चंडीगढ़, अनुराग अग्रवाल। कोरोना का इलाज कराकर लौटे हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कृषि विधेयकों का विरोध कर रहे मुट्ठी भर नेताओं खासकर कांग्रेस को निशाने पर लिया है। मनोहर लाल ने स्पष्ट कर दिया कि किसानों की फसल हर हाल में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीदी जाएगी। यदि किसानों को उनकी फसल के एमएसपी से ज्यादा दाम मिलते हैं तो वह कहीं भी फसल बेचने के लिए स्वतंत्र हैं।

कोरोना को हराकर लौटे मुख्यमंत्री के निशाने पर कांग्रेस और आंदोलनकारी

मुख्यमंत्री कार्यालय के अफसरों के साथ डिजिटल मोड में मीडिया से रूबरू हुए मनोहर लाल ने कांग्रेस व भाकियू नेताओं के तमाम सवालों का बारी-बारी से जवाब दिया, जिन्हें उठाकर वे किसानों में भ्रम की स्थिति पैदा कर रहे हैं। मनोहर लाल ने ऐलान किया कि हरियाणा की मंडियों में दूसरे राज्य की फसल खासकर मक्का और बाजरा नहीं बिकने दिया जाएगा। प्रदेश के किसानों की मक्का व बाजरे की फसल खरीद सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने किसानों के कृषि संबंधी विवादों के निपटान के लिए हर जिले में कृषि अदालतें बनाने की घोषणा की। इन अदालतों में योग्य अधिकारी तैनात किए जाएंगे।

मुख्यमंत्री ने कांट्रेक्ट फार्मिंग (अनुबंध की खेती) को किसानों के लिए फायदेमंद करार देते हुए कहा कि सरकार की कोशिश है कि उन्हें फसलों की लागत से 50 फीसदी लाभ ज्यादा मिले। 18 फसलें ऐसी हैं, जिनका न्यूनतम समर्थन मूल्य तय है। इनमें भी कई ऐसी फसलें हैं, जिन पर किसानों को 90 फीसदी तक लाभ हासिल हो रहा है। उन्होंने कहा कि कृषि विधेयकों का विरोध करने वाले कांग्रेसियों को इनके बारे में कोई जानकारी नहीं है। देश और प्रदेश के किसान चाहते हैं कि यह विधेयक जल्द से जल्द लागू हों, लेकिन कांग्रेस और कुछ किसान विरोधी नेता इनमें बाधा डाल रहे हैं, जिनके मंसूबे पूरे नहीं होंगे।

जरूरत पड़ने पर कानून में अतिरिक्त प्रावधान करेगी सरकार

मुख्यमंत्री ने कांग्रेस को चेतावनी देते हुए कहा कि सरकार किसी तरह के नाजायज दबाव में आने वाली नहीं है। यदि आढ़ती या किसान को किसी तरह की कोई दिक्कत आती है तो केंद्र सरकार के कानून में अतिरिक्त प्रावधान करने का अधिकार राज्य सरकार के पास है। कानून की सीमा में रहते हुए हम आढ़तियों व किसानों के हित में फैसले लेने को तैयार हैं, लेकिन किसी के व्यापार और किसानों की आय पर आंच नहीं आने दी जाएगी।

एमएसपी से ज्यादा दाम मिलें तो कहीं भी फसल बेच सकेंगे किसान

मनोहर लाल ने कृषि विधेयकों के विरोध को गैर वाजिब बताते हुए कहा कि जिस तरह से गेहूं व धान की खरीद चलती थी, इस बार भी वैसे ही चलेगी। इन विधेयकों से मंडीकरण व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं होगी। सरकार एमएसपी पर ही धान, मूंग, बाजरा व मक्का के एक-एक दाने की खरीद करेगी। प्राइवेट खरीददारों पर पहले यह बंधन था कि वह मार्केट एरिया से बाहर जाकर किसानों की फसल नहीं खरीद सकता। अब वह इस बंधन से मुक्त हो गए हैं। अगर कोई प्राइवेट खरीददार खेत या किसान के घर से सीधे फसल खरीदना चाहता है और वह किसान को एमएसपी से अधिक दाम दे रहा है तो सरकार को इसमें कोई एतराज नहीं है। ऐसे खरीददारों को मार्केट फीस या एचआरडीएफ शुल्क भी नहीं देना पड़ेगा। यह तो सर्वविदित है कि कोई किसान एमएसपी से नीचे अपनी फसल कैसे बेच सकता है। एमएसपी पर खरीदने के लिए सरकार बैठी है और अधिक दाम पर खरीदने के लिए प्राइवेट खरीददार हैं।

25 सितंबर से खरीद संभव, दो सौ अतिरिक्त मिलों में खरीद

हरियाणा सरकार ने सभी जिला उपायुक्तों को पत्र लिखकर धान खरीद की तैयारियां करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि अमूमन एक अक्टूबर से धान की सरकारी खरीद शुरू होती है, लेकिन हम 25 सितंबर से करना चाहते हैं। इसके लिए अनुमति हेतु केंद्र सरकार को पत्र लिखा है। प्रदेश सरकार ने इस बार नए खरीद केंद्र बनाए हैं। डेढ़ सौ से दो सौ मिलों में धान की खरीद होगी, ताकि फिजिकल डिस्टेंसिंग केे नियम का अनुपालन किया जा सके।

 

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