जेएनएन, चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने करीब नौ माह पहले सभी अफसरों की संपत्ति का ब्योरा सार्वजनिक करने के राज्य सूचना आयोग के आदेश को अभी तक लागू नहीं किया है। आयोग की फुल बेंच के निर्देशों के मुताबिक अफसरों की संपत्ति का ब्योरा 1 अप्रैल को सरकारी पोर्टल पर अपलोड किया जाना था। मगर ऐसा नहीं हो पाया।

राज्य में कई अफसर ऐसे हैं, जिनकी पहचान ही सिर्फ भ्रष्ट अधिकारी के रूप में है। इन भ्रष्ट अफसरों की वजह से बाकी अधिकारियों पर अंगुली उठना स्वाभाविक है। पानीपत के समालखा निवासी आरटीआइ एक्टीविस्ट पीपी कपूर ने 16 दिसंबर 2009 को चीफ सेक्रेटरी, आइएएस, आइपीएस, एचसीएस, एचपीएस व राजपत्रित अधिकारियों की संपत्ति का ब्योरा सार्वजनिक करने की मांग की थी। मामला नौ वर्षों तक लटका रहा।

प्रदेश सरकार से 29 अक्टूबर 2018 को इस मुद्दे पर सहमति मिलने के पश्चात राज्य सूचना आयोग की फुल बेंच ने आरटीआई एक्ट 2005 के सेक्शन 25 (5) की शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए हरियाणा सरकार को अधिकारियों की संपत्ति पोर्टल पर सार्वजनिक करने के निर्देश 30 अक्टूबर 2018 को दिए थे।

1 अप्रैल 2019 से सरकारी पोर्टल पर यह ब्योरा सार्वजनिक किया जाना था। इससे पहले भाजपा सरकार ने स्वयं 29 अक्टूबर 2018 को सर्कुलर जारी कर सभी अधिकारियों की संपत्ति का ब्योरा आनलाइन करने का निर्णय लिया था। आदेश पर अमल नहीं होने के बाद पीपी कपूर ने मुख्य सचिव व राज्य सूचना आयोग में अलग-अलग आरटीआइ लगाई।

इसके जवाब में हरियाणा सिविल सचिवालय सामान्य प्रशासन विभाग के अवर सचिव राकेश कुमार ने अपने 10 जुलाई के पत्र द्वारा सूचित किया कि राज्य सूचना आयोग के आदेश की अनुपालना का मामला सरकार के पास विचाराधीन है। राज्य सूचना आयोग के अवर सचिव यज्ञदत चुघ ने भी अपने 4 जुलाई के पत्र द्वारा बताया कि आयोग के आदशों की अनुपालना के बारे में अभी कोई पत्र सरकार से नहीं मिला है। कपूर का कहना है कि सरकार भ्रष्ट नौकरशाहों के दबाव के कारण अफसरों की संपत्ति सार्वजनिक नहीं कर रही है।

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Posted By: Kamlesh Bhatt

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