जागरण संवाददाता, पंचकूला। हरियाणा स्टेट क्राइम ब्रांच ने राज्य फार्मेसी काउंसिल के पूर्व चेयरमैन एवं मौजूदा सदस्य केसी गोयल को गिरफ्तार कर लिया है। केसी गोयल को नरवाना स्थित उसके निवास से गिरफ्तार किया गया है।

पंचकूला के सेक्टर 14 पुलिस थाने में मई 2022 को काउंसिल के सुपरिटेंडेंट ने अनियमितताओं संबंधी शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके बाद जांच पड़ताल के विभिन्न चरण पूरा करते हुए पुलिस ने केसी गोयल की गिरफ्तारी की है।

अवैध रूप से डिग्रियां लेने और फार्मेसी में रजिस्ट्रेशन के नाम पर गोलमाल के मामले में अब तक 11 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। केसी गोयल की 12वीं गिरफ्तारी हुई है।

बताया जाता है कि केसी गोयल ने अपने विशेषाधिकार का इस्तेमाल करते हुए न केवल अपात्र लोगों के फार्मेसी के डिप्लोमा रजिस्टर्ड कराए, बल्कि अपने बेटे व पुत्रवधू को भी सीमाओं व अधिकार से बाहर जाकर फेवर किया। उसकी पुत्रवधू ने पंजाब से डी-फार्मा की। उसके कागज कंपलीट नहीं थे, लेकिन फिर भी एक फाइल पर नोटिंग के आधार पर पुत्रवधू का डिप्लोमा रजिस्टर्ड कर दिया गया था।

शिकायत में बताया गया था कि फार्मेसी काउंसिल पंचकूला से फार्मेसी का लाइसेंस लेने के लिए प्रदेश के अलग-अलग जिलों से 200 से ज्यादा ऐसे आवेदकों ने आवेदन दिया था, जिन्होंने 12वीं छत्तीसगढ़ बोर्ड आफ स्कूल एंड टेक्निकल एजुकेशन से पास की थी।

आवेदकों में 25 साल से 55 साल के लोग भी थे, जबकि उक्त छत्तीसगढ़ बोर्ड 2012 में शुरू हुआ था। लोगों की ओर से आवेदन के दौरान डाक्यूमेंट्स में दी गई जानकारी पर काउंसिल को जब शक हुआ तो सभी के आवेदकों की ओर से जमा कराई गई मार्कशीट और सर्टिफिकेट के बारे में छत्तीसगढ़ बोर्ड से ब्योरा मांगा, लेकिन बोर्ड ने काउंसिल को कोई जानकारी नहीं दी।

इसके बाद काउंसिल ने छत्तीसगढ़ के चीफ सेक्रेटरी, सेक्रेटरी बोर्ड आफ एजुकेशन और छत्तीसगढ़ सेकेंडरी बोर्ड आफ एजुकेशन को लेटर लिखकर छत्तीसगढ़ बोर्ड आफ स्कूल एंड टेक्निकल एजुकेशन के लाइसेंस की जानकारी मांगी।

पता चला कि छत्तीसगढ़ सेकेंडरी बोर्ड आफ एजुकेशन ने छत्तीसगढ़ बोर्ड आफ स्कूल एंड टेक्निकल एजुकेशन को आज तक किसी भी तरह का लाइसेंस जारी ही नहीं किया। मार्च 2019 में धनेश अदलखा हरियाणा फार्मेसी काउंसिल के प्रधान बने थे।

उस दौरान छत्तीसगढ़ के 12वीं से पास आउट कई स्टूडेंट्स ने फार्मेसी लाइसेंस के लिए आवेदन दिया था। जब उन्होंने मामले की जांच अपने स्तर पर की तो पता चला कि 26 अक्टूबर 2012 को छत्तीसगढ़ बोर्ड आफ स्कूल एंड टेक्निकल एजुकेशन रजिस्टर्ड हुआ और लाइसेंस के लिए छत्तीसगढ़ बोर्ड आफ सेकंडरी एजुकेशन में आवेदन कर रखा था।

छत्तीसगढ़ बोर्ड आफ एजुकेशन की ओर से सात प्वाइंट पर जवाब मांगा गया था जो कि टेक्निकल बोर्ड वाले नहीं दे पाए थे और उन्हें लाइसेंस नहीं मिला। हैरानी की बात यह है कि ट्रस्ट रजिस्टर्ड होने के 50 दिन बाद से यानि दिसंबर 2012 से ही 12वीं की फर्जी मार्कशीट और सर्टिफिकेट स्टूडेंट को दे रहा है। ऐसे में मामले की शिकायत छत्तीसगढ़ सरकार से लेकर शिक्षा विभाग, हरियाणा को भी दी गई।

छत्तीसगढ़ बोर्ड आफ स्कूल एंड टेक्निकल एजुकेशन से 12वीं के फर्जी सर्टिफिकेट के आधार पर फार्मेसी की स्टडी कर हरियाणा स्टेट फार्मेसी काउंसिल से 150 के करीब लाइसेंस प्राप्त करने वाले प्रदेश के अलग-अलग जिलों के उम्मीदवारों का लाइसेंस कैंसिल करने का काउंसिल ने आदेश जारी कर दिया था।

इसके अलावा 450 से ज्यादा ऐसे भी स्टूडेंट्स ने जिन्होंने लाइसेंस के लिए आवेदन दिया है, उनकी एप्लीकेशन मंजूर नहीं होगी। स्टेट क्राइम ब्रांच की ओर से छत्तीसगढ़ बोर्ड के चेयरमैन व सचिव समेत पांच पदाधिकारियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

Edited By: Kamlesh Bhatt