590 करोड़ का घोटाला; ईडी की रेड से खुला बैंक-ज्वेलर्स और बिल्डर्स का गठजोड़, चंडीगढ़ मेगा स्टोर का नाम भी जुड़ा
आईडीएफसी फर्स्ट बैंक से जुड़े 590 करोड़ रुपये के घोटाले में बैंक-ज्वेलर्स और बिल्डर्स के गठजोड़ का खुलासा हुआ है। ...और पढ़ें

आईडीएफसी फर्स्ट बैंक से जुड़े 590 करोड़ रुपये के घोटाले की जांच जारी।
HighLights
बैंक कर्मचारियों की मिलीभगत से शेल कंपनियों के जरिए घुमाया गया पैसा।
ज्वेलर्स के फर्जी बिलों से ‘सोने की खरीद’ दिखाकर रियल एस्टेट में लगाया।
ईडी ने पांच शहरों में की छापेमारी, 90 से ज्यादा खाते फ्रीज।
राजेश मलकानियां, पंचकूला। आईडीएफसी फर्स्ट बैंक से जुड़े 590 करोड़ रुपये के घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। जांच एजेंसी के अनुसार आरोपितों ने बैंक कर्मचारियों से मिलीभगत कर सरकारी धन को फिक्स्ड डिपाजिट में रखने के बजाय शेल कंपनियों के जरिए ज्वेलर्स और बिल्डर्स तक पहुंचाया।
जांच के दौरान चंडीगढ़ मेगा स्टोर नाम की एक फर्म का भी खुलासा हुआ है। एजेंसी के अनुसार इस फर्म के खाते में भी बड़ी रकम आई थी, जिसे बाद में अन्य खातों में ट्रांसफर कर दिया गया। स्टोर के पार्टनर मोहित गोयल के ठिकाने पर भी तलाशी ली गई, जहां से धन के हेरफेर से जुड़े कई दस्तावेज मिले हैं।
ईडी ने इस मामले में चंडीगढ़, मोहाली, पंचकूला, गुरुग्राम और बेंगलुरु में 19 ठिकानों पर छापेमारी की थी। जांच के अनुसार हरियाणा के सरकारी विभागों के बैंक खातों में घोटाला सामने आया। इसके बाद चंडीगढ़ नगर निगम के बैंक खातों में भी गड़बड़ी सामने आई। खातों में जमा राशि को फिक्स्ड डिपाजिट में रखने के बजाय बिना अधिकृत अनुमति के अलग-अलग कंपनियों और खातों में ट्रांसफर कर दिया गया।
ईडी ने इस मामले में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के पूर्व अधिकारियों रिभव ऋषि और अभय कुमार के ठिकानों पर भी तलाशी ली। जांच में सामने आया कि रिभव ऋषि ने जून 2025 में बैंक से इस्तीफा दे दिया था, लेकिन उससे पहले और बाद में भी उसने कथित तौर पर शेल कंपनियों के जरिए सरकारी धन को इधर-उधर करने में अहम भूमिका निभाई।
जांच एजेंसी के मुताबिक पूरे घोटाले में कई शेल कंपनियों का जाल बिछाया गया, जिनके जरिए पैसे को अलग-अलग खातों में घुमाकर असली लेन-देन को छिपाने की कोशिश की गई। ईडी की जांच में सामने आया कि सबसे पहले स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी बनाई गई और सरकारी खातों से बड़ी रकम इस कंपनी के खाते में ट्रांसफर की गई।
इस कंपनी के पार्टनर स्वाति सिंगला और अभिषेक सिंगला बताए जा रहे हैं। इसके बाद इस रकम को कई अन्य कंपनियों और खातों में भेजा गया, ताकि जांच एजेंसियों को भ्रमित किया जा सके। इनमें कैपको फिनटेक सर्विसेज, मां वैभव लक्ष्मी इंटीरियर्स और एसआरआर प्लानिंग गुरुस प्राइवेट लिमिटेड जैसी कंपनियों के नाम सामने आए हैं।
ज्वेलर्स के जरिए ‘सोने की खरीद’ का दिखावा
जांच में यह भी खुलासा हुआ कि घोटाले की रकम को वैध दिखाने के लिए ज्वेलर्स के खातों का इस्तेमाल किया गया। आरोप है कि सावन ज्वेलर्स, क्लेटा ज्वेलर्स और कैपको फिनटेक सर्विसेज के माध्यम से फर्जी बिल बनाकर सोने की खरीद दिखाने की कोशिश की गई। असल में यह लेन-देन सिर्फ कागजों में था, ताकि पैसा अलग-अलग खातों में ट्रांसफर किया जा सके।
रियल एस्टेट में लगाए गए करोड़ों रुपये
ईडी की जांच में मोहाली के होटल कारोबारी और रियल एस्टेट डेवलपर विक्रम वाधवा का नाम भी सामने आया है। एजेंसी के अनुसार घोटाले की बड़ी रकम सीधे उसके बैंक खातों में ट्रांसफर हुई, जिसे बाद में प्रिज्मा रेजिडेंसी एलएलपी, किन्सपायर रियल्टी एलएलपी और मार्टेल बिल्डवेल एलएलपी जैसी रियल एस्टेट कंपनियों में निवेश किया गया।
छापेमारी के दौरान इन कंपनियों से जुड़े रियल एस्टेट निवेश के कई अहम दस्तावेज भी जब्त किए गए हैं। हालांकि, कार्रवाई के समय विक्रम वाधवा अपने ठिकाने पर नहीं मिला और फिलहाल वह फरार बताया जा रहा है।
90 से अधिक बैंक खाते फ्रीज
ईडी की इस कार्रवाई के दौरान 90 से अधिक बैंक खातों को फ्रीज कर दिया गया है। साथ ही डिजिटल डेटा, दस्तावेज और अन्य कई आपत्तिजनक सबूत भी जब्त किए गए हैं। एजेंसी अब इन दस्तावेजों की जांच कर रही है ताकि पूरे घोटाले के नेटवर्क और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका का पता लगाया जा सके।
ईडी अधिकारियों का कहना है कि यह घोटाला पिछले लगभग एक वर्ष से चल रहा था और इसमें कई लोगों की मिलीभगत की आशंका है। मामले की जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में और भी बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
