नई दिल्ली, [बिजेंद्र बंसल]। उत्तराखंड के देहरादून के गांव लोहारी में बनने वाले लखवार बांध की परियोजना से हरियाण्‍ाा के पानी संकट का काफी समाधान होगा। इससे दिल्‍ली और हरियाणा के बीच जारी जल विवाद का भी समाधान होगा। हरियाणा को इस डैम से रोज 1200 क्‍यूसेक पानी मिलेगा।

इस परियोजना पर छह राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने सहमति जता दी है। केंद्रीय जल संसाधन एवं नदी विकास मंत्री नितिन गडकरी के समक्ष नई दिल्ली में मंगलवार उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान सहित उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्रियों ने इस बांध परियोजना के सहमति प्रपत्र पर हस्ताक्षर किए। 3966.51 करोड़ रुपये की लागत से अगले तीन साल में बनने वाले इस बांध से कुल 330.66 क्यूबिक मीटर पानी की स्टोरेज हो सकेगी। इसमें से 158.12 क्यूबिक मीटर (47.82 फीसद ) पानी अकेले हरियाणा को मिलेगा। इसके तहत हरियाणा को रोजाना 1200 क्यूसेक पानी मिलेगा।

परियोजना के खर्च का 90 फीसद केंद्र सरकार और 10 फीसद राशि छह राज्य वहन करेंगेरोज मिलेगा

यह बांध उत्तराखंड को बाढ़ के खतरे से निजात दिलाएगा और अकेले उत्तराखंड को 300 मेगावाट बिजली मिलेगी। परियोजना के कुल खर्च का 90 फीसद केंद्र सरकार और 10 फीसद राशि छह राज्यों द्वारा वहन की जाएगी। हरियाणा परियोजना के लिए 123.29 करोड़ रुपये देगा। हरियाणा ने परियोजना में सिर्फ पानी की ही हिस्सेदारी रखी है।

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हरियाणा को इस डैम से मिलेगा राेज 1200 क्यूसेक पानी

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने लखवार बांध परियोजना के समझौते को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि 42 साल से लटक रही इस परियोजना पर पहले किसी सरकार ने ध्यान नहीं दिया। उन्होंने बताया कि दो साल पहले उन्होंने लखवार बांध के मुद्दे को उठाया था। तब केंद्रीय जल संसाधन एवं नदी विकास मंत्रालय ने इसे पूरा करने की बाबत आश्वस्त किया था। उन्होंने कहा कि लखवार के अलावा यमुना पर रेणुका व किशाऊ बांध का निर्माण होना है। इनका लाभ हरियाणा को मिलेगा।

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दक्षिण हरियाणा के अंतिम छोर तक पहुंचेगा

लखवार बांध परियोजना से हरियाणा को करीब 1200 क्यूसेक अतिरिक्त पानी प्रतिदिन मिलेगा। यह पानी ताजेवाला बांध से यमुना में छोड़ा जाएगा। इसका फायदा जीटी रोड से लगते जिलों को सीधे रूप में मिलेगा, वहीं ओखला बैराज से आगरा व गुरुग्राम कैनाल में भी पानी की बढ़ोतरी होगी। इससे न सिर्फ दिल्ली की प्यास बुझेगी, बल्कि फरीदाबाद, पलवल, मेवात व गुरुग्राम सहित रेवाड़ी  और नारनौल तक पानी जाएगा।

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फरीदाबाद में तो इस पानी का सबसे ज्यादा फायदा होगा, क्योंकि यहां रेनीवेल परियोजना से शहर को पीने का पानी दिया जाता है। अब तक गर्मियों में जब यमुना में पानी कम रहता है तो दिल्ली के गंदे व केमिकलयुक्त पानी को ही शोधित करके शहर में सप्लाई किया जा रहा है।

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दिल्ली को यमुना साफ रखने पर देना होगा ध्यान

लखवार बांध परियोजना से मिलने वाले अतिरिक्त पानी का हरियाणा के दक्षिण क्षेत्र के जिलों को फायदा तभी होगा जब दिल्ली यमुना में गंदगी डालना बंद करेगा। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने बांध परियोजना पर सहमति जताने के बाद यह मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार को अपने सभी जलशोधन संयंत्रों को दुरुस्त करना होगा, ताकि दक्षिण हरियाणा के लिए ओखला बैराज से शुद्ध जल दिया जा सके।

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खत्म हो जाएगा दिल्ली-हरियाणा जल विवाद

इस परियोजना से यमुना के जल के बंटवारे का प्रबंधन भी दुरुस्त होगा। हरियाणा को दिल्ली के लिए जो पानी देना होता है, उसके प्रबंधन में भी सुधार होगा। बता दें, पिछले साल पानी के विवाद को लेकर दिल्ली सरकार हरियाणा के खिलाफ नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल सहित सुप्रीम कोर्ट तक गई थी। 1200 क्यूसेक अतिरिक्त पानी से दिल्ली की भी प्यास बुझेगी।

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लखवार बांध समझौते ने खोला राज्यों के जल विवाद निपटारे का रास्ता : गडकरी

केंद्रीय जल संसाधन एवं नदी विकास मंत्री नितिन गडकरी ने लखवार बांध परियोजना के लिए छह राज्यों के बीच हुए समझौते पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि 42 साल पुरानी इस परियोजना पर सहमति बनने से अब अन्य राज्यों में चल रहे जल विवाद निपटारे का रास्ता भी खुल गया है।

गडकरी ने पंजाब-हरियाणा के बीच सतलुत-यमुना लिंक नहर निर्माण का जिक्र करते हुए कहा कि पाकिस्तान जा रहे पानी को जब भारत रोक लेगा तो फिर पंजाब में पानी की कोई कमी नहीं रहेगी। पंजाब में अतिरिक्त पानी की संभावनाओं से हरियाणा को भी पर्याप्त पानी मिलेगा। गडकरी के इस बयान से माना जा रहा है कि केंद्र सरकार अगले चरण में एसवाईएल नहर पर हरियाणा-पंजाब के बीच विवाद को सुलझाने का काम करेगी।

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Posted By: Sunil Kumar Jha