलों में इंतजाम बढ़े
जाट आरक्षण के मद्देनजर जेल महानिदेशक यशपाल सिंघल ने सभी जिलों के जेल अधीक्षकों को निर्देश दिए हैं कि कम समय में किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहें। जेल अधीक्षकों को पुलिस अधीक्षकों व संबंधित अधिकारियों से संपर्क मेें रहने को कहा गया है। साथ ही जेलों में कैदियों के खान-पान के लिए पर्याप्त रसद के इंतजाम के अलावा सुरक्षा बढ़ा दी गई है। जेल की ओर आने वाली सड़कों पर नाके लगाकर हथियारबंद पुलिस जवान तैनात किए गए हैं।
हिंसा हुई तो आयोजक जिम्मेदार : गृह सचिव
'' प्रशासन धरनों के लिए सशर्त अनुमति दे रहा है। अगर कहीं हिंसा होती है तो आयोजक जिम्मेदार होंगे और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन पूरी स्थिति पर पैनी नजर रखे है और अगर कहीं पर भी किसी ने कानून को हाथ में लेने की कोशिश की तो त्वरित कार्रवाई करते हुए उसे हिरासत में ले लिया जाएगा।
-रामनिवास, गृह सचिव, हरियाणा।
