जेएनएन, चंडीगढ़। हरियाणा में नगर निगम अब अपना खर्च खुद उठाएंगे। आपात स्थिति को छोड़कर प्रदेश सरकार नगर निगमों को कोई वित्तीय मदद नहीं देगी। इसके अलावा मेयरों को पॉवरफुल करते हुए उन्हें दस करोड़ रुपये तक के विकास कार्य कराने का अधिकार दिया गया है। अभी तक मेयर सिर्फ ढाई करोड़ रुपये तक के काम कराने में सक्षम थे। हालांकि नगर निगमों में लगे आयुक्तों व अन्य अधिकारियों की वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (ACR) लिखने की मेयरों की मांग पूरी नहीं हो पाई है।

मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने मेयरों और नगर निगमों के आयुक्तों के साथ मैराथन बैठक में मेयर को अधिक वित्तीय अधिकार देने की बात मान ली। प्रदेश में इस बार मेयर सीधे चुनाव से बने हैं। कई नगर निगम ऐसे हैं, जहां मेयर के अधिकार क्षेत्र में दो से तीन विधानसभा क्षेत्र आते हैं।

सरकार द्वारा अभी तक इन मेयरों को ज्यादा अधिकार नहीं दिए गए थे। इसके चलते मुख्यमंत्री ने प्रदेश के सभी महापौर तथा निगमायुक्तों व अन्य अधिकारियों को चंडीगढ़ में बुलाया था। कई घंटे तक चली मैराथन बैठक में सभी मेयरों ने अपनी-अपनी मांग रखी। मेयरों से मिले फीडबैक के बाद मुख्यमंत्री ने ऐलान किया कि भविष्य में सभी मेयर अपने अधिकार क्षेत्र में दस करोड़ रुपये के विकास कार्य करा सकेंगे। इससे अधिक राशि के विकास कार्य कराने के लिए सरकार से मंजूरी लेनी होगी।

बैठक में वित्तीय साधनों को बढ़ाने पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार किसी भी निगम को वित्तीय मदद नहीं देगी। निगम बिजली बिल सेस, प्रॉपर्टी टैक्स, विज्ञापन तथा अन्य माध्यमों से अपनी आमदन बढ़ाएं। इसी आमदनी के आधार पर नगर निगमों द्वारा अपने क्षेत्र की विकास परियोजनाएं बनाई जाएंगी। मुख्यमंत्री ने सभी मेयर व अधिकारियों को कहा कि निगम स्वायत्ता प्रदान संस्थान के रूप में काम करते हुए सरकारी राजस्व में भी अपना योगदान दें। इसके लिए मेयर तथा आयुक्त मिलकर आमदन के साधन बढ़ाने पर मंथन करके उन्हें बैठकों में मंजूरी दिलाएंगे।

घाटे में चल रहे फरीदाबाद व करनाल निगम

बैठक से पहले प्रदेश सरकार ने सर्वे कराया था। इसमें नगर निगमों की आमदन, कार्यशैली, वित्तीय स्थिति, आमदन के साधन आदि के बारे में विस्तृत रिपोर्ट तैयार की गई थी। रिपोर्ट के मुताबिक गुरुग्राम, अंबाला व हिसार निगम की वित्तीय स्थिति तथा कार्यशैली संतोषजनक है। यमुनानगर, रोहतक, सोनीपत, पानीपत व पंचकूला इस मामले में औसत मिले, जबकि फरीदाबाद व करनाल नगर निगम घाटे में हैं। सरकार ने दोनों निगमों को भरोसा दिया है कि आपात स्थिति में कुछ समय के लिए वित्तीय मदद जरूर कर दी जाएगी, लेकिन भविष्य में इन निगमों को अपनी आमदनी बढ़ाने के साधन ढूंढने होंगे।

विज ने बनाई बैठक से दूरी

सीआइडी को लेकर खफा चल रहे कैबिनेट मंत्री मेयरों और नगर निगम अधिकारियों की बैठक में शामिल नहीं हुए। शहरी स्थानीय निकाय मंत्री होने के नाते सभी पर उनकी निगाह थी। विज ने चंडीगढ़ में बैठक में शामिल होने के बजाय अंबाला में ही जनता दरबार लगाकर लोगों की समस्याएं सुनी।

ऑनलाइन मिलेंगे पानी एवं सीवर कनेक्शन, सीएलयू भी ऑनलाइन

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने दो ऑनलाइन सेवाओं पानी एवं सीवर कनेक्शन तथा बिलिंग प्रणाली और भूमि उपयोग परिवर्तन प्रणाली (सीएलयू) का भी शुभारंभ किया। इन ऑनलाइन सुविधाओं के माध्यम से सीएलयू की मंजूरी और पानी एवं सीवरेज कनेक्शन के अनुमोदन के साथ-साथ बिल बनाने और रसीद कलेक्शन की प्रक्रिया सुव्यवस्थित होगी।

निगम आयुक्तों को भी मिले कई अधिकार

नगर निगम आयुक्तों को अग्नि अधिनियम -2009 के तहत भवन परिसर को सील करने, अपील करने और संशोधन करने की पूरी शक्तियां सौंप दी गई हैं। भूमि क्षेत्र पर किसी भी प्रकार की छत होने के बावजूद, फायर एनओसी प्रदान करने और अग्निशमन योजना को मंजूरी देने की शक्तियां भी नगर निगम आयुक्तों को मिल गई हैं। 500 वर्ग गज तक के क्षेत्र के 20 वर्ष तक के किरायेदारों, लीज होल्डर्स को स्वामित्व अधिकार के हस्तांतरण के मामलों को तय करने  का प्रस्ताव भी बैठक में रखा गया।

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Posted By: Kamlesh Bhatt

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