हरियाणा में निजी स्कूलों के शिक्षकों की नहीं लगेगी जनगणना ड्यूटी, सरकार के आदेश पर हाईकोर्ट की रोक
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार के निजी स्कूलों के शिक्षकों को जनगणना ड्यूटी में लगाने के आदेश पर ...और पढ़ें

जनगणना-2027 में ड्यूटी लगाने के सरकार के आदेश पर रोक। (एआई जनरेटेड फोटो)
HighLights
हरियाणा में निजी स्कूलों के शिक्षकों को हाईकोर्ट से मिली बड़ी राहत।
हरियाणा प्रोग्रेसिव स्कूल्स कॉन्फ्रेंस ने सरकार के आदेश को चुनौती दी।
कोर्ट ने कहा-निजी शिक्षकों को सरकारी मशीनरी का हिस्सा नहीं मान सकते।
राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। हरियाणा के निजी स्कूलों के शिक्षकों और कर्मचारियों की ॉ पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। हरियाणा प्रोग्रेसिव स्कूल्स काॅन्फ्रेंस ने याचिका दायर कर निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों के शिक्षकों व कर्मचारियों को जनगणना कार्य के लिए अनिवार्य रूप से तैनात करने संबंधी अधिकारियों के आदेशों को चुनौती दी है।
याचिका में एक और सात सितंबर 2026 को जारी पत्रों को रद करने और अधिकारियों को आगे ऐसी कार्रवाई से रोकने की मांग की गई है।हाईकोर्ट के जस्टिस एचएस बराड़ ने हरियाणा सरकार के आदेश पर रोक लगाते हुए सभी पक्षों से जवाब तलब किया है।
याचिकाकर्ता का मुख्य तर्क है कि जनगणना अधिनियम 1948 की धारा 4ए के तहत केवल स्थानीय प्राधिकरणों के अधिकारियों और कर्मचारियों को जनगणना संबंधी कार्यों के लिए उपलब्ध कराने का प्रविधान है। निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों के शिक्षक और कर्मचारी इस श्रेणी में नहीं आते।
याचिका में कहा गया है कि प्रशासनिक आदेश के माध्यम से निजी स्कूलों के कर्मचारियों को स्थानीय प्राधिकरण के कर्मचारियों के समान नहीं माना जा सकता। काॅन्फ्रेंस ने अधिकारियों की ओर से तीन मार्च 2026 को भेजे गए पत्र का भी हवाला दिया है, जिसमें निजी स्कूलों को जनगणना-2027 के लिए शिक्षकों की सूची उपलब्ध कराने को कहा गया था।
इसके जवाब में संगठन ने 17 मार्च को आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा कि निजी स्कूलों के शिक्षकों की अनिवार्य तैनाती कानून के अनुरूप नहीं है। हालांकि, 18 मार्च को संबंधित अधिकारी ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया।
27 मई काे दी थी चुनौती
इसी विवाद को लेकर काॅन्फ्रेंस ने इससे पहले भी हाईकोर्ट का रुख किया था। 27 मई 2026 को दाखिल याचिका में निजी स्कूलों के शिक्षकों को जनगणना ड्यूटी पर लगाने के आदेश को चुनौती दी गई थी। अदालत ने 29 मई को याचिका को वापस लेने की अनुमति देते हुए नई परिस्थितियों में दोबारा याचिका दायर करने की स्वतंत्रता दी थी।
याचिकाकर्ता का कहना है कि निजी स्कूलों के शिक्षकों को बड़ी संख्या में जनगणना कार्य में लगाने से स्कूलों की नियमित शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित होंगी। संगठन ने दावा किया है कि उसके सदस्य स्कूलों में करीब 16 हजार शिक्षक कार्यरत हैं और उनमें बड़ी संख्या में महिला शिक्षक हैं, जिन पर स्कूलों की शैक्षणिक व पारिवारिक जिम्मेदारियां भी हैं।
याचिका में हाईकोर्ट से एक और सात सितंबर के पत्रों को अधिकार क्षेत्र से बाहर और कानून के विपरीत घोषित कर रद करने, इनके आधार पर की जा रही कार्रवाई पर रोक लगाने तथा भविष्य में निजी स्कूलों के शिक्षकों को जनगणना ड्यूटी पर लगाने से पहले अदालत की अनुमति लेने के निर्देश देने की मांग की गई है।
