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हरियाणा में सेमग्रस्त भूमि को उपजाऊ बनाने की पहल, ड्रेनेज सिस्टम से बदलेगी तस्वीर; 5415 करोड़ रुपये होंगे खर्च

Published: Fri, 21 Aug 2026 03:58 PM (IST)

हरियाणा में 'जल सुरक्षित हरियाणा' कार्यक्रम के तहत झज्जर और रोहतक सहित दो लाख एकड़ सेमग्रस्त भूमि को ड्रेनेज सिस्टम से खेती योग्य बनाया जाएगा।

फोटो एआई द्वारा जनरेट की गई है।

फोटो एआई द्वारा जनरेट की गई है।

HighLights

  1. दो लाख एकड़ सेमग्रस्त भूमि को खेती योग्य बनाया जाएगा

  2. 'मेरा पानी मेरी विरासत' योजना से फसल विविधीकरण को बढ़ावा

  3. 5,715 करोड़ रुपये की योजना में विश्व बैंक का सहयोग

राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। 'जल सुरक्षित हरियाणा'' कार्यक्रम को धरातल पर उतारने के प्रयास शुरू हो गए हैं। झज्जर और राेहतक सहित अन्य जिलों में सेमग्रस्त दो लाख एकड़ भूमि को खेती योग्य बनाने के लिए ड्रेनेज सिस्टम लगाए जाएंगे।

कुरुक्षेत्र, कैथल, जींद और करनाल में पांच लाख एकड़ क्षेत्र में धान की सीधी बिजाई का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा 1.12 लाख एकड़ क्षेत्र में ''मेरा पानी मेरी विरासत'' योजना के तहत वैकल्पिक फसलों को बढ़ावा दिया जाएगा।

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा ने शुक्रवार को अधिकारियों के साथ बैठक में कहा कि क्लस्टर-13 और क्लस्टर-5 में मृदा परीक्षण के आधार पर जिप्सम और हरी खाद के उपयोग को अनिवार्य किया जाएगा। वर्ष 2026 से 2032 तक कुल छह वर्षों की अवधि में लागू होने वाले कार्यक्रम के लिए 5,715 करोड़ रुपये तय किए गए हैं। इसमें से 4000 करोड़ विश्व बैंक देगा, जबकि शेष 1714 करोड़ हरियाणा सरकार अपने अंशदान के रूप में वहन करेगी।

नीति आयोग, केंद्रीय जल आयोग और जल शक्ति मंत्रालय सहित विभिन्न केंद्रीय विभागों और राज्य मंत्रिमंडल से आवश्यक स्वीकृतियां प्राप्त होने के बाद इस प्रस्ताव को औपचारिक रूप से विश्व बैंक के समक्ष प्रस्तुत कर दिया गया है, जिसकी अंतिम ऋण स्वीकृति अक्टूबर तक पूर्ण होने का लक्ष्य रखा गया है।
कृषि घटक के लिए 886 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है। इसमें से 436 करोड़ रुपये जलभराव तथा लवणीय (सेम) भूमि के सुधार के लिए और 450 करोड़ रुपये धान की सीधी बिजाई और ''मेरा पानी मेरी विरासत'' योजना के अंतर्गत फसल विविधीकरण, ढैंचा आधारित हरी खाद और जिप्सम के प्रयोग को बढ़ावा देने पर खर्च किए जाएंगे।