जेएनएन, चंडीगढ़। किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य लेकर चल रही केंद्र की मोदी सरकार अब गुरुकुल कुरुक्षेत्र के प्राकृतिक खेती के मॉडल को पूरे देश में लागू कराएगी। गुरुकुल के संरक्षक व हिमाचल के राज्यपाल आचार्य देवव्रत से जीरो बजट खेती के नतीजे जानने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मॉडल को सभी राज्यों में अपनाने की वकालत की।

गुरुकुल कुरुक्षेत्र की करीब 180 एकड़ भूमि में प्राकृतिक खेती में निरंतर नए प्रयोगों की जानकारी देने के लिए आचार्य देवव्रत ने प्रधानमंत्री से नई दिल्ली में विशेष मुलाकात की। कृषि विश्वविद्यालय हिसार और भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान मोदीपुरम की सर्वे रिपोर्ट आचार्य देवव्रत ने सांझी की।

आचार्य ने बताया कि एक साल में गुरुकुल की कृषि भूमि में न केवल जैविक कार्बन में 33 फीसद तक का इजाफा हुआ, बल्कि जिंक 32, लोहा 27, कॉपर 31 और मैग्नीज 114 फीसद तक बढ़ गया। पिछले साल जहां फार्म का औसत जैविक कार्बन 0.61 फीसद था, वहीं अब यह 0.91 फीसद तक पहुंच चुका। इसी तरह फास्फोरस लगभग दोगुना हो गया, जबकि पोटाश में भी उल्लेखनीय इजाफा हुआ।

आचार्य देवव्रत की रिपोर्ट से उत्साहित प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इस मॉडल को अपनाकर पूरे देश में किसानों की आय बढ़ाई जा सकती है। उन्होंने प्राकृतिक खेती की पद्धति को और अधिक विस्तार देने, प्रचारित करने और इससे देश भर के किसानों को जोड़ने पर बल दिया। जैविक कृषि से फसल उत्पादन की लागत कम होगी, जबकि जमीन में नाइट्रोजन और घुलनशील फास्फोरस की उपलब्धता बढ़ जाएगी।

जैविक खाद से पौधों में वृद्धिकारक हार्मोंस उत्पन्न होते हैं जिससे पौधों में कीड़े नहीं लगते। मृदाजन्य रोग भी दूर रहते हैं जिससे फसल में कीटनाशकों को छिड़कने की जरूरत कम ही पड़ती है। जैविक खाद के प्रयोग से 30 से 40 किलोग्राम नाइट्रोजन प्रति हेक्टेयर भूमि को प्राप्त होती है। फसल उत्पादन भी 10 से 20 फीसद तक बढ़ जाता है।

हरियाणा की ताजा खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

पंजाब की ताजा खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

Posted By: Kamlesh Bhatt