हरियाणा: कांग्रेस विधायक जरनैल सिंह को व्हिप उल्लंघन का नोटिस, सदस्यता पर लटकी तलवार
हरियाणा कांग्रेस विधायक जरनैल सिंह को मानसून सत्र में पार्टी व्हिप का उल्लंघन करने और सदन में पोस्टर दिखाने के आरोप में कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

कांग्रेस विधायक जरनैल सिंह को व्हिप के उल्लंघन का नोटिस।
HighLights
विधायक जरनैल सिंह को पार्टी व्हिप उल्लंघन पर कारण बताओ नोटिस
संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत सदस्यता रद होने का खतरा
पहले से निलंबित जरनैल सिंह की राजनीतिक मुश्किलें और बढ़ीं
राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। हरियाणा कांग्रेस में रतिया के विधायक जरनैल सिंह को लेकर चल रहा विवाद अब पार्टी अनुशासन की सीमा से आगे बढ़कर विधानसभा सदस्यता के खतरे तक पहुंच गया है।
कांग्रेस विधायक दल के मुख्य सचेतक एवं रोहतक के विधायक भारत भूषण बतरा ने विधानसभा के मानसून सत्र में पार्टी के तीन लाइन के व्हिप की कथित अवहेलना और सदन में पोस्टर लेकर सत्ता पक्ष की ओर जाने के मामले में जरनैल सिंह को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। खास बात यह है कि नोटिस में संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत संभावित अयोग्यता के प्रविधानों का भी उल्लेख किया गया है।
कांग्रेस विधायक दल ने 27 अगस्त को एडजर्नमेंट मोशन (स्थगन प्रस्ताव) के समर्थन में तीन लाइन का व्हिप जारी किया था। नोटिस के अनुसार, कांग्रेस के अन्य विधायक पार्टी निर्देश के मुताबिक मोशन के समर्थन में खड़े हुए, जबकि जरनैल सिंह ने ऐसा नहीं किया।
मुख्य सचेतक ने उनसे 17 बिंदुओं पर जवाब मांगा है। इनमें व्हिप मिलने, उसकी प्रति उपलब्ध कराने के प्रयास और पार्टी निर्देश की जानकारी होने के बावजूद उसका पालन नहीं करने से जुड़े सवाल शामिल हैं।
विवाद का दूसरा पहलू विधानसभा में पोस्टर प्रदर्शन को लेकर है। नोटिस में आरोप लगाया गया है कि जरनैल सिंह पोस्टर या प्लेकार्ड लेकर ट्रेजरी बेंचों (सत्ता पक्षी) की ओर गए। फोटो और वीडियो सामग्री के आधार पर उनसे यह भी स्पष्टीकरण मांगा गया है कि क्या वे सत्ता पक्ष के सदस्यों के साथ कांग्रेस विधायक दल के खिलाफ नारेबाजी में शामिल हुए थे। मानसून सत्र के पहले दिन 1984 के दंगों से संबंधित पोस्टर दिखाने की घटना भी इसी विवाद का हिस्सा है।
पहले से निलंबित हैं विधायक, अब नया अनुशासनात्मक मोर्चा
जरनैल सिंह पहले से ही कांग्रेस के निलंबित पांच विधायकों में शामिल हैं। राज्यसभा चुनाव में कथित क्रास-वोटिंग के बाद मार्च में कांग्रेस ने उन्हें और चार अन्य विधायकों को निलंबित किया था। जरनैल सिंह ने हालांकि क्रास-वोटिंग के आरोप से इनकार करते हुए कांग्रेस प्रत्याशी को वोट देने की बात कही थी।
इसके बाद सत्ता पक्ष के नेताओं और सरकारी कार्यक्रमों में उनकी मौजूदगी भी राजनीतिक चर्चा का विषय रही। अगस्त में राज्य सरकार ने उन्हें रतिया के स्वतंत्रता दिवस समारोह में ध्वजारोहण के लिए आमंत्रित किया था। अब कांग्रेस के नए नोटिस से दोनों पक्षों के बीच राजनीतिक दूरी और बढ़ने के संकेत हैं।
जरनैल सिंह को 30 दिन में दस्तावेजी साक्ष्यों के साथ अपना जवाब देना है। जवाब नहीं मिलने या स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं पाए जाने पर कांग्रेस उपलब्ध दस्तावेज, फोटो-वीडियो और पार्टी निर्देशों के आधार पर मामला सक्षम प्राधिकारी के समक्ष रख सकती है। फिलहाल उनकी सदस्यता पर कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है, लेकिन दसवीं अनुसूची का उल्लेख इस पूरे प्रकरण को गंभीर संवैधानिक मोड़ देता है।
