चंडीगढ़, [अनुराग अग्रवाल]। UP Assembly Election 2022: पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सियासत में माना जाता है कि जिस राजनीतिक दल के साथ जाट समुदाय के लोग हैं, समझो उसके ठाठ ही ठाठ हैं। इसी बात को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस को छोड़कर बाकी सभी राजनीतिक दलों ने जाट उम्मीदवारों को उनकी अपेक्षा से कहीं अधिक टिकट बांटे हैं। भाजपा ने सबसे अधिक 17 टिकट जाटों को दिए हैं। खास बात यह है कि जाट समुदाय के लोगों का भरोसा जीतने के लिए यहां केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने खुद कमान संभाली हुई है, वहीं हरियाणा के जाट नेताओं को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अपनी पूरी ताकत झोंकने का इशारा कर दिया है। अगले कुछ दिनों में हरियाणा भाजपा के तमाम जाट नेता पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अपनी पार्टी के लिए वोट मांगते नजर आएंगे।

पूर्व वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु को सौंपी गई पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाटों को साधने की कमान

हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश में करीब एक साल तक चले किसान संगठनों के आंदोलन की वजह से भाजपा के जो जाट नेता अभी तक पूरी तरह पश्चिमी उत्तर प्रदेश के चुनाव में सक्रिय नहीं हो पाए थे, उनकी राह खुद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आसान कर दी है। राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले अमित शाह ने पहले पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जनसंपर्क कर माहौल तैयार किया।

फिर अपने भरोसेमंद पूर्व मंत्री कैप्टन अभिमन्यु के जरिए जाटों का भरोसा जीतने की ऐसी कोशिश की, जिससे बाकी जाट नेताओं को अपनी बिरादरी के लोगों में जाने का बड़ा हौसला बना है। जाटों की आपस में पश्चिमी उत्तर प्रदेश और हरियाणा में काफी रिश्तेदारियां हैं। एक दूसरे की जमीनें यहां हैं। व्यापारिक लेनदेन होता है। इसलिए रोटी-बेटी का रिश्ता इस चुनाव में अहम भूमिका निभाने जा रहा है।

हरियाणा के एक दर्जन नेताओं को उतारने की तैयारी, दुष्यंत व रणजीत की भी मदद लेगी भाजपा

भाजपा सरकार और संगठन में पावरफुल नेता कैप्टन अभिमन्यु को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अमित शाह ने उत्तर प्रदेश के चुनाव में पार्टी का सह प्रभारी बना रखा है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में चूंकि पहले और दूसरे चरण में विधानसभा चुनाव हैं, इसलिए कैप्टन अभिमन्यु को कहा गया है कि फिलहाल वह अपनी व्यूह रचना का पूरा फोकस पश्चिमी उत्तर प्रदेश की विधानसभा सीटों पर ही रखें। इस कड़ी में सांसद प्रवेश शर्मा के दिल्ली आवास पर जाट नेताओं की अमित शाह के साथ जो बैठक हुई है, उसके वास्तविक सूत्रधार कैप्टन अभिमन्यु ही हैं और इस काम में उनका सहयोग केंद्रीय मंत्री संजीव बाल्यान ने दिया है।

हरियाणा में भाजपा व जजपा का मजबूत गठबंधन है। भाजपा के साझीदार के तौर पर उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला की ड्य़ूटी जल्द ही पश्चिमी उत्तर प्रदेश में चुनाव प्रचार के लिए लगाई जा सकती है। जाट नेता के रूप में पहचान बना चुके दुष्यंत चौटाला की युवाओं में अच्छी पकड़ है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष ओमप्रकाश धनखड़ को सरकार के साथ-साथ संगठन में काम करने का बड़ा अनुभव हासिल है।

जाटों तक अपनी बात को प्रभावशाली ढंग से पहुंचाने की कला में माहिर धनखड़ को पार्टी ने चुनाव प्रचार की जिम्मेदारी सौंपी है। इसी कड़ी में उन्होंने पार्टी के कई ऐसे प्रमुख जाट कार्यकर्ताओं की पश्चिमी उत्तर प्रदेश में ड्यूटी लगाई है, जिनकी वहां न केवल पकड़ है, बल्कि आपस में रिश्तेदारियां भी हैं।

आम कहावत है कि जाट भले ही किसी की न मानें, पर अपने रिश्तेदार की बात नहीं मोड़ते। लिहाजा भाजपा तमाम ऐसे पार्टी के जाट नेताओं व प्रमुख कार्यकर्ताओं को चिन्हित कर रही है, जिन्हें पश्चिमी उत्तर प्रदेश में झोंका जाना है। वैसे भी जाट समुदाय के लोग उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पसंद कर रहे हैं। उन्हें अमित शाह और मोदी के वादों पर भी पूरा भरोसा है। ऐसे में समाजवादी पार्टी और आरएलडी गठबंधन के उम्मीदवारों और भाजपा प्रत्याशियों में से किसको जाटों का साथ मिलता है, यह देखने वाली बात होगी।

भाजपा के पास जाट नेताओं के रूप में भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुभाष बराला, पूर्व केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह और उनके सांसद बेटे बृजेंद्र सिंह, सांसद धर्मवीर सिंह, मंत्री जेपी दलाल, कमलेश ढांडा और महीपाल सिंह ढांडा सरीखे लोग हैं। सरकार को समर्थन देने वाले बिजली मंत्री रणजीत चौटाला भी भाजपा के लिए प्रचार करने को तैयार हैं। ऐसे में पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भाजपा अपने जाट नेताओं के बूते कमल खिलाने का पूरा माहौल बनाने में लगी है।

आरएलडी और सपा से बड़ा दांव भाजपा ने खेला जाटों पर

उत्तर प्रदेश में जाट समुदाय भले ही तीन से चार फीसद के बीच है, लेकिन पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सियासत का बेताज बादशाह यही समुदाय माना गया है। ऐसे में जाट वोटर सूबे के सियासी समीकरण को बनाने और बिगाड़ने की ताकत रखते हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाटों की आबादी 17 फीसद के करीब है। लोकसभा की एक दर्जन से ज्यादा और विधानसभा सीटों की बात करें तो 120 सीटें ऐसी हैं जहां जाट वोटबैंक असर रखता है। कुछ सीटों पर जाट समाज का प्रभाव इतना ज्यादा है कि हार-जीत तय करने की ताकत रखते हैं।

पश्चिमी यूपी में 30 सीटें ऐसी हैं, जिन पर जाट वोटर्स को निर्णायक माना जाता है। 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने पश्चिमी यूपी की 17 सीटों पर जाट प्रत्याशी उतारे हैं तो आरएलडी ने नौ जाट और सपा ने अपने खाते से तीन जाट प्रत्याशी दिए हैं। बसपा ने भी 10 जाट टिकट दिए हैं। कांग्रेस ने जाट समुदाय पर बहुत बड़ा सियासी दांव नहीं खेला है।

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अमित शाह बोले-   कैप्टन अभिमन्यु हमारे लिए शुभ हैं

हरियाणा की पिछली भाजपा सरकार में कद्दावर मंत्री रह चुके कैप्टन अभिमन्यु अपनी पूरी पार्टी के लिए शुभ हैं। वाकया ग्रेटर नोएडा के शारदा विश्वविद्यालय में प्रभावी मतदाता संवाद कार्यक्रम का है, जिसमें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह लोगों से संवाद करने पहुंचे थे। उनके साथ उत्तर प्रदेश के चुनाव सह प्रभारी कैप्टन अभिमन्यु भी थे। फिलहाल पार्टी ने उन्हें पश्चिमी उत्तर प्रदेश की पूरी तरह से कमान सौंपी हुई है। संवाद के दौरान अमित शाह ने कहा कि कल किसी ने मुझसे पूछा कि हर बार कैप्टन को ही आप लोग पश्चिमी उत्तर प्रदेश का प्रभारी क्यों बनाते हैं। इसके जवाब में मैंने उन्हें बोला कि कैप्टन हमारे लिए शुभ हैं। इतना सुनकर लोगों को अपना जवाब मिल गया और कैप्टन की कप्तानी को स्टार लग गए।

Edited By: Sunil Kumar Jha