चंडीगढ़ [अनुराग अग्रवाल]। हरियाणा के नए राज्यपाल सत्यदेव नारायण आर्य को अपनी यादों की डायरी खो जाने का बेहद मलाल है। बिहार सरकार में दो बार मंत्री रह चुके आर्य अपने जीवन से जुड़ी यादों को डायरी में लिखते थे। जीवन में जब भी कोई अच्छा काम करते, उसका ब्योरा इस डायरी में जरूर दर्ज होता। मगर डायरी कहीं खो गई है। इसके बाद आर्य ने डायरी लिखनी ही बंद कर दी।

बिहार के नालंदा जिले की राजगीर विधानसभा सीट से आठ बार विधायक रह चुके सत्यदेव नारायण आर्य हरियाणा के 17वें राज्यपाल का दायित्व ग्रहण करने जा रहे हैं। राजभवन में आयोजित कार्यक्रम में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस कृष्ण मुरारी उन्हें पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाएंगे। इस दौरान मुख्यमंत्री मनोहर लाल अपने मंत्रियों और अधिकारियों के साथ मौजूद रहेंगे। समारोह में आर्य के बेटे व भाजपा नेता ओम प्रकाश रंजन सहित अन्य परिजन व रिश्तेदार भी शामिल होंगे।

एमए पार्ट वन तक पढ़े सत्यदेव नारायण आर्य आरएसएस के पुराने कार्यकर्ता हैैं। उनके जीवन का लंबा समय आर्य समाज में बीता। 1962 से जनसंघ से जुड़ा होने के बावजूद उन्हें 10 साल बाद पहली बार चुनाव लड़ने का मौका मिला। पूरे देश में चलाए गए राम मंदिर निर्माण के आंदोलन में भी सत्यदेव नारायण आर्य की अहम भूमिका रही। लालकृष्ण आडवाणी के नेतृत्व में तब आर्य ने गिरफ्तारी दी थी।

आपातकाल में भी आर्य कई बार गिरफ्तार हुए। पहला चुनाव उन्होंने 1972 में जनसंघ की टिकट पर लड़ा और जीते। 1979-80 और 2010 में आर्य बिहार सरकार में मंत्री रह चुके हैैं। उन्होंने कर्पूरी ठाकुर और नीतीश कुमार के मंत्रिमंडल में काम किया। 1990-91 में भाजपा ने आर्य को लोकसभा चुनाव लड़वाया, मगर जीत नहीं सके।

सोलंकी और आर्य का जन्मदिन एक ही दिन

हरियाणा के मौजूदा राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी और सत्यदेव नारायण आर्य की जन्मतिथि संयोग से एक ही है। दोनों का जन्म एक जुलाई 1939 को हुआ है। आर्य फुटबाल, कुश्ती और कबड्डी के शानदार खिलाड़ी रह चुके हैैं। उन्होंने अपने चाचा के साथ मिलकर कुछ दिन व्यापार भी किया।

हिमाचल की तरह हरियाणा राजभवन में भी होंगे हवन

पड़ोसी राज्य हिमाचल प्रदेश की तर्ज पर अब हरियाणा में भी आर्य समाजी राज्यपाल होंगे। राजभवन में हवन हुआ करेगा। हिमाचल में गुरुकुल कुरुक्षेत्र के आयार्य देवव्रत राज्यपाल हैैं।

इन अहम पदों पर रह चुके सत्यदेव नारायण आर्य

  • 1962 से जनसंघ के सक्रिय सदस्य रहे
  • 1998 में बिहार भाजपा के अनुसूचित जाति प्रकोष्ठ का अध्यक्ष पद संभाला
  • भाजपा के अनुसूचित जाति मोर्चा के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष रह चुके। कुशा भाई ठाकरे के नेतृत्व में मोर्चे का कामकाज संभाला
  • 1972 से लगातार आठ बार चुनाव लड़े और जीते

जितना याद था, उतना ही लिखकर दे दिया

सत्यदेव नारायण आर्य का कहना है, मुझे राज्यपाल बनाए जाने की बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी। बिहार भाजपा के संगठन प्रभारी नागेंद्र जी ने मुझसे अचानक मेरा बायोडाटा मांगा। जितना याद था, वह लिखकर जल्दबाजी में मैैंने उन्हें दे दिया। सब कुछ मेरा डायरी में दर्ज था, जो कहीं खो गई है। गरीब, पिछड़े और हर जरूरतमंद की सेवा करना मेरा लक्ष्य है।

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Posted By: Kamlesh Bhatt