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हरियाणा कांग्रेस में गुटबाजी खत्म! संजय दत्त की रणनीति से एकजुट हुए नेता; मंच पर एक साथ नजर आ रहे पार्टी के दिग्गज

Published: Mon, 21 Sep 2026 08:00 PM (IST)

हरियाणा कांग्रेस में लंबे समय से चली आ रही गुटबाजी के बीच प्रभारी संजय दत्त ने ब्लाक स्तरीय सम्मेलनों के ...और पढ़ें

मंच पर एक साथ नजर आए हरियाणा कांग्रेस के दिग्गज। फोटो जागरण

मंच पर एक साथ नजर आए हरियाणा कांग्रेस के दिग्गज। फोटो जागरण 

HighLights

  1. संजय दत्त ने हरियाणा कांग्रेस नेताओं को एक मंच पर लाया।

  2. ब्लाक स्तरीय सम्मेलनों से पार्टी संगठन मजबूत हो रहा है।

  3. निचले स्तर पर कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने की योजना है।

राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। हरियाणा कांग्रेस में लंबे समय से चली आ रही गुटीय राजनीति के बीच ब्लाक स्तरीय सम्मेलनों ने नई तस्वीर पेश की है। कांग्रेस प्रभारी संजय दत्त और प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह की अगुवाई में हो रहे इन सम्मेलनों की सबसे बड़ी राजनीतिक उपलब्धि यह है कि पार्टी की पहली पंक्ति के नेता अब एक-दूसरे से दूरी बनाए रखने की बजाय संगठन के मंच पर साथ दिखाई दे रहे हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा से लेकर कुमारी सैलजा, रणदीप सिंह सुरजेवाला, चौधरी बीरेंद्र सिंह, कैप्टन अजय यादव, डा. अशोक तंवर, दीपेंद्र सिंह हुड्डा और बृजेंद्र सिंह तक नेताओं की भागीदारी ने कांग्रेस में चल रही गुटबाजी के बीच प्रभारी की रणनीति को महत्वपूर्ण बना दिया है।

साल 2024 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को सत्ता के करीब पहुंचकर भी सरकार बनाने में सफलता नहीं मिली थी। चुनाव के बाद पार्टी के भीतर हार के कारणों को लेकर संगठनात्मक कमजोरी के साथ-साथ आपसी खींचतान और गुटबाजी चर्चा के केंद्र में रही।

निचली इकाइयों को सक्रिय करने का रास्ता चुना

हाईकमान के स्तर पर भी संगठन को मजबूत करने और नेताओं के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत महसूस की गई। ऐसे माहौल में संजय दत्त ने सीधे चुनावी राजनीति की बजाय संगठन की निचली इकाइयों को सक्रिय करने का रास्ता चुना है।

ब्लाक सम्मेलनों का कार्यक्रम जिस तरह तैयार किया गया है, उसमें राजनीतिक संतुलन साफ दिखाई दे रहा है। अलग-अलग नेताओं के राजनीतिक प्रभाव और आपसी समीकरणों को ध्यान में रखते हुए कार्यक्रम इस तरह तय किए गए हैं कि उनके हित सीधे टकराने की स्थिति न बने। इसके बावजूद सभी प्रमुख नेताओं को संगठन के ब्लाक स्तरीय कार्यक्रमों से जोड़ना प्रभारी के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक उपलब्धि मानी जा रही है।

इसका दूसरा पहलू प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह के साथ प्रभारी का समन्वय है। जिला अध्यक्षों और ब्लाक अध्यक्षों के साथ भी संजय दत्त का लगातार संपर्क बना हुआ है। यही तालमेल कांग्रेस को उस संगठनात्मक ढांचे से निकालने की कोशिश है, जिसमें लंबे समय से फैसलों और गतिविधियों का केंद्र सीमित नेताओं और विधानसभा क्षेत्रों तक सिमटा रहा है।

संगठन की अगली सीढ़ी हो रही तैयार

ब्लॉक सम्मेलनों के जरिये पार्टी पहली बार लंबे अंतराल के बाद संगठन की गतिविधियों को इस स्तर तक ले जा रही है। अगला चरण 25 से 27 सितंबर तक चलेगा। इसके बाद जिला अधिवेशन होंगे। यानी कांग्रेस की रणनीति केवल सम्मेलन कराने की नहीं, बल्कि इन सम्मेलनों के जरिये संगठन की अगली सीढ़ियां तैयार करने की है।

ब्लॉक के बाद गांव-वार्ड पर नजर

कांग्रेस अब संगठन को ब्लॉक से मंडल और फिर गांव तथा वार्ड स्तर तक ले जाने की तैयारी में है। गांवों और वार्डों में पांच से 11 सदस्यों की कमेटियां गठित करने की योजना है। इसका सीधा राजनीतिक उद्देश्य पार्टी के पुराने कार्यकर्ता नेटवर्क को दोबारा सक्रिय करना और संगठन को चुनाव के समय ही सक्रिय होने वाली व्यवस्था से बाहर निकालना है।

सम्मेलनों को कार्यक्रम तक सीमित नहीं रखने की कवायद

कांग्रेस के पहली पंक्ति के नेताओं को एक मंच पर लाना इस रणनीति का ऊपरी हिस्सा है, लेकिन कांग्रेस की असली राजनीतिक परीक्षा नीचे होगी। यदि हुड्डा, सैलजा, सुरजेवाला, बीरेंद्र सिंह और दूसरे प्रमुख नेताओं की मौजूदगी ब्लाक और जिला स्तर के कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय में बदलती है, तो पार्टी के संगठनात्मक ढांचे में इसका असर दिखाई दे सकता है।

इसके विपरीत यदि शीर्ष स्तर की एकजुटता जमीनी स्तर तक नहीं पहुंची तो सम्मेलनों की यह कवायद भी महज कार्यक्रम बनकर रह जाएगी।