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गुरुग्राम में 40 मीटर नीचे पहुंचा भूजल स्तर, हाई कोर्ट ने जताई गंभीर चिंता; तत्काल उपाय तलाशने के दिए निर्देश

Published: Fri, 02 Oct 2026 03:23 PM (IST)

गुरुग्राम में भूजल स्तर 40 मीटर नीचे पहुंचने पर पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने गंभीर चिंता व्यक्त की है।

पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट फाइल फोटो

पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट फाइल फोटो

HighLights

  1. गुरुग्राम में भूजल स्तर 40 मीटर नीचे पहुंचा, चिंताजनक स्थिति

  2. हाई कोर्ट ने भूजल संरक्षण हेतु तत्काल प्रभावी उपाय तलाशने को कहा

  3. जीएमडीए सीईओ की अध्यक्षता में 5 अक्टूबर को महत्वपूर्ण बैठक होगी

राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। गुरुग्राम में लगातार गिरते भूजल स्तर पर पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने गंभीर चिंता जताई है। हाई कोर्ट ने कहा कि वर्तमान पीढ़ी आने वाली पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संसाधनों की केवल ट्रस्टी है।

यदि इसी तरह भूजल जैसे प्राकृतिक संसाधनों का दोहन जारी रहा तो भविष्य की पीढ़ियों को गंभीर और विनाशकारी परिणामों का सामना करना पड़ सकता है। कोर्ट ने गुरुग्राम में भूजल संरक्षण के लिए सभी संबंधित विभागों को मिलकर तत्काल प्रभावी उपाय तलाशने के निर्देश दिए हैं।

हाई कोर्ट को बताया गया कि शहर के अलग-अलग इलाकों में भूजल स्तर करीब 40 मीटर नीचे पहुंच चुका है। वहीं, केंद्रीय भूजल बोर्ड के एक हलफनामे के अनुसार क्षेत्र में सालाना निकाले जा सकने वाले भूजल संसाधन की मात्रा उपलब्ध संसाधन की तुलना में करीब दोगुनी है। कोर्ट ने स्थिति को गंभीर बताते हुए सभी संबंधित विभागों को तत्काल प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।

पांच अक्टूबर को होगी अधिकारियों की बैठक

चीफ जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पीसी मीणा को निर्देश दिए कि वह पांच अक्टूबर को सुबह 11 बजे अपने कार्यालय में सभी संबंधित पक्षों की बैठक बुलाएं।

बैठक में गुरुग्राम के उपायुक्त, हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के प्रशासक, नगर निगम आयुक्त, हरियाणा जल संसाधन प्राधिकरण और हरियाणा तालाब प्राधिकरण के प्रतिनिधियों को आवश्यक रिकार्ड और विवरण के साथ उपस्थित रहने को कहा गया है।

पंजीकृत-अवैध सभी बोरवेल का मांगा ब्योरा

हाई कोर्ट ने केंद्रीय भूजल प्राधिकरण और केंद्रीय भूजल बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारियों को भी बैठक में शामिल होने को कहा है। उन्हें गुरुग्राम में संचालित सभी पंजीकृत और अपंजीकृत बोरवेल का विवरण साथ लाने के निर्देश दिए गए हैं।

इसके अलावा जिला प्रशासन से दी एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट यानी टेरी के प्रतिनिधियों को भी बैठक में शामिल करने का अनुरोध करने को कहा गया है।

जहां जीएमडीए की जलापूर्ति, वहां भूजल दोहन बंद करने पर विचार

कोर्ट ने अधिकारियों से भूजल संकट के सभी पहलुओं पर विस्तार से विचार कर ऐसे उपाय सुझाने को कहा है, जिनसे बिगड़ती स्थिति में सुधार हो सके।

बैठक में उन क्षेत्रों में भूजल निकालना बंद करने की संभावना पर भी विचार किया जाएगा, जहां जीएमडीए की ओर से पानी की आपूर्ति उपलब्ध है। बैठक में लिए गए निर्णयों और चर्चा का विवरण जीएमडीए के सीईओ पीसी मीणा के हलफनामे के माध्यम से आठ अक्टूबर को हाई कोर्ट में पेश किया जाएगा।