हरियाणा की डॉ. सुधा यादव बनीं कर्नाटक की राज्यपाल, कारगिल युद्ध में पति हुए थे बलिदान
हरियाणा भाजपा की वरिष्ठ नेता डॉ. सुधा यादव को कर्नाटक का राज्यपाल नियुक्त किया गया है। कारगिल युद्ध में पति ...और पढ़ें

हरियाणा की डॉ. सुधा यादव बनीं कर्नाटक की राज्यपाल।
HighLights
डॉ. सुधा यादव को कर्नाटक का राज्यपाल नियुक्त किया गया
हरियाणा भाजपा की वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद रही हैं
कारगिल शहीद की पत्नी, राजनीतिक सफर संघर्षों से भरा
राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। हरियाणा भाजपा की वरिष्ठ नेता डॉ. सुधा यादव को कर्नाटक का राज्यपाल बनाया गया है। महेंद्रगढ़ (अब गुरुग्राम) से सांसद रह चुकीं सुधा यादव भाजपा की उन नेताओं में शामिल हैं, जिन्होंने व्यक्तिगत संघर्ष से लेकर संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाने तक लंबा सफर तय किया है।
प्रधानमंत्री मोदी के भरोसेमंद सहयोगियों में गिनी जाने वाली सुधा यादव फिलहाल भाजपा की केंद्रीय चुनाव समिति की सदस्य हैं। राज्यपाल के रूप में उनकी नई भूमिका को उनके राजनीतिक सफर का एक अहम पड़ाव माना जा रहा है।
कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार है। वहीं, हरियाणा के वरिष्ठ कांग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला कर्नाटक में पार्टी के प्रभारी हैं। ऐसे में अब कर्नाटक की सत्ता के दो महत्वपूर्ण राजनीतिक संदर्भों में हरियाणा का जुड़ाव दिखाई देगा।
एक तरफ कांग्रेस संगठन की जिम्मेदारी सुरजेवाला के पास है, तो दूसरी तरफ संवैधानिक पद पर डॉ. सुधा यादव होंगी। हालांकि, राज्यपाल का पद दलगत राजनीति से ऊपर संवैधानिक मर्यादाओं और जिम्मेदारियों से जुड़ा होता है।
कारगिल युद्ध में पति को खोया, PM मोदी ने दिया था चुनाव लड़ने का मौका
डॉ. सुधा यादव का राजनीतिक सफर संघर्ष और संयोग, दोनों से जुड़ा रहा है। उनके पति सुखबीर सिंह यादव सीमा सुरक्षा बल में डिप्टी कमांडेंट थे और कारगिल युद्ध में बलिदान हो गए थे। वर्ष 1999 में जब मोदी हरियाणा भाजपा के प्रभारी थे, तब उन्होंने सुधा यादव को लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए उम्मीदवार बनाने का प्रस्ताव दिया।
राजनीति में यह उनका पहला वर्ष था। भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ते हुए उन्होंने राव इंद्रजीत सिंह को करीब 1.39 लाख वोटों से हराया और राष्ट्रीय राजनीति में अपनी पहचान बनाई।
सांसद से केंद्रीय चुनाव समिति तक का सफर
सुधा यादव ने 1999 से 2004 तक 13वीं लोकसभा में महेंद्रगढ़ का प्रतिनिधित्व किया। बाद के चुनावों में उन्हें हार का सामना करना पड़ा, लेकिन संगठन में उनकी भूमिका बनी रही। वर्ष 2015 में उन्हें भाजपा ओबीसी मोर्चा की राष्ट्रीय प्रभारी नियुक्त किया गया।
2019 से 2022 तक वह राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की सदस्य रहीं। 17 अगस्त 2022 को भाजपा संसदीय बोर्ड में शामिल होकर उन्होंने पार्टी के शीर्ष संगठनात्मक ढांचे में जगह बनाई।
वह सुषमा स्वराज के बाद इस पद पर पहुंचने वाली दूसरी महिला बनीं। अब कर्नाटक के राज्यपाल की जिम्मेदारी उनके लंबे राजनीतिक अनुभव को एक नई संवैधानिक भूमिका से जोड़ेगी।
