जेएनएन, चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने हरियाणा, पंजाब और चंडीगढ़ द्वारा Chemical nicotine पर बैन की जानकारी देने के बाद इसको लेकर दाखिल जनहित याचिका का निपटारा कर दिया। कोर्ट ने तीनों की टास्क फोर्स को सख्ती से बैन के आदेश का पालन करवाने के आदेश जारी किए हैं।

हाईकोर्ट में इस मामले में लंबे समय से सुनवाई चल रही थी। इस दौरान हाईकोर्ट के आदेश पर हरियाणा, पंजाब और यूटी में Nicotine को प्रतिबंधित कर दिया गया। नोटिफिकेशन के अनुसार कुदरती Nicotine बेचना और खरीदना अपराध की श्रेणी से बाहर रखा गया है। केवल Chemical nicotine के सीधे प्रयोग को ही अपराध की श्रेणी में रखा गया है।

तीनों ने बताया कि ई-सिगरेट, हुक्के में Chemical तंबाकू व अन्य प्रकार से Chemical nicotine लेना अपराध की श्रेणी में रखा गया है। इस मामले में याचिकाकर्ता हेमंत गोस्वामी ने बताया कि Nicotine केवल इंसान के लिए ही नहीं बल्कि जानवरों और कीड़े मकौडों के लिए भी खतरनाक होता है। इसे पूर्व में पेस्टीसाईज (कीड़े मारने की दवा) की श्रेणी में रखा गया था परंतु इसके घातक प्रभाव को देखते हुए इसे बैन कर दिया गया था। इसके खतरनाक होने की क्षमता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि Nicotine की 30 मिलीग्राम की सीधी मात्रा एक व्यक्ति की मौत के लिए काफी होती है और एक ग्राम Nicotine 30 लोगों की जान ले सकती है। ऐसे में Chemical nicotine को परोसेजाने पर सख्ती से प्रतिबंध पर अमल करने की जरूरत है।

हाई कोर्ट ने ही हरियाणा, पंजाब और यूटी में पहले Chemical nicotine पर प्रतिबंध लगाने के लिए टास्क फोर्स बनाने को कहा था। इसके बाद फोर्स बनाकर Chemical nicotine बेचने वालों पर लगाम लगाने का तीनों ने दावा किया है और कहा है कि ऐसे लोगों पर केस दर्ज किया जाएगा।

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Posted By: Kamlesh Bhatt

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