पंचकूला, अनुराग अग्रवाल। अब से कुछ घंटों के बाद वर्ष 2021 अतीत बन जाएगा। फिर अतीत के अनुभवों से सीखकर नई सुगम राहों को चुना जाएगा। वैसे 2021 हमें बहुत कुछ देकर जा रहा है। बड़ी और गंभीर से गंभीर चुनौतियों पर कैसे पार पाया जा सकता है, यह हमें इस साल ने सिखाया है। भविष्य की चुनौतियों से निपटने का हौसला दिया है। कोरोना की दूसरी लहर शुरू होने के दौरान प्रदेश में इससे निपटने के इतने संसाधन नहीं थे, जितने की जरूरत थी। धीरे-धीरे टेस्टिंग लैब बढ़ी। दवाइयों का इंतजाम हुआ। आक्सीजन के प्लांट लग गए। अब कोई अस्पताल ऐसा नहीं रहा, जिसके पास आक्सीजन प्लांट नहीं है। नए अस्पतालों को तभी मंजूरी मिलेगी, जब उनके पास आक्सीजन प्लांट होंगे। तीन करोड़ लोगों को अब तक वैक्सीन के सुरक्षा कवच से ढका जा चुका है।

हरियाणा की आबादी समूचे देश की तुलना में मात्र दो प्रतिशत है। सेना, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, ढांचागत विकास, खेल और राजनीति में हरियाणा ने इस एक साल में कई मुकाम हासिल किए हैं। देश की सेना के 10 प्रतिशत जवान हरियाणवी हैं। खेलों की पदक तालिका में भारत का सिर गर्व से ऊंचा करने का काम हरियाणवी खिलाड़ियों ने किया है। हर जिले में एक-एक मेडिकल कालेज की परिकल्पना ने इसी साल जीवंत रूप लिया है। प्रदेश में इस साल पांच से बढ़कर 13 मेडिकल कालेज हो गए। सरकार का संकल्प है कि हर जिले में कम से कम एक मेडिकल कालेज अवश्य बने। इस संकल्प को पूरा करने के लिए ब्लू प्रिंट तैयार है। राज्य के पास आक्सीजन की कमी नहीं है। डाक्टरों की कमी को दूर करने के लिए इस साल 950 नए डाक्टरों की भर्ती की प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है। मेडिकल कालेजों में एमबीबीएस की सीटें बढ़ाकर 1950 हो गई।

अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती समारोह के दौरान लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला (बाएं), गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज (मध्य में) और हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल। जागरण

पूरी दुनिया में भारत का नाम रोशन करने वाले नीरज चोपड़ा हरियाणा की मिट्टी की देन हैं। यहां की महिला एवं पुरुष हाकी टीम के खिलाड़ियों के खेल जज्बे की पूरी दुनिया कायल है। ढांचागत विकास के लिहाज से देखा जाए तो इस साल केएमपी यानी कुंडली-मानेसर-पलवल और केजीपी यानी कुंडली-गाजियाबाद-पलवल एक्सप्रेसवे निर्माण के रूप में राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली पर यातायात का दबाव कम हुआ है। हरियाणा ने इस साल सुशासन की दिशा में लंबी छलांग मारी है। करीब 550 सरकारी सेवाओं को आनलाइन किया गया है। हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग और हरियाणा लोक सेवा आयोग की भर्तियों में पिछले दो दशक से हो रहे भ्रष्टाचार को खत्म करने की पहल भी इसी साल में हुई है। करीब सौ सरकारी योजनाओं को परिवार पहचान पत्र से जोड़ा गया है। यानी कोई भी सरकारी लाभ हासिल करने के लिए तमाम दस्तावेजों की बजाय केवल परिवार पहचान पत्र से ही काम चल जाएगा। प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) योजनाओं के जरिये करोड़ों रुपये के भ्रष्टाचार पर सरकार इस साल रोक लगाने में कामयाब रही है। स्वामी ज्ञानानंद महाराज के सानिध्य में मुख्यमंत्री मनोहर लाल श्रीमद्भगवद् गीता का प्रचार-प्रसार दुनिया के तमाम देशों तक करने में कामयाब रहे।

राजनीतिक लिहाज से यह साल बहुत ही सक्रियता भरा रहा है। किसान संगठनों के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ चले आंदोलन ने हरियाणा व पंजाब के लोगों के बीच भाईचारे की नींव को पहले से ज्यादा मजबूत किया, लेकिन इस आंदोलन में जिस तरह राजनीति का तड़का लगा, उससे राज्य की शांति व्यवस्था भंग होते-होते बची है। भाजपा-जजपा गठबंधन की सरकार को इस साल में पहले से अधिक मजबूती मिली है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल की सरकार ने संयम से काम लिया।

चंडीगढ़ के नगर निगम चुनाव में आम आदमी पार्टी की मजबूत दस्तक ने अरविंद केजरीवाल के लिए पंजाब और हरियाणा में प्रवेश की राह आसान कर दी है। इस साल इनेलो प्रमुख ओमप्रकाश चौटाला जेबीटी शिक्षक भर्ती मामले में दस साल की सजा पूरी कर वापस लौटे, लेकिन वह अपने परिवार के दोनों बेटों अजय सिंह चौटाला और अभय सिंह चौटाला को एक नहीं कर सके। पूरे साल चौटाला परिवार के सदस्यों की राहें अलग-अलग ही रही। कुल मिलाकर इस साल को चुनौतियों और तूफान के बीच हौसला प्रदान करने वाला कहा जा सकता है।

[स्टेट ब्यूरो चीफ, हरियाणा]

Edited By: Sanjay Pokhriyal