जेएनएन, चंडीगढ़। जननायक जनता पार्टी (JJP) के संस्थापक सांसद दुष्यंत चौटाला ने चाचा अभय सिंह चौटाला को नान सीरियस राजनीतिज्ञ करार दिया है। उन्होंने कहा कि जींद उपचुनाव से पहले अभय ने बड़े भाई अजय चौटाला पर पैसा इकट्ठा करने के आरोप लगाए और चुनाव के बाद पैसा बांटने के आरोप जड़े। इसी से उनकी राजनीतिक गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

चंडीगढ़ में सात जिलों के पार्टी पदाधिकारियों की बैठक के बाद मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए दुष्यंत चौटाला ने कहा कि अभय चौटाला को आरोप लगाने के बाद उन्हें साबित भी करना चाहिए। अगर वह ऐसा नहीं कर पाते तो उन्हें किसी पर कीचड़ उछालने का हक नहीं है।

दुष्यंत चौटाला ने अपने चाचा को भाजपा का एजेंट करार देते हुए कहा कि पिछले तीन माह में उन्होंने सरकार के विरुद्ध एक भी बयान नहीं दिया और JJP को बदनाम करने का कोई मौका नहीं छोड़ा। उन्होंने कहा कि JJP को समर्थन देने वाले विधायक अब इनेलो की राजनीतिक गतिविधियों में शामिल नहीं होते। अभय चौटाला जब सांसद, महासचिव और इनसो अध्यक्ष को पार्टी से निकलवा सकते हैं तो JJP समर्थक विधायकों के विरुद्ध पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में कार्रवाई करने का भी साहस जुटाएं।

दुष्यंत ने खुद ही जवाब दिया कि अभय चौटाला को अपनी कुर्सी का खतरा है, इसलिए वह JJP समर्थित विधायकों के विरुद्ध कार्रवाई नहीं करेंगे। फिलहाल कांग्रेस और इनेलो दोनों के 17-17 विधायक हैं, इसलिए स्पीकर को टॉस के जरिये यह फैसला करना चाहिए कि विपक्ष का नेता कौन होगा। उन्होंने बताया कि JJP समर्थक विधायक विधानसभा में किसानों की फसल की बर्बादी तथा दवा घोटाले में अभी तक कार्रवाई नहीं होने के मुद्दे पर दो ध्यानाकर्षण प्रस्ताव लेकर आएंगे।

राष्ट्रीय हित को ध्यान में रख गठबंधन करेगी JJP

दुष्यंत चौटाला ने कहा कि राष्ट्रीय कार्यकारिणी ने पार्टी के तीन नेताओं को किसी दल के साथ गठबंधन करने के लिए अधिकृत किया है। तीनों नेता अपने-अपने ढंग से इस पर होमवर्क कर रहे हैं। फिलहाल हमारा किसी दल के साथ गठबंधन नहीं है। लोकसभा चुनाव के मद्देनजर राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखते हुए JJP किसी भी दल के साथ गठबंधन करेगी।

राजनीतिक स्वार्थ में मर्यादाएं भूले दुष्यंत : प्रवीण आत्रेय

इनेलो प्रवक्ता प्रवीण आत्रेय ने कहा कि जिस चाचा की अंगुली पकड़कर दुष्यंत चौटाला ने राजनीति सीखी और आज देश की सबसे बड़ी पंचायत के सदस्य बने, उसी पर कीचड़ उछालते हुए उन्हें शर्म और आत्मग्लानि महसूस होनी चाहिए थी। मगर राजनीतिक स्वार्थ के वशीभूत दुष्यंत सारी मर्यादाएं लांघ रहे हैं। उन्हें यह भी याद नहीं रह गया कि राजनीति में पिता से कहीं अधिक उन्हें दादा और चाचा ने पलकों पर बैठाया था। इससे उनकी सोच का पता चलता है।

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