जेएनएन, चंडीगढ़। हरियाणा में बरसाती मौसम में सफाई कर्मचारियों और फार्मासिस्टों की हड़ताल आमजन पर भारी पड़ने लगी है। तीन दिन से हड़ताल पर चल रहे नगर पालिका कर्मचारियों ने जहां दो दिन के लिए हड़ताल बढ़ा दी है, वहीं ग्रामीण सफाई कर्मचारियों ने भी रविवार तक काम पर लौटने से इंकार कर दिया है। शहर हो या गांव, यहां-वहां जमा कचरे के ढेरों से बीमारियां फैलने का खतरा मंडराने लगा है। फार्मासिस्टों के सामूहिक धरने से सरकारी अस्पतालों में दवा के लिए तरसते मरीजों को शुक्रवार को दो घंटे के लिए डॉक्टर भी नहीं देखेंगे, जिससे उनकी मुश्किलें बढऩा तय है।

नगर पालिका कर्मचारी संघ ने वीरवार को गुप्त स्थान पर केंद्रीय कमेटी की बैठक बुलाकर 31 अगस्त तक हड़ताल जारी रखने का ऐलान कर दिया। संघ के प्रदेश अध्यक्ष नरेश कुमार शास्त्री और सर्व कर्मचारी संघ के प्रधान सुभाष लांबा ने बताया कि शनिवार से सभी 32 हजार हड़ताली सफाई कर्मचारी शहरों एवं कस्बों में प्रदर्शन करेंगे। पूरे प्रदेश में वाल्मीकि बस्तियों में मीटिंग कर जन समर्थन जुटाया जाएगा। सीटू से संबंधित दस हजार ग्रामीण सफाई कर्मचारियों ने भी रविवार तक हड़ताल को बढ़ाने की घोषणा की।

उधर, हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विस एसोसिएशन ने मांगों को लेकर शुक्रवार सुबह आठ से दस बजे तक ओपीडी में मरीज नहीं देखने का ऐलान किया है। हालांकि इस दौरान आपातकालीन सेवाएं जारी रहेंगी। एसोसिएशन के प्रधान डॉ. जसबीर परमार और उप प्रधान डॉ. शील कांत व एमपी सिंह ने कहा कि विशेषज्ञ डॉक्टरों को स्पेशल भत्ते और दूसरे राज्यों की तर्ज पर चार, नौ, तेरह और बीस साल में एसीपी (एश्योर्ड कॅरियर प्रमोशन) का लाभ देने की फाइल लंबे समय से मुख्यमंत्री कार्यालय में अटकी हुई है।

विगत 21 जुलाई को करनाल में हुई कार्यकारिणी में सरकार को इन दोनों बड़ी मांगों को पूरा करने के लिए 15 दिन का समय दिया गया था, लेकिन अभी तक इस संबंध में कुछ नहीं हुआ। इसलिए शुक्रवार को मजबूरन दो घंटे की कलम डाउन हड़ताल करनी पड़ी है। शनिवार को कार्यकारिणी की बैठक बुलाई गई है जिसमें आर-पार की लड़ाई का निर्णय लिया जा सकता है।

वहीं, चार दिन से सामूहिक अवकाश पर चल रहे 645 फार्मासिस्टों की हड़ताल से सरकारी अस्पतालों, प्राथमिक व सामुदायिक केंद्रों में स्वास्थ्य सेवाएं चरमराई हुई हैं। एसोसिएशन गवर्नमेंट फार्मासिस्ट ऑफ हरियाणा के राज्य प्रधान विनोद दलाल व प्रेस सचिव पुनीत गौतम ने कहा कि मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री की स्वीकृति के बावजूद वित्त विभाग ने 4600 ग्रेड पे की फाइल अटकाई हुई है। हिसार में एनएचएम (राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन) के फार्मासिस्टों ने रक्तदान कर वित्त विभाग की मनमानी के खिलाफ रोष जताया।

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Posted By: Kamlesh Bhatt

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