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हरियाणा बजट सत्र: रियायती जमीन पर बने अस्पतालों पर सरकार की सख्ती, गरीबों के इलाज की रिपोर्ट न देने पर होगी कार्रवाई

Published: Mon, 23 Feb 2026 09:56 PM (IST)

हरियाणा सरकार गुरुग्राम और फरीदाबाद के तीन अस्पतालों पर कार्रवाई करेगी। इन अस्पतालों को रियायती दरों पर जमीन मिली थी, लेकिन उन्होंने गरीब मरीजों के इलाज की रिपोर्ट नहीं भेजी।

हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी। फाइल फोटो

हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी। फाइल फोटो

HighLights

  1. तीन अस्पतालों ने गरीब मरीजों के इलाज की रिपोर्ट नहीं भेजी।

  2. सरकार निगरानी समिति के माध्यम से जांच कर कार्रवाई करेगी।

  3. रियायती जमीन पर बने अस्पतालों को मुफ्त इलाज देना अनिवार्य।

राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। हरियाणा सरकार द्वारा गुरुग्राम जिले में चार तथा फरीदाबाद जिले में सात अस्पतालों को रियायती दरों पर जमीन उपलब्ध करवाई गई हैं। इनमें से तीन अस्पतालों द्वारा बीपीएल व ईडब्ल्यूएस के इलाज की रिपोर्ट नहीं भेजी गई है। प्रदेश सरकार अब मॉनिटरिंग कमेटी के माध्यम से इन अस्पतालों की जांच कर इनके खिलाफ कार्रवाई करेगी।

विधानसभा में बजट सत्र के दौरान सोमवार को नूंह के विधायक आफताब अहमद ने गुरुग्राम और फरीदाबाद के बड़े निजी अस्पतालों को रियायती दरों पर दी गई जमीन और गरीबों को मुफ्त इलाज न मिलने का मुद्दा उठाया।

आफताब अहमद ने आरोप लगाया कि एचएसवीपी द्वारा रियायती दरों पर जमीन देने के बावजूद कई अस्पताल गरीब मरीजों को निशुल्क इलाज नहीं दे रहे हैं। आफताब अहमद ने पांच साल में ईडब्ल्यूएस व बीपीएल को दिए गए इलाज का ब्योरा सरकार से मांगा।

11 अस्पतालों को रियायती दरों पर जमीन आवंटित

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की ओर से कैबिनेट मंत्री कृष्ण बेदी ने सदन को बताया कि वर्ष 2008 से अब तक 11 अस्पतालों को रियायती दरों पर जमीन आवंटित की गई है। सरकार ने कहा कि सभी 11 अस्पतालों में उपरोक्त अवधि के दौरान 8086 मरीज इन अस्पतालों में आए। जिनमें 7445 ने ओपीडी व 641 ने आइपीडी में इलाज करवाया।

सरकार ने सदन में स्वीकार किया कि 11 में से तीन अस्पतालों में रिकार्ड सही तरीके से मेंटेन नहीं हो रहा है। ऐसे अस्पतालों को नोटिस जारी कर आगामी कार्रवाई की जा रही है। मंत्री ने आश्वासन दिया कि मानिटरिंग कमेटी की बैठक जल्द बुलाई जाएगी।

इससे पहले मंत्री ने सदन को इस बात से भी अवगत करया कि 11 जून 2008 को एचएसवीपी की 101वीं बैठक में गरीब मरीजों को निशुल्क उपचार देने की पालिसी तय की गई थी। इसके तहत बीपीएल कार्डधारकों और 5000 रुपये से कम आय वाले परिवारों को लाभ देना अनिवार्य किया गया।

आयुष्मान योजना के तहत अस्पतालों का लगभग 900 करोड़ रुपये बकाया

2021-22 में ई-आक्शन प्रणाली लागू की गई, लेकिन पुराने पैरामीटर बरकरार रखे गए। बाद में आय सीमा बढ़ाई गई और आयुष्मान भारत योजना को भी जोड़ा गया। ईडब्ल्यूएस वर्ग के लिए 10 फीसदी बेड आरक्षित, सुपर स्पेशलिटी अस्पतालों में 20 फीसदी बेड रियायती दरों पर और 20 फीसदी ओपीडी सुविधा आरक्षित करने का प्रावधान रखा गया।

मंत्री के जवाब से असंतुष्ट आफताब ने आरोप लगाते हुए कहा कि आयुष्मान योजना के तहत अस्पतालों का लगभग 900 करोड़ रुपये बकाया है। जिसके चलते कई अस्पताल आयुष्मान कार्डधारकों को भर्ती नहीं कर रहे। गरीबों को जमीन रियायत का लाभ नहीं मिल रहा और अस्पतालों में इलाज आम आदमी की पहुंच से बाहर है।