जेएनएन, चंडीगढ़। हरियाणा के रोडवेज कर्मचारी एक बार फिर हड़ताल पर जाने की तैयारी में हैैं। इसी माह सात अगस्त को सर्व कर्मचारी संघ और महासंघ तथा उनसे जुड़ी यूनियनों ने हड़ताल की थी, इस बार 5 सितंबर को हरियाणा रोडवेज ज्वाइंट एक्शन कमेटी ने बसों के चक्का जाम का एलान किया है। ज्वाइंट एक्शन कमेटी में पांच रोडवेज यूनियन शामिल हैैं। प्रदेश में करीब 4200 रोडवेज बसें हैैं, जबकि आबादी के लिहाज से 10 हजार नई बसों की जरूरत है।  

चंडीगढ़ के भाकना भवन में राज्य प्रधान हरि नारायण शर्मा की अध्यक्ष में आयोजित ज्वाइंट एक्शन कमेटी की बैठक में 5 सितंबर की हड़ताल की रूपरेखा को अंतिम रूप दिया गया। रोडवेज कर्मचारी 700 प्राइवेट बसें किराये पर लेकर चलाने का विरोध कर रहे हैैं। उनकी दलील है कि राज्य सरकार के डिपो में 500 बसें खड़ी हुई हैैं। सरकार के पास चालक तो हैैं मगर परिचालक नहीं हैैं, जिस कारण यह बसें बाहर नहीं निकाली जा रही और जंग खाने के लिए उन्हें छोड़ दिया गया है।

बैठक में जानकारी दी गई कि राज्य सरकार कर्मचारियों के साथ समझौते तो करती है मगर उन्हें लागू नहीं करती। बैठक में प्रस्ताव पारित कर राजनीतिक दलों से हरियाणा रोडवेज में चल रही निजीकरण की नीति पर उनकी राय पूछी गई। साथ ही निर्णय लिया गया कि सात अगस्त की हड़ताल में शामिल 1628 कर्मचारियों को यदि नौकरी से हटाया गया तो आंदोलन को तेज किया जाएगा।

ज्वाइंट एक्शन कमेटी के सदस्य अनूप सहरावत, बाबू लाल यादव, जय भगवान कादियान, आजाद सिंह गिल ने कहा कि 13 जून 2017 को हुए समझौते में प्राइवेट परिवहन नीति 2016-2017 को रद करने के उपरांत उपरोक्त संचालित प्राइवेट बसों को ग्रामीण अंचल के 452 मार्गों पर चलाया जाना था, मगर इसे आज तक लागू नहीं किया गया है। केंद्रीय कमेटी के सदस्य सुरेश लाठर, बलवान सिंह दोदवा, विनोद शर्मा और पवन सांभली समेत कई नेताओं ने पांच सितंबर को चक्का जाम का समर्थन किया।

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By Kamlesh Bhatt