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सड़क हादसे में हरियाणा पुलिस के कॉन्स्टेबल की गई थी जान, मां को मिलेगा 57 लाख रुपये मुआवजा

Published: Sat, 10 Oct 2026 04:34 PM (GMT+05:30)

चंडीगढ़ ट्रिब्यूनल ने ड्यूटी पर शहीद हुए हरियाणा पुलिस के कॉन्स्टेबल संदीप की मां को 57.03 लाख रुपये मुआवजा देने ...और पढ़ें

मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल का फैसला। (सांकेतिक फोटो)

मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल का फैसला। (सांकेतिक फोटो)

HighLights

  1. चंडीगढ़ स्थित ट्रिब्यूनल का फैसला।

  2. ड्यूटी के दौरान हादसे में हुई थी मौत।

  3. फैमिली पेंशन मुआवजे से नहीं कटेगी।

जागरण संवाददाता, चंडीगढ़। ड्यूटी के दौरान सड़क हादसे में जान गंवाने वाले हरियाणा पुलिस के काॅन्स्टेबल संदीप की मां को चंडीगढ़ स्थित मोटरएक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल ने 57.03 लाख रुपये मुआवजा दिए जाने का फैसला सुनाया है।

पांच साल पहले काॅन्स्टेबल संदीप को ड्यूटी के वक्त एक तेज रफ्तार गाड़ी ने टक्कर मार दी थी। उसकी मौत के बाद मां ने चंडीगढ़ स्थित ट्रिब्यूनल में मुआवजे के लिए याचिका दायर की थी।

अपने फैसले में ट्रिब्यूनल ने यह भी स्पष्ट किया है कि संदीप की मां को मिलने वाली फैमिली पेंशन की राशि मुआवजे से नहीं काटी जाएगी। इस रकम पर 7.5 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा। ट्रिब्यूनल ने चालक, वाहन मालिक और बीमा कंपनी को संयुक्त रूप से मुआवजा चुकाने के लिए उत्तरदायी ठहराया है।

केस के अनुसार, एक जून 2021 को शहजादपुर-पंचकूला राष्ट्रीय राजमार्ग पर मौली स्थित एमआईयू भट्ठे के पास काॅन्स्टेबल संदीप वाहन चेकिंग ड्यूटी पर तैनात था। वह सड़क किनारे खड़े एक ट्रक के दस्तावेज की जांच कर रहा था।

इसी दौरान शहजादपुर की तरफ से आई महिंद्रा बोलेरो पिकअप ने पहले खड़े ट्रक को टक्कर मारी और फिर संदीप को अपनी चपेट में ले लिया। गंभीर चोटों के कारण अस्पताल ले जाते समय उसकी मौत हो गई। हादसे में उसके साथ मौजूद हेड काॅन्स्टेबल जसविंदर सिंह भी घायल हुआ था। इस मामले में रायपुर रानी थाने में चालक के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी।

परिवार ने मांगा एक करोड़ मुआवजा

संदीप की मां रामरति ने एक करोड़ रुपये मुआवजे की मांग करते हुए याचिका दायर की थी। उन्होंने बताया कि उनका बेटा हरियाणा पुलिस में कांस्टेबल था और पंचकूला के आरटीए कार्यालय में तैनात था। याचिका में बताया गया कि उसकी मासिक आय करीब 60 हजार रुपये थी संदीप ने 3 मार्च 2019 को पुलिस सेवा ज्वाइन की थी और हादसे के समय उसकी उम्र 29 वर्ष थी।

बीमा कंपनी की दलील खारिज

बीमा कंपनी ने तर्क दिया था कि संदीप की मौत के बाद मां को हरियाणा पुलिस से करीब 20 से 25 हजार रुपये मासिक फैमिली पेंशन मिल रही है, इसलिए इसे मुआवजे से काटना चाहिए।

हालांकि ट्रिब्यूनल ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए यह दलील खारिज कर दी। ट्रिब्यूनल ने कहा कि फैमिली पेंशन कर्मचारी की सेवा से मिलने वाला स्वतंत्र अधिकार है, जिसका दुर्घटना मुआवजे से सीधा संबंध नहीं है। इसलिए इसे मुआवजे से घटाना उचित नहीं होगा।