जेएनएन, चंडीगढ़। हरियाणा में नौवीं से 12वीं कक्षा तक के बच्चों को इसी शिक्षा सत्र से मुफ्त शिक्षा मिलेगी। इस पर करीब साढ़े तीन सौ करोड़ रुपये सालाना खर्च होंगे। मुख्यमंत्री मनोहर लाल द्वारा बजट में की गई इस घोषणा को पूरा करने तथा प्रदेश में नई शिक्षा नीति को लागू करने के लिए शिक्षा मंत्री कंवरपाल गुर्जर की अध्यक्षता में शुक्रवार को शिक्षा निदेशालय के अधिकारियों की मैराथन बैठक हुई।

हरियाणा के सरकारी स्कूलों में नौंवी तथा 10वीं कक्षा में एक लाख 82 हजार 419 छात्र तथा एक लाख 92 हजार 16 लड़कियां पढ़ती हैं। उनकी वर्दी पर प्रति बच्चा 1300 रुपये, स्कूल बैग पर 400 रुपये और स्टेशनरी पर 500 रुपये खर्च आएगा। इसके अलावा एक हजार रुपये स्कूल फीस और मिड-डे मिल पर 2115 रुपये खर्च होंगे। यानी एक बच्चे को मुफ्त पढ़ाने पर 5315 रुपये खर्च आएगा। तीन लाख 74 हजार 435 बच्चों पर सालाना करीब 200 करोड़ रुपये खर्च होंगे।

इसी तरह 11वीं और 12वीं में लडक़ों की संख्या एक लाख 16 हजार 359 और लड़कियों की संख्या एक लाख 28 हजार 462 है। उनकी वर्दी पर प्रति बच्चा 1500 रुपये, स्कूल बैग 500 रुपये और स्टेशनरी पर 600 रुपये खर्च आएगा। 1200 रुपये फीस और 2350 रुपये मिड-डे मिल पर खर्च होंगे। एक बच्चे पर 6150 रुपये खर्च आएगा। दो लाख 44 हजार 821 बच्चों पर सालाना 150.56 करोड़ रुपये खर्च होगा। हरियाणा में नई शिक्षा नीति को लागू करने के लिए गठित 10 कमेटियों ने भी अपनी सिफारिशें दे दी हैं।

हरियाणा सरकार वर्ष 2025 तक नई शिक्षा नीति को लागू करने की तैयारी में है। इस नीति के तहत ड्रापआउट बच्चों की संख्या को कम किया जाएगा। दसवीं में आने के बाद ड्रापआउट रेट अधिक हो जाता है। इसलिए इसे कम करने के लिए निशुल्क शिक्षा का प्रविधान किया गया है। शिक्षा से वंचित और कम शिक्षा वाले 10 खंडों की पहले चरण में पहचान होगी। उन्हें विशेष शिक्षा जोन के दायरे में लाया जाएगा, जहां ऐसे प्रोजेक्ट चलाए जाएंगे जो दाखिला बढ़ाने में प्रोत्साहन दें।

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