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18 साल में सड़क के लिए जमीन का अधिग्रहण नहीं करा पाए हरियाणा के अधिकारी, हाई कोर्ट पहुंचा मामला; जानिए फिर क्या हुआ

Published: Tue, 13 Oct 2026 10:15 PM (IST)

हरियाणा में 18 साल से सड़क निर्माण में देरी और बुनियादी सुविधाओं के अभाव पर पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है।

सड़क के लिए 18 साल में जमीन का नहीं हुआ अधिग्रहण, हाई कोर्ट ने अफसरों पर लगाया 20 लाख जुर्माना।

सड़क के लिए 18 साल में जमीन का नहीं हुआ अधिग्रहण, हाई कोर्ट ने अफसरों पर लगाया 20 लाख जुर्माना।

HighLights

  1. हाई कोर्ट ने हरियाणा के अधिकारियों पर 20 लाख जुर्माना लगाया।

  2. 18 साल से सड़क निर्माण और सुविधाओं में देरी का मामला।

  3. जुर्माना राशि जिम्मेदार अधिकारियों से वसूलने का निर्देश।

राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। हरियाणा में शहरी विकास के नाम पर करोड़ों रुपये का बाहरी विकास शुल्क जमा करने के बावजूद लोगों को सड़क और बुनियादी सुविधाएं नहीं मिलने का एक मामला सामने आया है। सेक्टर रोड के निर्माण के लिए वर्ष 2008 में शुरू हुई जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया 18 साल बाद भी आगे नहीं बढ़ी।

इस पर पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) और नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग पर 10-10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। अदालत ने कहा कि यह राशि पीजीआई चंडीगढ़ के गरीब मरीज कल्याण कोष में जमा कराई जाए।

हाई कोर्ट ने कहा है कि अधिकारियों की लापरवाही का बोझ करदाताओं पर नहीं डाला जा सकता, इसलिए जुर्माने की वसूली नियमानुसार जिम्मेदार अधिकारियों से की जाए। न्यायमूर्ति विनोद एस भारद्वाज और न्यायमूर्ति रविंदर मलिक की खंडपीठ ने शरद फार्म्स एंड होल्डिंग्स प्राइवेट लिमिटेड एवं अन्य से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान ये निर्देश दिए।

अदालत ने कहा कि वर्ष 2008 से बाहरी विकास शुल्क देने के बावजूद घर खरीदार एक दशक से अधिक समय से जरूरी ढांचागत सुविधाओं की प्रतीक्षा कर रहे हैं। यह प्रशासनिक उदासीनता दर्शाता है।

अदालत के अनुसार, एचएसवीपी के शपथपत्र में ठोस कार्रवाई या समयबद्ध प्रतिबद्धता नहीं दिखाई गई। हरियाणा लोक प्रशासन संस्थान को सामाजिक प्रभाव आकलन की नोडल एजेंसी बनाने की जानकारी दी गई, लेकिन जमीन अधिग्रहण शुरू करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं बताया गया।

नगर निगम गुरुग्राम, एचएसवीपी और नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग के जवाबों से भी यह स्पष्ट नहीं हुआ कि अधिग्रहण कब शुरू और पूरा होगा तथा सेक्टर रोड और बाहरी विकास के कार्य कब पूरे किए जाएंगे। खंडपीठ ने कहा कि देरी से परियोजना की लागत बढ़ सकती है और बाहरी विकास शुल्क के जरिए इसका भार घर खरीदारों व उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है।

अदालत ने तीनों विभागों को चार सप्ताह में शपथपत्र देकर जमीन अधिग्रहण, सड़क निर्माण और बुनियादी सुविधाओं की स्पष्ट समय सीमा बताने का निर्देश दिया। याचिकाकर्ता ने कहा कि अधिकारियों से जुर्माना वसूलने की अनुमति वाले आदेशों के बावजूद अक्सर राशि वसूल नहीं होती।

अदालत ने मुख्य सचिव से पिछले पांच वर्षों में ऐसे आदेशों, वसूली गई राशि और लंबित रकम का ब्योरा मांगा है। समय सीमा में शपथपत्र दाखिल न होने पर एचएसवीपी के मुख्य प्रशासक को अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से पेश होना होगा। अगली सुनवाई 16 नवंबर 2026 को होगी।