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TGT अंग्रेजी अभ्यर्थियों की वरिष्ठता पर हाई कोर्ट का आदेश, हरियाणा सरकार को दिया 3 महीने में फैसला लेने का निर्देश

Published: Tue, 29 Sep 2026 12:35 PM (IST)

हरियाणा में टीजीटी अंग्रेजी के चयनित अभ्यर्थियों को 2022 में चयन के बावजूद 2024 में नियुक्ति मिली, जिससे वरिष्ठता और ...और पढ़ें

पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट (फाइल फोटो)

पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट (फाइल फोटो)

HighLights

  1. टीजीटी अंग्रेजी चयनितों को 2022 में चयन, 2024 में नियुक्ति।

  2. अभ्यर्थी 2022 से वरिष्ठता और सेवा लाभों की मांग कर रहे।

  3. हाई कोर्ट ने सरकार को तीन माह में निर्णय का आदेश दिया।

राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। हरियाणा में टीजीटी अंग्रेजी पद पर चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति मिलने के बावजूद वरिष्ठता और उससे जुड़े लाभ नहीं मिलने का मामला पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट पहुंचा। हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं की मांग पर सीधे लाभ देने के बजाय सरकार को उनकी लंबित मांग पर तीन माह के भीतर कारणयुक्त आदेश पारित करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि यदि याचिकाकर्ता मांगे गए लाभ के हकदार पाए जाते हैं तो उन्हें तत्काल प्रदान किया जाए।

जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ ने कमलेश देवी व अन्य की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। याचिकाकर्ताओं ने हरियाणा टीजीटी अंग्रेजी पद के लिए आवेदन किया था। वे आर्थिक रूप से पिछड़ा व्यक्ति सामान्य (ईबीपीजी) श्रेणी में चयन प्रक्रिया में शामिल हुए और आयोग की 19 अक्टूबर 2022 की सिफारिश सूची में उनके नाम शामिल किए गए।

चयन होने के बावजूद नियुक्ति में हुई देरी

याचिकाकर्ताओं के अनुसार, उनका चयन होने के बावजूद नियुक्ति में देरी हुई। इसका कारण इसी भर्ती से संबंधित मामले में हाई कोर्ट के अंतरिम आदेश थे। बाद में 18 मई 2018 को अदालत ने ईबीपीजी श्रेणी के उम्मीदवारों को याचिका के अंतिम परिणाम के अधीन नियुक्ति लेने की अनुमति दी थी।

याचिकाकर्ताओं को 14 जून 2024 को टीजीटी अंग्रेजी पद पर नियुक्ति आदेश जारी किए गए और 19 जून 2024 को उन्हें कार्यभार संभालने के निर्देश दिए गए। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि चयन वर्ष 2022 में हो चुका था, लेकिन उन्हें समान स्थिति वाले कर्मचारियों की तरह वरिष्ठता निर्धारण और परिणामी सेवा लाभ नहीं दिए गए। उन्होंने वरिष्ठता के अलावा पदोन्नति, एसीपी और वेतनवृद्धि जैसे लाभ भी संबंधित तिथि से दिए जाने की मांग की।

याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि ईबीपीजी श्रेणी के समान स्थिति वाले कर्मचारियों को वन विभाग, मुख्य सचिव कार्यालय और स्कूल शिक्षा विभाग में ऐसे लाभ दिए जा चुके हैं।

याचिकाकर्ता ने दिया हाई कोर्ट के आदेश का हवाला

याचिकाकर्ताओं ने 13 फरवरी 2026 को सुशील कुमार एवं अन्य बनाम हरियाणा सरकार एवं अन्य मामले में दिए गए हाई कोर्ट के आदेश का हवाला दिया। इस मामले में भी इसी विज्ञापन के तहत चयनित अभ्यर्थियों को अपनी मांग के संबंध में सरकार के समक्ष अभ्यावेदन देने और सक्षम प्राधिकारी को उस पर निर्णय लेने का निर्देश दिया गया था। इसी आधार पर याचिकाकर्ताओं ने संबंधित विभाग के समक्ष अभ्यावेदन दिया था, लेकिन उस पर अब तक निर्णय नहीं हुआ।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकील ने कहा कि फिलहाल वे केवल अपने अभ्यावेदन पर समयबद्ध निर्णय चाहते हैं। हरियाणा सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त महाधिवक्ता ने भी इस मांग पर कोई आपत्ति नहीं जताई।

हाई कोर्ट ने संबंधित प्राधिकारी को निर्देश दिया कि वह याचिकाकर्ताओं के अभ्यावेदन पर सुनवाई का अवसर देते हुए प्रमाणित आदेश की प्रति प्राप्त होने की तारीख से तीन माह के भीतर कारणयुक्त आदेश पारित करे। निर्णय की जानकारी याचिकाकर्ताओं को भी देनी होगी। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि याचिकाकर्ता मांगे गए लाभ के पात्र पाए जाते हैं तो संबंधित प्राधिकारी उन्हें तत्काल प्रदान करेगा।