राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। Compensation on Death: हरियाणा में बिजली की तारों की चपेट में आने से अपने सदस्यों को खोने वालों के परिवारों को मुआवजे के लिए अब लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। मुआवजे की मांग को लेकर दायर कई याचिकाओं का निपटारा करते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिए हैं कि भविष्य में ऐसे मामलों में दावे के आवेदन प्राप्त होने पर चार महीने के भीतर फैसला किया जाए।

हाई कोर्ट ने मुआवजे के लिए प्राप्त दावों को निपटाने के लिए समय सीमा तय की

हाई कोर्ट ने मुआवजे के दावों के लंबित रहने पर चिंता जताते हुए यह आदेश जारी किया। हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि नीति के अनुसार सक्षम प्राधिकारी के समक्ष दावे पेश किए जाएंगे व सक्षम प्राधिकारी द्वारा इस पर शीघ्रता से निर्णय लिया जाएगा। दावे के निपटान के लिए अधिकतम समय दावा दायर करने के चार माह के भीतर का होगा।

मुआवजे के लिए पीड़ित परिवारों को करना पड़ता है कई साल तक इंतजार

हरियाणा के यमुनानगर जिले की मीना रानी की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट के जस्टिस विनोद एस भारद्वाज ने यह आदेश दिए हैं। मीना ने 13 अगस्त 2021 को बिजली के करंट के कारण अपने बेटे सचिन की मौत पर मुआवजे की मांग करते हुए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। हाई कोर्ट को बताया गया कि सचिव नौवीं कक्षा का छात्र था और वह अपने घर की छत पर मौजूद खेल रहा था। जब वह घर के पास खुले तार के संपर्क में आया तो करंट के कारण सचिन ने दम तोड़ दिया।

हरियाणा सरकार ने कहा- नीति के अनुरूप दावा पेश करने पर होगा विचार 

इस संबंध में पुलिस थाना रादौर में मामला दर्ज कराया गया था। मीना के वकील ने बताया कि उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम लिमिटेड द्वारा घातक/गैर-घातक दुर्घटनाओं के लिए पीड़ितों को मुआवजे से संबंधित आठ जुलाई 2019 को अधिसूचित नीति उस समय लागू थी।

हरियाणा सरकार की तरफ से कहा गया कि याचिकाकर्ता नीति के अनुसार सक्षम प्राधिकारी के समक्ष अपना दावा प्रस्तुत करते हैं, तो उस पर विचार किया जाएगा। दोनों पक्षों की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता को लागू नीति के अनुसार मुआवजे की मांग को लेकर अधिकारियों से संपर्क करने का आदेश दिया।

कोर्ट ने यह भी देखा कि ऐसे मामले काफी संख्या में लंबित हो सकते हैं, जिनमें मुआवजा देने में काफी समय लगता है और लोग मजबूर होकर कोर्ट की शरण लेते हैं। कोर्ट ने ऐसे मामलों में मृतक के परिवारों को मुआवजा देने में हो रही देरी को गंभीरता से लेते हुए भविष्य में राज्य को ऐसे मामलों पर चार महीने के भीतर फैसला लेने का निर्देश जारी किया है।

Edited By: Sunil Kumar Jha

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