चंडीगढ़, [अनुराग अग्रवाल]। हरियाणा सरकार ने प्राकृतिक आपदा से पीडि़त किसानों का पक्का इंतजाम कर दिया है। पूरी तरह से फसल बर्बाद होने की स्थिति में राज्य सरकार पीडि़त किसानों को 20 हजार रुपये प्रति एकड़ मुआवजा देगी। गेहूं, धान व कपास की फसलों के बर्बाद होने पर यह मुआवजा राशि मिलेगी।

दालों, तिलहन और बाजरा समेत अन्य बर्बाद फसल के लिए मुआवजा राशि 15 हजार रुपये प्रति एकड़ होगी।
प्रदेश सरकार ने इसे अटल फसल जोखिम समर्थन योजना का नाम दिया है। कृषि मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ ने विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक कर योजना का ड्राफ्ट प्लान तैयार कर लिया है।

मुख्यमंत्री मनोहर लाल इसकी मंजूरी प्रदान कर चुके हैैं। अब स्वीकृति के लिए योजना केंद्र सरकार को भेजी जाएगी। वहां से हरी झंडी मिलते ही राज्य में किसान हित की इस अति महत्वाकांक्षी योजना को लागू कर दिया जाएगा। अटल फसल जोखिम समर्थन योजना केंद्र, राज्य व किसानों के आपसी सहयोग से बैंकों के माध्यम से राज्य सरकार द्वारा संचालित होगी।

इस योजना में सभी फसलों को जोखिम सुरक्षा प्रदान की जाएगी। सभी किसान योजना के दायरे में आएंगे, लेकिन कर्जदार किसानों के लिए यह अनिवार्य होगी। योजना फसल बुआई के समय लागू होगी। फसल बुआई व फसल में बोर (फली) आने के 15 दिन के अंदर योजना के साथ किसानों को खुद को जोड़ना होगा।

योजना का लाभ उन्हीं किसानों को मिलेगा, जो इसका अंशदान जमा कराएंगे। किसान बैैंक में निर्धारित खाते में अंशदान का भुगतान कर योजना से जुड़ सकेंगे। किसानों की फसलों के विवरण के आधार पर उन्हें अटल जोखिम प्रबंधन नंबर (एजेपीएन) दिया जाएगा। योजना के क्रियान्वयन, निगरानी और विवादों के निपटारे के लिए कृषि विभाग ब्लाक स्तर से राज्य स्तर तक एक अलग विंग खोलेगा।

गेहूं, धान व कपास की फसल के लिए ये मिलेगी क्षतिपूर्ति राशि

15 से 25 प्रतिशत नुकसान पर - पांच हजार रुपये प्रति एकड़
26 से 50 प्रतिशत नुकसान पर - 10 हजार प्रति एकड़
51 से 75 प्रतिशत नुकसान पर - 15 हजार प्रति एकड़
76 प्रतिशत से अधिक नुकसान - 20 हजार प्रति एकड़

दाल, तिलहन व बाजरे समेत अन्य फसल के लिए क्षतिपूर्ति

15 से 25 प्रतिशत नुकसान पर - 3750 रुपये प्रति एकड़
26 से 50 प्रतिशत नुकसान पर - 7500 रुपये प्रति एकड़
51 से 75 प्रतिशत नुकसान पर - 11,250 रुपये प्रति एकड़
76 प्रतिशत से अधिक नुकसान - 15 हजार रुपये प्रति एकड़

किसानों को यह करना होगा भुगतान

जोखिम राशि दर मात्र 7.5 प्रतिशत होगी, जिसे किसान-राज्य व केंद्र सरकार ढ़ाई-ढाई प्रतिशत के अनुपात में बांटेंगे। यानि, गेहूं, धान व कपास की फसल के मामले में किसानों-राज्य सरकार व केंद्र सरकार को 500-500 रुपये तथा दाल, तिलहन व बाजरे की फसल वाले किसानों को 375-375 रुपये का अंशदान देना होगा।

ऐसे होगा फसलों के नुकसान का आकलन और भुगतान

- प्रथम चरण में हानि का आकलन मैपिंग कमेटी के द्वारा सेटेलाइट एरिया मैपिंग के आधार पर होगा। तहसीलदार और ब्लाक कृषि अधिकारी मैपिंग कमेटी के सदस्य होंगे।
- हानि क्षेत्रफल के क्षेत्र का निर्धारण मैपिंग कमेटी के द्वारा प्राकृतिक आपदा के पहले 48 घंटे में किया जाएगा और हानि क्षेत्र को चिह्नित किया जाएगा।
- द्वितीय चरण में वास्तविक हानि का आकलन दो समानांतर टीमें करेंगी। पहली टीम पटवारी व नंबरदार की होगी। दूसरी टीम एडीओ व सरपंच द्वारा फिजिकल विजिट के आधार पर आकलन करेगी।

- दोनों टीमों का फसल हानि प्रतिशत लगभग एक समान है तो इसे तय मान लिया जाएगा। यदि हानि प्रतिशत अलग-अलग हैैं तो मैपिंग कमेटी का निर्णय अंतिम होगा।
- जोखिम क्षतिपूर्ति राशि का भुगतान किसानों द्वारा जोखिम पत्र में दिए गए बैैंक खाते में डायरेक्ट बेनीफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के जरिए होगा।

फसल नहीं बो पाने पर 5600 रुपये का मुआवजा

प्राकृतिक आपदा के कारण फसल नहीं बो पाने वाले किसानों को आपदा प्रबंधन कोष से अधिकतम 5600 रुपये प्रति एकड़ दर से मुआवजे का भुगतान किया जाएगा।

'केंद्र से मंजूरी मिलने पर करेंगे लागू'
''हमने किसानों की पीड़ा को समझा है। कोई भी बीमा कंपनी 80 प्रतिशत से अधिक मुआवजा नहीं देती। प्राकृतिक आपदा का हर साल भय सताता रहता है। हम किसानों के लिए अटल फसल जोखिम समर्थन योजना बना रहे हैैं। केंद्र सरकार से मंजूरी मिलते ही इसे राज्य में लागू किया जाएगा।
- ओमप्रकाश धनखड़, कृषि मंत्री, हरियाणा।

Posted By: Sunil Kumar Jha

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