चंडीगढ़ [अनुराग अग्रवाल]। हरियाणा सरकार का सुशासन सहयोगी (चीफ मिनिस्टर गुड गवर्नेंस एसोसिएट्स-सीएमजीजीए) बनने को युवाओं में होड़ मची हुई है। हरियाणा समेत करीब एक दर्जन राज्यों से 2600 युवाओं ने सरकार के साथ काम करने की इच्छा जाहिर की है।

शुरुआत में मुख्यमंत्री के अतिरिक्त प्रधान सचिव डॉ. राकेश गुप्ता ने सरकार के समक्ष सुशासन सहयोगी का कांसेप्ट रखा था। तब कांग्रेस और इनेलो के साथ-साथ जिला उपायुक्तों ने भी इस कांसेप्ट का भारी विरोध किया, मगर अब यही सुशासन सहयोगी जिलों में सरकार के कामकाज में पूरा हाथ बंटा रहे हैं। जिला उपायुक्तों को भी अब सुशासन सहयोगियों की दरकार है। उल्लेखनीय है कि सुशासन सहयोगियों की नियुक्ति एक साल के लिए होती है।

सोनीपत की अशोका यूनिवर्सिटी के सहयोग से प्रदेश सरकार ने सुशासन सहयोगियों के तीसरे बैच का चयन कर लिया है। सुशासन सहयोगी के लिए 2016-17 के बैच में करीब 1500 युवाओं ने आवेदन किया था, जिनमें से 22 की नियुक्तियां की गई। वर्ष 2017-18 में 1900 आवेदकों में से 23 सुशासन सहयोगी रखे गए।

वहीं वर्ष 2018-19 के लिए सबसे अधिक 2600 युवाओं ने आवेदन किया, जबकि 12 युवतियों समेत 25 का चयन कर लिया गया है। हरियाणा के अलावा हिमाचल, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, तमिलनाडु, राजस्थान, छत्तीसगढ़, सिक्किम, पश्चिमी बंगाल और महाराष्ट्र से चुने गए ये सुशासन सहयोगी 15 जुलाई से ज्वाइन करेंगे और 1 अगस्त से फील्ड में काम शुरू कर देंगे। इनमें अधिकतर युवा विज्ञान, डाक्ट्रेट, इंजीनियरिंग, कानून, सामाजिक अध्ययन, अर्थशास्त्र और मनोविज्ञान की पढ़ाई कर रहे हैं। 

पहले दो सालों में चार सुशासन सहयोगी कॉमन थे, लेकिन इस बार सभी नए युवाओं को जोड़ा गया है। अभी चूंकि नए सुशासन सहयोगियों के मोर्चा संभालने में वक्त है, लिहाजा वर्ष 2017-18 के 17 सुशासन सहयोगियों को सरल अंत्योदय और सक्षम हरियाणा प्रोजेक्ट पर एक माह के लिए काम करने को कहा गया है।

सुशासन सहयोगियों की रिपोर्ट पर सरकार को भरोसा

सुशासन सहयोगियों के जरिये सरकार धरातल पर फीडबैक हासिल करती है और सरकारी परियोजनाओं को अमल में लाती है। जिलों में होने वाले भ्रष्टाचार और सिस्टम की खामियों को दूर करने में भी सुशासन सहयोगी अहम भूमिका निभाते हैैं। उनकी रिपोर्ट के आधार पर सरकार फैसले लेती है। हालांकि आरंभ में जिला उपायुक्तों को लगा था कि सरकार ने उनके समानांतर व्यवस्था खड़ी कर दी है, मगर अब वह खुद उन्हें अपने लिए मददगार मानने लगे हैैं।

सुशासन सहयोगियों को यह मिल रही सुविधाएं

प्रत्येक सुशासन सहयोगी को सरकार 50 हजार रुपये मासिक वेतन देती है। इसके अलावा फील्ड में घूमने के लिए गाड़ी दी जाती है। जिले के रेस्ट हाउस में किराया मुक्त एक कमरा और फील्ड में ठहरने के लिए किराया युक्त एक होटल की व्यवस्था सुशासन सहयोगियों के लिए रहती है।

सीएमजीजीए नहीं एनर्जी बूस्ट कहिये

मुख्यमंत्री मनोहर लाल का कहना है सुशासन देना सरकार की प्राथमिकता है। सीएमजीजीए प्रोग्राम एक यूनिक माडल है। देश के अन्य प्रदेश हमारे इस मॉडल का अध्ययन कर रहे हैैं। सुशासन सहयोगियों के माध्यम से हमने सिस्टम की एनर्जी बढ़ाने का काम किया है ताकि जनता को ज्यादा से ज्यादा सुविधाएं मिल सकें।

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Posted By: Kamlesh Bhatt

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