हरियाणा में बिजली संकट के बीच स्थास्थ्य सेवाएं भी बिगड़ने का डर, नर्सिंग ऑफिसर्स का हड़ताल को समर्थन
हरियाणा में बिजली वितरण प्रणाली के निजीकरण के विरोध में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल को नर्सिंग ऑफिसर्स वेलफेयर एसोसिएशन ने ...और पढ़ें

हरियाणा में हड़ताल पर बैठे हैं बिजली कर्मचारी। (सांकेतिक फोटो)
HighLights
निजीकरण का फैसला वापस लेने की मांग।
निजी कंपनियां बढ़ाएंगी उपभोक्ताओं की परेशानी।
मुख्यमंत्री, ऊर्जा मंत्री, मुख्य सचिव से गुहार।
जागरण संवाददाता, पंचकूला। हरियाणा में बिजली संकट के बीच स्वास्थ्य सेवाएं भी बिगड़ने की डर पैदा हो गया है, क्योंकि बिजली वितरण प्रणाली के निजीकरण के विरोध में चल रही बिजली कर्मचारियों की हड़ताल को नर्सिंग ऑफिसर्स वेलफेयर एसोसिएशन हरियाणा ने समर्थन दिया है।
एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री, ऊर्जा मंत्री, मुख्य सचिव और अतिरिक्त मुख्य सचिव, बिजली विभाग को पत्र लिखकर निजीकरण का फैसला वापस लेने की मांग की है। एसोसिएशन ने पत्र में कहा कि हरियाणा बिजली नियामक आयोग (एचईआरसी) द्वारा गुरुग्राम और नूंह जिलों की बिजली वितरण प्रणाली निजी कंपनियों को सौंपने का निर्णय जनहित को प्रभावित कर सकता है।
बिजली कर्मचारी यूनियनों की ओर से इस फैसले के विरोध में किए जा रहे संघर्ष और हड़ताल का एसोसिएशन समर्थन करती है। एसोसिएशन के अनुसार बिजली जैसी आवश्यक सार्वजनिक सेवा का निजीकरण किसानों, मजदूरों, गरीब और मध्यम वर्ग के उपभोक्ताओं के साथ कर्मचारियों को भी प्रभावित कर सकता है।
बिजली, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सेवाओं में सरकार की जवाबदेही बनी रहनी चाहिए। एसोसिएशन की प्रदेश अध्यक्ष विनिता बांगड़ ने कहा कि कर्मचारियों की सेवा सुरक्षा, रोजगार और उपभोक्ताओं के हितों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। कर्मचारी संगठनों की मांगों को सुनकर सरकार को जनहित में निर्णय लेना चाहिए।
उन्होंने सरकार से निजीकरण के फैसले पर पुनर्विचार कर इसे वापस लेने की अपील की। उन्होंने आशंका जताई कि निजी कंपनियों के आने से उपभोक्ताओं पर आर्थिक बोझ बढ़ सकता है।
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एसोसिएशन का कहना है कि सार्वजनिक सेवाओं को निजी हाथों में सौंपने के बजाय उन्हें मजबूत बनाने की जरूरत है। एसोसिएशन ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने फैसला वापस नहीं लिया तो स्वास्थ्य कर्मचारी भी आंदोलन में शामिल होने पर विचार करेंगे।
