'यह लोगों और कर्मचारियों पर प्रहार है...', हरियाणा में बिजली निजीकरण पर भड़की कांग्रेस; राव नरेंद्र सिंह जताई चिंता
कांग्रेस ने हरियाणा सरकार की मुनाफे वाले बिजली क्षेत्रों को निजी कंपनियों को सौंपने की योजना पर सवाल उठाए हैं। ...और पढ़ें

हरियाणा में बिजली निजीकरण पर कांग्रेस का कड़ा विरोध।
HighLights
कांग्रेस ने निजी बिजली कंपनियों को क्षेत्र सौंपने पर सवाल उठाए।
यह फैसला उपभोक्ताओं, किसानों और कर्मचारियों के हितों के खिलाफ है।
सरकार से फैसले पर पुनर्विचार कर वापस लेने की मांग की।
राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। मुनाफे वाले क्षेत्रों को निजी बिजली कंपनी को सौंपने की योजना पर कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं। हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह ने कहा कि यह फैसला प्रदेश के आम उपभोक्ताओं, किसानों, छोटे व्यापारियों और बिजली कर्मचारियों के हितों पर सीधा प्रहार है। प्रदेश सरकार को जनहित और सार्वजनिक क्षेत्र के भविष्य को ध्यान में रखते हुए इस फैसले पर पुनर्विचार कर वापस लेना चाहिए।
राव नरेंद्र सिंह ने कहा कि गुरुग्राम और नूंह जैसे औद्योगिक एवं व्यावसायिक क्षेत्रों में यदि निजी कंपनियों को काम करने का अवसर दिया जाएगा और ग्रामीण, कृषि तथा कम लाभ वाले क्षेत्रों की जिम्मेदारी सरकारी निगमों पर ही रहेगी, तो इससे सरकारी बिजली व्यवस्था पर आर्थिक दबाव बढ़ेगा।
उन्होंने सवाल उठाया कि जनता के पैसे से खड़ा किया गया बिजली वितरण का बुनियादी ढांचा निजी कंपनियों के व्यावसायिक हितों के लिए इस्तेमाल करने की अनुमति आखिर किस आधार पर दी जा रही है। इससे भविष्य में बिजली की दरों, सेवा की शर्तों और उपभोक्ताओं के हितों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है।
उन्होंने कहा कि इस फैसले से स्थायी, अस्थायी, आउटसोर्सिंग कर्मचारियों और इंजीनियरों सहित हजारों कर्मियों के रोजगार तथा भविष्य को लेकर अनिश्चितता बढ़ सकती है। सरकार को कर्मचारियों के रोजगार, सेवा शर्तों और भविष्य की सुरक्षा को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
हरियाणा पावर इंप्लाइज एवं इंजीनियर्स संयुक्त मोर्चा द्वारा फैसले के विरोध में उठाई जा रही आवाज को सरकार गंभीरता से ले। संबंधित पक्षों से बातचीत करके ऐसा समाधान निकालना चाहिए, जिससे बिजली निगमों की आर्थिक मजबूती, उपभोक्ताओं के हित और कर्मचारियों का भविष्य सुरक्षित रह सके।
