'विदेश का ड्राइविंग लाइसेंस भारत में अपने आप मान्य नहीं', ऑस्ट्रेलिया के DL पर पंजाब-हरियाणा HC का बड़ा फैसला
पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया है कि विदेशी ड्राइविंग लाइसेंस भारत में वाहन चलाने के लिए स्वतः मान्य नहीं हैं।

ऑस्ट्रेलिया के DL पर पंजाब-हरियाणा HC का बड़ा फैसला (फाइल फोटो)
HighLights
विदेशी ड्राइविंग लाइसेंस भारत में स्वतः मान्य नहीं
अंतरराष्ट्रीय ड्राइविंग परमिट या भारतीय अनुमति अनिवार्य
बीमा कंपनी पहले मुआवजा देगी, फिर चालक से वसूली
राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। आस्ट्रेलिया के विक्टोरिया प्रांत से जारी ड्राइविंग लाइसेंस के भरोसे भारत में कार चलाना एक चालक को राहत नहीं दिला सका।
पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि विदेश में वैध ड्राइविंग लाइसेंस अपने आप भारत में वाहन चलाने के लिए मान्य नहीं हो जाता। भारत में वाहन चलाने के लिए मोटर वाहन अधिनियम के तहत आवश्यक वैधता, अनुमति या मान्य अंतरराष्ट्रीय ड्राइविंग परमिट जरूरी है।
अदालत ने चालक समीर की अपील खारिज करते हुए बीमा कंपनी को पहले मुआवजा देने और बाद में चालक व वाहन मालिक से उसकी वसूली करने का अधिकार बरकरार रखा।
नौ माह की बच्ची की मौत से जुड़ा था मामला मामला 31 अगस्त 2015 के सड़क हादसे का है, जिसमें नौ माह की जीविका की मौत हो गई थी। मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण, कुरुक्षेत्र ने 27 मई 2016 को 2.49 लाख रुपये मुआवजा नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ देने का आदेश दिया था।
बीमा कंपनी को निर्देश दिया गया था कि वह पहले पीड़ितों को राशि का भुगतान करे और इसके बाद चालक व वाहन मालिक से वसूली करे। चालक समीर गाबा ने इसी आदेश को चुनौती दी थी।
आपराधिक मुकदमे में बरी होने का भी नहीं मिला लाभ
चालक ने हाई कोर्ट में कहा कि हादसे के समय कार वह नहीं चला रहा था। उसने आपराधिक मामले में बरी किए जाने का हवाला भी दिया।
अदालत के सामने यह तथ्य आया कि हादसे के प्रत्यक्षदर्शी पंकज कुमार ने दावा न्यायाधिकरण के समक्ष चालक की पहचान की थी, लेकिन बाद में आपराधिक मुकदमे में उसने कहा कि वह कार चलाने वाले व्यक्ति को देख नहीं पाया था।हाई कोर्ट ने माना कि दोनों बयानों में अंतर है, लेकिन केवल इस आधार पर न्यायाधिकरण का निष्कर्ष गलत नहीं माना जा सकता।
अदालत ने स्पष्ट किया कि आपराधिक मामले में दोष सिद्ध करने के लिए संदेह से परे प्रमाण चाहिए, जबकि मोटर दुर्घटना दावा मामले में संभावनाओं की प्रधानता के आधार पर फैसला होता है। इसलिए आपराधिक मामले में बरी होना अपने आप नागरिक दायित्व से मुक्ति नहीं देता।
विदेशी लाइसेंस को लेकर अदालत की दो टूक
अदालत ने कहा कि चालक ने केवल ऑस्ट्रेलिया का घरेलू ड्राइविंग लाइसेंस पेश किया था। उसके पास भारत में जारी लाइसेंस नहीं था और न ही उसने भारत में वाहन चलाने के लिए मान्य अंतरराष्ट्रीय ड्राइविंग परमिट या सक्षम भारतीय प्राधिकरण की अनुमति पेश की।
चालक ने यह भी दावा किया था कि उसका पुराना भारतीय लाइसेंस ऑस्ट्रेलियाई प्राधिकरण के पास जमा है, लेकिन वह उसकी संख्या, जारी होने की तारीख, वैधता अवधि या जारी करने वाले प्राधिकरण का नाम तक नहीं बता सका।
अदालत ने कहा कि विदेशी प्राधिकरण का लाइसेंस केवल इसलिए भारत में वैध नहीं हो सकता क्योंकि वह विदेश में समान श्रेणी का वाहन चलाने की अनुमति देता है।
पहले पीड़ितों को भुगतान, फिर होगी वसूली
हाई कोर्ट ने बीमा कंपनी के वसूली अधिकार को सही ठहराते हुए कहा कि तीसरे पक्ष के पीड़ितों के हितों की रक्षा के लिए बीमा कंपनी मुआवजे का भुगतान पहले करेगी।
इसके बाद वह जिम्मेदार चालक और मालिक से राशि वसूल सकती है। अदालत ने साफ किया कि चालक का आपराधिक मामले में बरी होना या ऑस्ट्रेलियाई घरेलू लाइसेंस पेश करना, बीमा कंपनी के इस अधिकार को खत्म नहीं करता।
