दूध निकाला और सड़क पर छोड़ दिया, सरकारी सख्ती का नहीं कोई असर; हरियाणा-NCR में हादसों की वजह बन रहे आवारा पशु
हरियाणा-एनसीआर के शहरों में बेसहारा पशुओं की समस्या सरकारी निर्देशों के बावजूद गंभीर होती जा रही है।

सरकारी सख्ती बेअसर, हरियाणा-एनसीआर की सड़कों पर अब भी हजारों बेसहारा पशु।
HighLights
बेसहारा पशु हरियाणा-एनसीआर शहरों में गंभीर समस्या बन गए
यातायात बाधित कर रहे, हादसों और हमलों में जान जा रही
सरकारी निर्देश व एजेंसियां समस्या रोकने में विफल साबित
राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। हरियाणा सरकार के सख्त निर्देशों के बावजूद हरियाणा-एनसीआर के शहरों में बेसहारा पशुओं की समस्या खत्म होने के बजाय गंभीर होती जा रही है। गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत और रेवाड़ी समेत कई शहरों की सड़कों पर 10 से 15 हजार से अधिक पशु घूम रहे हैं।
ये पशु न केवल यातायात के लिए बड़ा खतरा बन चुके हैं, बल्कि इनके हमलों और इनसे बचने की कोशिश में होने वाले हादसों में लोगों की जान भी जा रही है।
गत एक माह में ही फरीदाबाद में एक और रेवाड़ी में दो लोगों की गोवंशी के हमले में मौत हो चुकी है। इसके बावजूद पशुओं को पकड़ने और उन्हें सुरक्षित स्थानों पर भेजने की व्यवस्था प्रभावी नजर नहीं आ रही। कहीं एजेंसी की जिम्मेदारी तय है तो कार्रवाई धरातल के बजाय कागजों तक सीमित है और कुछ शहरों में अभी तक एजेंसी ही नियुक्त नहीं हुई है।
सरकार ने दूध निकालने के बाद पशु को सड़क पर छोड़ने वालों पर दो बार जुर्माना और तीसरी बार एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए हैं, लेकिन इनका प्रभाव भी सड़कों पर दिखाई नहीं दे रहा।
गुरुग्राम में करीब 25 छोटी-बड़ी गोशालाओं में 36 हजार गोवंशी हैं, जबकि 15 हजार से अधिक पशु सड़कों पर घूमते हैं। स्थानीय स्तर पर इनमें करीब 95 प्रतिशत को डेयरी संचालकों की गाय बताया जा रहा है। फरीदाबाद की करीब 20 गोशालाओं में 33 हजार से अधिक गोवंशी हैं और इतने ही पशु सड़कों पर नजर आते हैं, हालांकि नगर निगम के आंकड़े इससे कम हैं।
सोनीपत में 50 से अधिक गोशालाओं में करीब 60 हजार गोवंशी रखे गए हैं, फिर भी प्रमुख सड़कों और चौकों पर बेसहारा पशुओं का जमावड़ा बना रहता है। दो माह में इनके कारण हुए पांच हादसों में सात लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। वीरवार को फरीदाबाद में पशु को बचाने के दौरान ट्रक चालक के साथ मारपीट और ट्रक में आग लगाने की घटना ने समस्या की गंभीरता और बढ़ा दी।
रेवाड़ी का ‘कैटल फ्री’ दावा भी सवालों में है। चार साल पहले शहर को कैटल फ्री घोषित किया गया था, लेकिन अब भी 10 हजार से अधिक बेसहारा पशु सड़कों पर घूम रहे हैं। पांच साल में हिंसक पशुओं के हमले में छह लोगों की मौत और 23 लोगों के अपाहिज होने की बात सामने आई है।
अभियान चलाकर पशु पकड़े जाते हैं, लेकिन संख्या घटने के बजाय फिर बढ़ जाती है। पकड़े गए पशुओं को मालिकों को लौटाने और कुछ मामलों में केवल कागजों पर पकड़ दिखाने के आरोप भी व्यवस्था की गंभीर खामियों की ओर इशारा करते हैं।
