जेएनएन, चंडीगढ़। पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं को पचास फीसद आरक्षण देने की तैयारी में जुटी प्रदेश सरकार ऑड-ईवन फार्मूला अपना सकती है। प्रदेश में सभी ग्राम पंचायतों को यूनिक नंबर मिला हुआ है, जिसके आधार पर तय होगा कि पहले कौन सी जिला परिषद, पंचायत समिति व पंचायतों को महिलाओं के लिए आरक्षित किया जाए और किसे बाद में। वहीं, पंचायतों और वार्डों में उल्लेखनीय काम करने वाली 100 पंचायत प्रतिनिधियों को प्रोत्साहन स्वरूप इसी महीने के अंत तक स्कूटी दी जाएंगी।

पंचायती राज संस्थाओं में आरक्षण को लेकर मुख्यमंत्री मनोहर लाल भाजपा विधायकों और उपमुख्यमंत्री दुष्यंत सिंह चौटाला जजपा विधायकों से बातचीत कर चुके हैं। विधायकों की सहमति के बाद अब दोनों पार्टियों के पदाधिकारियों, पंचायत प्रतिनिधियों के अलावा बुद्धिजीवियों से फीडबैक लिया जा रहा है। फैसले से पहले पूरे प्रदेश में सर्वे चल रहा है।

गठबंधन सरकार फरवरी में प्रस्तावित जिला परिषदों, पंचायत समितियों व ग्राम पंचायतों के चुनावों में ही इसे लागू करने की तैयारी में है। वर्तमान में प्रदेश में महिलाओं के लिए 33 फीसद आरक्षण है, जबकि 2016 में हुए पंचायत चुनावों में करीब 43 फीसद से अधिक महिलाएं जीत गईं। ऐसे में सरकारी स्तर पर ऐसा सिस्टम ढूंढ़ा जा रहा है, जिससे महिलाओं को न तो 50 फीसद से कम आरक्षण मिले और न ज्यादा।

उपमुख्यमंत्री दुष्यंत सिंह चौटाला ने बताया कि सभी की सहमति के बाद ही निर्णय लेंगे। अगर पंचायतों में महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़ती है तो उसके नतीजे भी बेहतर होंगे। जिन गांवों में महिला सरपंच थी, वे गांव रोल मॉडल साबित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि इसी महीने के आखिर तक पंचायती राज संस्थाओं की 100 महिला जनप्रतिनिधियों को सम्मानित किया जाएगा।

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