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पांच साल से अधिक समय तक RTI का जवाब लटकाना पड़ा महंगा, फरीदाबाद नगर निगम को देना पड़ेगा ₹10000 का मुआवजा

Published: Thu, 01 Oct 2026 11:58 AM (IST)

हरियाणा सूचना आयोग ने फरीदाबाद नगर निगम पर पांच साल से अधिक समय तक आरटीआई जानकारी उपलब्ध न कराने पर 10,000 रुपये का मुआवजा लगाया है।

पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट फाइल फोटो (जागरण)

पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट फाइल फोटो (जागरण)

HighLights

  1. फरीदाबाद नगर निगम पर 10,000 रुपये का मुआवजा लगा

  2. पांच साल से अधिक आरटीआई जानकारी नहीं दी गई

  3. अधिकारियों की विभागीय जांच और व्यवस्था सुधारने के निर्देश

राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी को पांच साल से अधिक समय तक उपलब्ध नहीं कराने और बार-बार आयोग के निर्देशों की अनदेखी करने पर हरियाणा सूचना आयोग ने फरीदाबाद नगर निगम पर दस हजार रुपये का मुआवजा लगाया है।

आयोग ने नगर निगम आयुक्त को संबंधित अधिकारियों की भूमिका की विभागीय जांच कराने का निर्देश भी दिया है। साथ ही प्रदेश के सभी नगर निगमों, नगर परिषदों और नगर समितियों में सूचना के अधिकार से जुड़ी व्यवस्था को व्यवस्थित करने के निर्देश दिए गए हैं।

पशु जन्म नियंत्रण नियमों के पालन से जुड़ी थी जानकारी

मामला आवेदक गौरी मौलेखी की ओर से 23 दिसंबर 2020 को दायर सूचना के अधिकार आवेदन से जुड़ा है। उन्होंने फरीदाबाद नगर निगम से पशु जन्म नियंत्रण नियम, 2001 के अनुपालन से संबंधित जानकारी मांगी थी।

इसमें नगर निगम की निगरानी एवं क्रियान्वयन समिति गठित करने के आदेश, संबंधित उपसमिति की ओर से तैयार की गई योजना, पशु जन्म नियंत्रण के लिए नियुक्त संस्था का विवरण और भारतीय नस्ल के कुत्तों को गोद लेने को प्रोत्साहित करने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी शामिल थी।

आयोग के समक्ष सुनवाई के दौरान सामने आया कि कुछ जानकारी उपलब्ध कराने का दावा किया गया, लेकिन मांगी गई पूरी और बिंदुवार सूचना समय पर नहीं दी गई।

आयोग ने पाया कि सूचना एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय के बीच भेजी जाती रही, जबकि आवेदक को वास्तविक जानकारी उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी पूरी नहीं हुई।

पांच साल आठ महीने बाद भी पूरी जानकारी नहीं

आयोग ने अपने आदेश में कहा कि आवेदन दाखिल होने के बाद पांच साल आठ महीने से अधिक समय बीत चुका था, फिर भी आवेदक को पूरी और संतोषजनक जानकारी नहीं मिली।

आयोग के अनुसार कुछ जानकारी निर्धारित अवधि के काफी बाद दी गई और वह भी अधूरी थी। लगातार निर्देशों के बावजूद स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ।

राज्य सूचना आयुक्त डॉ. अजय कुमार सूरा ने कहा कि सूचना का अधिकार समयबद्ध सूचना उपलब्ध कराने के लिए है। अत्यधिक देरी से दी गई सूचना इस व्यवस्था के उद्देश्य को ही कमजोर करती है। आयोग ने यह भी माना कि अधिकारियों को पर्याप्त अवसर और कारण बताओ नोटिस दिए जा चुके थे।

दो माह में विभागीय जांच पूरी करने के निर्देश

आयोग ने नगर निगम फरीदाबाद को आवेदक को दस हजार रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। यह राशि आदेश प्राप्त होने के 30 दिन के भीतर मांगपत्र या बैंक भुगतान आदेश के माध्यम से देनी होगी।

इसके अलावा संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने के लिए विभागीय जांच दो माह में पूरी करने और उसकी अनुपालन रिपोर्ट आयोग को देने के निर्देश दिए गए हैं।

पूरे हरियाणा में व्यवस्था सुधारने के निर्देश

आयोग ने शहरी स्थानीय निकाय विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को प्रदेश के सभी नगर निकायों में सूचना के अधिकार की व्यवस्था दुरुस्त करने को कहा है। सूचना अधिकारी और प्रथम अपीलीय अधिकारियों की जिम्मेदारी स्पष्ट करने तथा आवेदनों को विभागीय पत्राचार के नाम पर लंबे समय तक लंबित न रखने के लिए निगरानी व्यवस्था बनाने के निर्देश दिए गए हैं।