पंचकूला [राजेश मलकानियां]। एक दौर ऐसा है कि बच्चे माता-पिता को वृद्धाश्रम पहुंचा रहे हैं, लेकिन हरियाणा के पलवल में पांच भाइयाें ने मिसाल पेश किया है। श्रवण कुमार की तरह मां-बाप को कंधों पर लेकर कांवड़ यात्रा करने वाले इन भाइयों ने भगवान शिव की भक्ति के पवित्र माह सावन को और पावन बना दिया। इस भाइयों ने महादेव के पुत्र गणेश जी की तरह माता-पिता की गरिमा और सबसे उच्‍च दर्जे का संदेश दिया। इस युग के इन श्रवण कुमारों ने माता-पिता का सम्‍मान न करने वालों और उनकी उपेक्षा करने वालों के लिए मिसाल बन गए हैं।

 

हरियाणा के पांच भाई माता-पिता को कांवड़ पर उठाकर हरिद्वार के नीलकंठ से मनसा देवी मंदिर पहुंचे

 

पलवल के ये पांच भाई हरिद्वार से कांवड़ पर गंगाजल के साथ-साथ चलने-फिरने में असमर्थ अपने माता-पिता को पालकी में लेकर पैदल पंचकूला के मनसा देवी मंदिर तक पहुंचे। वहां उन्‍होंने मनसा देवी मंदिर में स्थित शिवालय में माता-पिता के संग भगवान भोले शंकर का जलाभिषेक किया। ऐसा वे दो साल से कर रहे हैं। पिछले साल भी वे इसी तरह माता-पिता को लेकर हरिद्वार से कांवड़ लेकर आए थे।

 

 

कांवड़ पर माता-पिता को लाते पलवल के भाई।

 

बता दें कि भगवान शं‍कर में आस्था रखने वालों के लिए सावन का महीना सबसे पवित्र होता है। इस महीने शिव भक्त गंगा से जल भर कर पैदल चलते हुए देश भर के शिवालयों में जल चढ़ाते हैं। ऐसे ही शिव भक्तों में हरियाणा के पलवल के रहने वाले पांच भाई और उनके माता-पिता भी शामिल हैं। माता-पिता 78 साल के पिता चंद्रपाल व 66 वर्ष की मां रूपवती भी कांवड़ लेकर हरिद्वार से गंगाजल लाना चाहते थे, लेकिन चारों भाई माता-पिता और अन्‍य परिजनों के साथ कांवड़ यात्रा के लिए हरिद्वार पहुंचे। भगवान शिव को जलाभिषेक करने के लिए गंगा से कांवड़ में जल लेकर पैदल ही शिव मंदिर तक पहुंचना होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दौरान किसी वाहन का उपयोग करना वर्जित किया गया है।

 

 

कांवड़ पर माता-पिता को लेकर जाते आज के 'श्रवण कुमार'।

हरिद्वार के पास नीलकंठ मे भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने के बाद इन भाइयों ने गंगाजल भरा और कांवड़ यात्रा पर परिजनों के साथ रवाना हुए। उनके माता-पिता पैदल चलने में असमर्थ थे तो तब भाइयों ने तय किया कि वे  उन्‍हें ढोकर ले जाएंगे। इसके लिए उन्होंने तराजूनुमा पालकी तैयार की। इसमें उन्‍होंने एक ओर माता और दूसरी ओर पिता को बैठाया। फिर कंधे में ढोते हुए नीलकंठ से हरियाणा के पंचकूला के माता मनसा देवी मंदिर परिसर में स्थित शिवालय मंदिर पहुंचे और भगवान शिव का जलाभिषेक किया।

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दो साल से कर रहे हैं माता-पिता को कंधे पर उठाकर पैदल कांवड़ यात्रा

हरियाणा के पलवल जिले के गांव फुलवारी निवासी चंद्रपाल सिंह व उनकी पत्नी रूपवती अपने पांच पुत्र बंसीलाल, रोहताश, राजू, महेंद्र व जगपाल के साथ गांव में रहते हैं। चंद्रपाल सिंह के बेटे मजदूरी करके परिवार का खर्चा चलाते हैं। चंद्रपाल सिंह भी मजदूरी करते थे।

 

 

कांवड़ पर पिता चंद्रपाल और माता रूपमति।

 

चंद्रपाल ने बताया कि उनकी बड़ी इच्छा थी कि वह हरिद्वार से कांवड़ लेकर आएं लेकिन ऐसा नहीं हो सका। उम्र बढ़ती गई और पैरों ने भी साथ छोड़ दिया। एक साल पहले यह बात जब उन्होंने अपने बेटों को बताई तो बेटों ने प्रण किया कि इस बार इनकी इच्छा को जरूर पूरा करेंगे। चंद्रपाल के बड़े बेटे बंसीलाल ने बताया कि हम पांच भाइयों के अलावा गांव के पांच अन्य युवकों ने भी उनकी मदद की। बंसीलाल ने बताया कि उन्होंने 12 जुलाई को हरिद्वार में माता-पिता को गंगा स्नान कराकर कांवड़ उठाई थी।

 

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रोहताश के अनुसार, वह हर दिन आठ से दस किलोमीटर का ही सफर करते थे, ताकि माता-पिता को परेशानी न हो। हम बेहद खुश हैंं कि अपने मां-बाप को कांवड़ यात्रा करवाकर उनकी इच्छा पूरी की है। पिता चंद्रपाल भी अपने बेटों के सेवाभाव से गदगद हैं। उनका कहना है कि जब देश का हर बेटा उनके बेटों के समान अपने मां-बाप की देखभाल करेगा तो हमारा समाज और बेहतर होगा। चारों भाई अपने मां-बाप को कांवड़ पर बिठाकर जहां से भी निकले, लोगों उनको श्रवण कुमार कहते थे। हरिद्वार से चारों भाई अपने मां-बाप को तीर्थयात्रा करवाकर वापस लौट रहे हैं।

 

 

माता-पिता को कांवड़ पर लेकर पंचकूला पहुंचे भाई।

 माता-पिता की सेवा करने का देना चाहते थे संदेश, लोगाें ने जगह-जगह किया स्‍वागत

भाइयाें ने कहा कि वे लोगों को संदेश देना चाहते थे कि माता-पिता की सेवा करो, उनका ध्‍यान रखो। यात्रा के दौरान लोगों ने जगह-जगह उनका स्वागत किया गया। उनके साथ 32 लोगों का ग्रुप था, जिसमें महिलाएं और बच्चे भी थे। रा‍ेहताश, बंसीलाल, राजू, महेंद्र व जगपाल बीते 24 साल से कांवड़ यात्रा करते रहे हैं। उनका कहना है कि बुजुर्गों के प्रति समाज को सकारात्मक संदेश देने के लिए उन्होंने यह कदम उठाया है।

यूं पूरा हुआ सफर

बेटे रोहताश ने बताया कि मां-बाप ने हमारे लिए सबकुछ किया है। ऐसे में उनकी हर इच्छा पूरी करना हमारा फर्ज बनता था। इसीलिए बंसीलाल, राजू, जगपाल और महेंद्र के साथ मिलकर उनको तीर्थयात्रा कराने का फैसला लिया था। परिवार ट्रैक्टर ट्राली से हरिद्वार आया था। हरकी पैड़ी पर गंगा स्नान और प्रमुख मंदिरों के दर्शन करने के बाद गंगाजल लेकर रवाना हुए। चारों भाई अपने कंधों पर मां बाप को लेकर गंतव्य की तरफ बढ़े। जब उनमें कोई भी भाई थक जाता था, तो पांचवां भाई उसकी जगह ले लेता। गत वर्ष भी इसी तरह पांचों बेटों ने  माता-पिता को कांवड़ यात्रा करवाई थी।

कांवड़ पर माता-पिता को लेकर जाते भाई।

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बेटों के सेवा भाव से गद्गद हैं चंद्रपाल अौर रूपमति, कहा- सभी को मिलें ऐसे बेटे

 

उनके माता-पिता चंद्रपाल और रूपमति ने बताया कि हमें श्रवण कुमार के माता-पिता की तरह कोई समस्या नहीं है। बता दें कि श्रवण कुमार अपने अंधे माता-पिता को चारों धाम की यात्रा करने के लिए इसी तरह कंधे पर लेकर घर से निकले थे।

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Posted By: Sunil Kumar Jha

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