जेएनएन, चंडीगढ़। हथिनीकुंड बैराज से छोड़ा गया सवा छह लाख क्यूसेक पानी यमुना नदी के रास्ते दिल्ली तक पहुंच चुका है। बैराज से इस पानी को दो दिन पहले छोड़ा गया था। हरियाणा ने इस पानी को बेहद कम बताते हुए दावा किया कि दिल्ली की गंदगी साफ करने के लिए यमुना में कम से कम 10 लाख क्यूसेक पानी बहना चाहिए। उधर, मौसम साफ होने के बाद यमुना का जलस्तर लगातार कम हो रहा है। सोमवार शाम पांच बजे तक नदी में 42,766 क्यूसेक पानी बह रहा था।

उल्लेखनीय है कि हथिनीकुंड बैराज पर पानी स्टोर नहीं होता। हिमाचल के पहाड़ी इलाकों से बरसात का जो भी पानी बहकर आता है, वह बैराज के जरिये यमुना और इसकी सहायक नदियों में छोड़ दिया जाता है। हरियाणा से दिल्ली के बीच यमुना की लंबाई करीब 200 किलोमीटर है और इस बीच कोई बांध भी नहीं है, जहां पानी को रोका जा सके।

हिमाचल में ही इस पानी को रोकने के लिए मनोहर सरकार रेणुका, किसाऊ और लखवार आदि तीन बांध बनाने की दिशा में प्रयासरत है। इनके बनने के बाद हरियाणा में यमुना न तो ओवरफ्लो होगी और न ही दिल्ली को अधिक चिंतित होने की जरूरत पड़ेगी।

सिंचाई विभाग हरियाणा के मुख्य अभियंता (लिफ्ट कैनाल यूनिट) डॉ. सतबीर कादियान के अनुसार यमुना की क्षमता करीब 25 लाख क्यूसेक की है। चूंकि दिल्ली में लोगों ने यमुना में ही घर बना लिए। ऐसे में जब पानी नदी में बहता है तो इन लोगों को बाढ़ का अंदेशा हो जाता है, जबकि वे खुद यमुना के पानी में बाधक बने हुए हैैं।

मुख्य अभियंता के अनुसार दिल्ली से होकर गुजरने वाली यमुना में भारी गंदगी डाली जाती है। वहां की सरकार का ध्यान भी इस तरफ नहीं है। इस गंदगी की अच्छी तरह से सफाई करने के लिए हथिनीकुंड बैराज से यमुना के जरिये दिल्ली तक कम से कम 10 लाख क्यूसेक पानी पहुंचना चाहिए।

डॉ. सतबीर कादियान ने बताया कि सोमवार रात नौ से दस बजे के बीच छह लाख क्यूसेक पानी दिल्ली पहुंच रहा है। यह पानी दिल्ली के ओखला के रास्ते उत्तर प्रदेश और कुछ हरियाणा की तरफ आगे बढ़ जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि हथिनीकुंड बैराज पर कोई बांध नहीं है, जिस कारण हरियाणा को अक्सर दिल्ली में बाढ़ के लिए जिम्मेदार ठहराया जाता है।

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Posted By: Kamlesh Bhatt