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HCS भर्ती में आवेदन के बाद श्रेणी बदलने की मांग खारिज, पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने याचिका की नामंजूर

Published: Sat, 26 Sep 2026 11:40 AM (IST)

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने हरियाणा सिविल सेवा (HCS) भर्ती में आवेदन के बाद सामान्य वर्ग से पिछड़ा वर्ग-ए ...और पढ़ें

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HighLights

  1. हाई कोर्ट ने HCS भर्ती में श्रेणी बदलने की याचिका खारिज की

  2. आवेदन के बाद श्रेणी परिवर्तन की अनुमति नहीं, कटऑफ तिथि महत्वपूर्ण

  3. सामान्य वर्ग से पिछड़ा वर्ग-ए में बदलाव की मांग नामंजूर हुई

राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने हरियाणा सिविल सेवा एवं संबद्ध सेवाओं की भर्ती में आवेदन के बाद सामान्य वर्ग से पिछड़ा वर्ग-ए श्रेणी में बदलाव की मांग करने वाले अभ्यर्थी की याचिका खारिज कर दी है।

जस्टिस निधि गुप्ता ने स्पष्ट किया कि भर्ती प्रक्रिया में आवेदन करते समय अभ्यर्थी द्वारा चुनी गई श्रेणी और निर्धारित कटआफ तिथि पर लागू पात्रता शर्तों को बाद में बदला नहीं जा सकता।

अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता ने स्वयं सामान्य वर्ग से आवेदन किया था, इसलिए चयन प्रक्रिया के बाद उसे अपनी श्रेणी बदलकर आरक्षण का लाभ लेने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

मामला वर्ष 2021 में हरियाणा सिविल सेवा एवं संबद्ध सेवाओं की भर्ती से जुड़ा है। हरियाणा लोक सेवा आयोग ने 26 फरवरी 2021 को भर्ती का विज्ञापन जारी किया था और आवेदन की अंतिम तिथि दो अप्रैल 2021 निर्धारित थी। याचिकाकर्ता ने सामान्य वर्ग से आवेदन किया था।

पिछड़ा वर्ग को क्रीमी लेयर में रखा गया

उस समय लागू अधिसूचनाओं के अनुसार छह लाख रुपये से अधिक वार्षिक आय वाले पिछड़ा वर्ग के लोगों को क्रीमी लेयर में रखा गया था। इसी वजह से याचिकाकर्ता ने पिछड़ा वर्ग के बजाय सामान्य वर्ग में आवेदन किया था। बाद में 24 अगस्त 2021 को सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद उसने अपनी श्रेणी बदलकर पिछड़ा वर्ग-ए करने की मांग की और इसके समर्थन में 15 सितंबर 2021 को जारी प्रमाणपत्र भी पेश किया।

हाई कोर्ट ने कहा कि आवेदन की अंतिम तिथि दो अप्रैल 2021 को अभ्यर्थियों की श्रेणी, शैक्षणिक योग्यता और अन्य पात्रता शर्तें निर्धारित हो चुकी थीं। आवेदन पत्र में एक बार किसी श्रेणी का चयन करने के बाद चयन प्रक्रिया के बाद के चरण में उसे बदलने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

अदालत ने पूर्व फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि भर्ती विज्ञापन की शर्तें और कटआफ तिथि बाध्यकारी होती हैं तथा आवेदन जमा होने के बाद श्रेणी में बदलाव की अनुमति देने से चयन प्रक्रिया में शामिल अन्य अभ्यर्थियों के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।

अदालत ने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने 24 अगस्त 2021 के फैसले में संबंधित अधिसूचनाओं को निरस्त करते हुए राज्य सरकार को नई अधिसूचना जारी करने की स्वतंत्रता दी थी, लेकिन उन अधिसूचनाओं के आधार पर पहले से हुए शैक्षणिक प्रवेश और राज्य सेवाओं में नियुक्तियों को प्रभावित नहीं करने का निर्देश दिया था।

17 नवंबर को जारी की अधिसूचना

इसके बाद हरियाणा सरकार ने 17 नवंबर 2021 को नई अधिसूचना जारी की, जिसमें क्रीमी लेयर के संबंध में फिर प्रावधान किया गया। हाई कोर्ट ने माना कि इस बाद की अधिसूचना के आधार पर भी याचिकाकर्ता को पिछड़ा वर्ग-ए का लाभ नहीं दिया जा सकता।

अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता ने स्वेच्छा से सामान्य वर्ग में आवेदन किया था और अब श्रेणी बदलने की अनुमति देना अन्य अभ्यर्थियों के हितों को प्रभावित कर सकता है। इन सभी परिस्थितियों को देखते हुए हाई कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी।