जेएनएन, चंडीगढ़ : एक राज्य से दूसरे राज्य में 10 किलोमीटर से ज्यादा दूरी और 50 हजार रुपये से ज्यादा के माल की ढुलाई पर नेशनल ई-वे बिल का अनुपालन हरियाणा में भी शुरू हो गया है। बृहस्पतिवार को इसका पहला दिन था, लेकिन शुरूआत के दो दिन में ही यह उद्यमियों और व्यापारियों के लिए कारगर साबित नहीं हुआ। उद्यमियों को शुक्रवार को भी दो दिनों से ई-वे बिल जेनरेट करने में खासी मशक्कत हुई।

कहीं इंटरनेट नहीं चला तो कहीं ई-वे बिल जेनरेट ही नहीं हो पाया। सबसे अधिक दिक्कत पानीपत, गुरुग्राम और फरीदाबाद के उद्यमियों को उठानी पड़ी।  हरियाणा के वित्त एवं आबकारी व कराधान मंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने ई-वे बिल जेनरेट करने में आ रही दिक्कतों पर अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी है।

उन्‍होंने विभागीय अधिकारियों से कहा कि यदि कहीं कोई परेशानी अथवा तकनीकी व्यवधान है तो उसे प्राथमिकता के आधार पर दूर किया जाए। बहरहाल, ई-वे बिल जेनरेट करने को लेकर ट्रांसपोर्टर, उद्यमियों और व्यापारियों में खासी हलचल है और वे अब भी मोहलत पाने के लिए पूरा जोर लगा रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि इंटरस्टेट गुड्स सप्लाई पर ई-वे बिल की अनिवार्यता बुधवार आधी रात के बाद से लागू हो गई थी। इस बिल के लागू होते ही कई राज्यों की ओर से अपने स्तर पर लागू ई-वे बिल और निगरानी फार्म समाप्त हो जाएंगे और पूरे देश में गुड्स मूवमेंट पर सिर्फ एक फारमेट वाला ई-वे बिल लागू होगा।

13 राज्यों ने इंटरस्टेट सप्लाई के साथ ही राज्य के भीतर माल की आवाजाही यानी इंट्रास्टेट सप्लाई पर भी 1 फरवरी से ही ई-वे बिल लागू करने का फैसला किया है। इनमें उत्तर प्रदेश, हरियाणा, बिहार, झारखंड, कर्नाटक, केरल, कर्नाटक, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडू, पुडुचेरी, सिक्किम और उत्तराखंड शामिल है। ई-वे बिल के दो पार्ट होंगे। पहला पार्ट सप्लायर और कंसाइनर को जेनरेट करना होगा, जबकि दूसरा पार्ट ट्रांसपोर्टर को जेनरेट करना होगा।

ऐसे जेनरेट होगा ई-वे बिल

कारोबारी या व्यापारी डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू डॉट ई वे बिल डॉट निक डॉट इन पर बिल जेनरेट कर सकते हैं। विभाग की वेबसाइट पर कारोबारी को अपना जीएसटी और मोबाइल नंबर डालकर खुद को रजिस्टर्ड करना होगा। आइडी उसी वक्तबन जाएगी जिसके बाद कारोबारी ऑनलाइन ही स्थायी रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं। अगर किसी ट्रक में कई कंपनियों का सामान जा रहा है तो ट्रांसपोर्टर को एक कंसालिडेटेड बिल बनाना होगा। बिल में सभी कंपनियों के सामान की अलग-अलग डिटेल होनी चाहिए।

Posted By: Sunil Kumar Jha

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