दो खिलाड़ियों की मौत के बाद हरियाणा सरकार सख्त, कंडम स्टेडियम में प्रैक्टिस बंद; 114 करोड़ से होगा कायाकल्प
हरियाणा सरकार ने खेल अवसंरचना को लेकर सख्ती दिखाई है। कंडम स्टेडियमों में अब कोई खेल गतिविधि नहीं होगी। राज्य सरकार ने स्टेडियमों और खेल परिसरों के सुधार के लिए 114 करोड़ रुपये जारी किए हैं। सभी स्टेडियमों का वैज्ञानिक मूल्यांकन किया जाएगा और उन्हें चार श्रेणियों में बांटा जाएगा। फर्जी खेल नर्सरियों पर भी रोक लगाई जाएगी।

सीएम नायब सिंह सैनी (फाइल फोटो)
जागरण संवाददाता, पंचकूला। हरियाणा सरकार अब पूरी तरह जाग चुकी है। प्रदेश में किसी भी स्टेडियम या खेल मैदान की दशा ‘कंडम’ पाई गई तो वहां किसी भी प्रकार की खेल गतिविधि या अभ्यास की अनुमति बिल्कुल नहीं दी जाएगी।
हाल ही में दो खिलाड़ियों की दर्दनाक मौतों ने खेल अवसंरचना की वास्तविक स्थिति पर बड़ा सवाल खड़ा किया था। सरकार ने इसे निर्णायक मोड़ मानते हुए अब प्रदेशव्यापी खेल पुनर्जागरण की घोषणा कर दी है।
तीन महीनों में दिखेंगे बदलते मैदान
पंचकूला स्थित ताऊ देवीलाल स्टेडियम में समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए खेल राज्यमंत्री गौरव गौतम ने बताया कि प्रदेशभर में स्टेडियमों और खेल परिसरों के उन्नयन, मरम्मत और पुनर्विकास के लिए 114 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं।
जिला खेल परिषदों को भी निर्देश दिया गया है कि उनके पास उपलब्ध राशि का बड़ा हिस्सा जिला स्तरीय मैदानों के कायाकल्प में लगाया जाए। उन्होंने कहा कि “तीन महीनों में मैदानों की तस्वीर बदलती दिखेगी।”।
चार श्रेणियों में वैज्ञानिक मूल्यांकन होगा
खेल विभाग सभी स्टेडियमों का वैज्ञानिक सर्वे कर उन्हें चार कैटेगरी में इस प्रकार करेगा वर्गीकृत ए ग्रेड: उत्कृष्ट एवं अभ्यास योग्य बी ग्रेड: सामान्य, खेलने योग्य सी ग्रेड: मरम्मत के बाद उपयोग योग्य डी ग्रेड: पूरी तरह बंद, खिलाड़ियों के लिए प्रतिबंधित
सभी स्टेडियमों की संयुक्त जांच अनिवार्य
गौतम ने अधिकारियों को आदेश दिए कि पंचायत, नगर पालिका, नगर परिषद और हुडा के अंतर्गत आने वाले सभी खेल मैदानों और स्टेडियमों की तत्काल संयुक्त जांच की जाए और विस्तृत रिपोर्ट मुख्यालय भेजी जाए। लापरवाही पर संबंधित जिला खेल अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई तय होगी।
फर्जी नर्सरियों पर लगेगी रोक
राज्यमंत्री राज्यमंत्री ने कहा कि खेल सुविधाओं के सुधार के साथ ही फर्जी खेल नर्सरियों पर अब पूरी तरह रोक लगाई जाएगी। उन्होंने बताया कि वह स्वयं प्रगति रिपोर्ट की नियमित मॉनिटरिंग करेंगे ताकि ढिलाई की कोई गुंजाइश न रहे। बैठक में निदेशक संजीव वर्मा, अतिरिक्त निदेशक अश्वनी मलिक सहित जोन और जिलों के अधिकारी उपस्थित रहे।

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