जेएनएन, चंडीगढ़। वरिष्ठ भाजपा नेता व हरियाणा के गृह एवं स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर को पत्र लिखकर कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलनरत किसानों से फिर से वार्ता शुरू करने की अपील की है। विज ने हरियाणा में बढ़़ रहे कोरोना वायरस के मामलों पर चिंता व्यक्त करते हुए लिखा कि हजारों किसान हरियाणा की सीमा पर बैठे हैं। उनसे दोबारा वार्ता शुरू कर इस मामले को निपटाया जाना चाहिए।

विज को चिंता है कि जिस तरीके से कोरोना लगातार अपनी जड़े पसार रहा है ऐसे में यदि किसी किसान आंदोलनकारियों को यह वायरस अपनी चपेट में लेगा तो तो एक बड़ा कोरोना ब्लास्ट प्रदेश की सीमा पर हो सकता है । विज ने अपने पत्र में एक बार फिर तीनों कृषि कानूनों पर किसान संगठनों से बातचीत शुरू करने के लिए केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर से आग्रह किया।

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विज ने लिखा, आज पूरे देश में कोरोना का कहर फिर नजर आने लगा है। हरियाणा में भी हालात बिगड़ने लगे हैं। हरियाणा में कोरोना को नियंत्रित करने के लिए संभव उपाय किए जा रहे हैं, लेकिन मेरी चिंता हरियाणा के बार्डर पर जो हजारों आंदोलनकारी किसानों को लेकर है, क्योंकि मुझको उनको भी कोरोना से बचाना है। यह भी चिंता है कि उनकी वजह से बाकी हरियाणा में भी कहीं कोरोना न फैल जाए।

केंद्रीय कृषि मंत्री को लिखा विज का पत्र। 

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विज ने लिखा कि आंदोलन में होने की वजह से वो कोविड के नियमों का पालन नहीं कर पा रहे हैं मैं जानता हूं कि आपने (नरेंद्र तोमर) किसानों की समस्या को हल करने के लिए बहुत प्रयास किए हैं और किसानों के साथ कई दौर की वार्ता भी की है, लेकिन किन्हीं कारणों से अभी तक समस्या का समाधान नहीं निकल पाया है। पिछले लंबे समय से वार्ता बंद होने से अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। मैं ऐसा मानता हूं कि समस्या का समाधान वार्ता से ही हो सकता है।

तोमर को लिखेे पत्र में विज ने कहा, मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि वार्ता को फिर शुरू किया जाए, ताकि बातचीत करके इस मसले को सुलझाया जा सके और यहां से यह धरना समाप्त हो सके। सरकार का हमेशा इस बारे में सकारात्मक रूख रहा है। मैं उम्मीद करता हूं कि किसान भी अब इसमें सकारात्मक रूख अपनाएंगे। यह मामला हल हो जाएगा तथा जो जमावड़ा लगा हुआ है वह यहां से समाप्त हो जाएगा। सब अपने अपने घरों को वापस चले जाएंगे। बढ़ते हुए कोरोना को देखते हुए ऐसा प्रतीत हो रहा है कि कोरोना की लड़ाई लंबी लड़नी पड़ सकती है और इसके लिए सभी वर्गों का सहयोग मिलना आवश्यक है। 

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