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    SMO की सीधी भर्ती बंद करने और संशोधित ACP मांग रहे डॉक्टरों की नजरें अब CM नायब सैनी पर, पत्र लिख हस्तक्षेप का किया अनुरोध

    Updated: Sat, 29 Nov 2025 05:29 PM (IST)

    हरियाणा के सरकारी अस्पतालों के डॉक्टरों ने एसएमओ की सीधी भर्ती रोकने और एसीपी लागू करने की मांग की है। उन्होंने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से हस्तक्षेप का अनुरोध किया है। एसोसिएशन ने रविवार को बैठक बुलाई है, जिसमें स्वास्थ्य सेवाएं बंद करने का निर्णय लिया जा सकता है। 

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    डॉक्टरों ने CM नायब सैनी को लिखा पत्र। फाइल फोटो

    राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। सरकारी अस्पतालों में वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारियों (एसएमओ) की सीधी भर्ती रोकने और संशोधित सुनिश्चित करियर प्रगति (एसीपी) लागू करने की मांग कर रहे डाक्टरों की नजरें अब मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी पर टिकी हैं।

    हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन (एचसीएमएसए) ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर मामले में हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया है। साथ ही आज रविवार को पदाधिकारियों की बैठक बुलाई है, जिसमें अगली रणनीति बनाई जाएगी।

    सरकारी अस्पतालों में बृहस्पतिवार को सुबह नौ से 11 बजे तक दो घंटे के लिए ओपीडी (बाह्य रोगी विभाग) में सेवाएं बंद कर चुके डाक्टरों ने पीछे नहीं हटने के संकेत दिए हैं। बैठक में समस्त स्वास्थ्य सेवाओं, आपातकालीन और पोस्टमार्टम सेवाओं को पूरी तरह से बंद करने का निर्णय लिया जा सकता है।

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    डॉक्टरों की पदोन्नति के अवसर क्षीण 

    एचसीएमएसए के अध्यक्ष डा. राजेश ख्यालिया और महासचिव अनिल यादव द्वारा मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में कहा गया है कि वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारियों (एसएमओ) की सीधी भर्ती को स्वीकार नहीं किया जा सकता क्योंकि इससे मौजूदा डाक्टरों की पदोन्नति के अवसर क्षीण हो गए हैं।

    आज स्थिति यह है कि 95 प्रतिशत से अधिक सरकारी डाक्टर अपनी पूरी सेवा के दौरान केवल एक पदोन्नति प्राप्त कर रहे हैं। मजबूरन कई डाक्टरों ने पदोन्नति के अवसरों में कमी के कारण स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति भी ले ली है। तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने वर्ष 2021 में एसएमओ की सीधी भर्ती को रोकने का स्पष्ट आदेश दिया था, फिर भी इसे अभी तक लागू नहीं किया गया।

    इसी तरह संशोधित सुनिश्चित करियर प्रगति (एसीपी) को मुख्यमंत्री द्वारा स्वीकृति दिए जाने के एक साल बाद भी लागू नहीं किया गया है। नान प्रेक्टिस अलाउंस, आयुष्मान इंसेंटिव, स्पेशलिस्ट इंसेंटिव जैसी अन्य वैकल्पिक व्यवस्थाओं का सुझाव भी सरकार ने नहीं माना है।

    एसोसिएशन पदाधिकारियों का कहना है कि यदि हमारी मांगें नहीं मानी तो मजबूरी में आपातकालीन सेवाएं भी बंद करनी पड़ सकती हैं। लंबित मुद्दों को हल नहीं करने के कारण जनता को होने वाली किसी भी असुविधा के लिए सरकार उत्तरदायी होगी।

    एसएमओ के 644 में से 200 पद रिक्त

    वर्तमान में एसएमओ के लगभग 200 पद (कुल 644 में से) रिक्त हैं। इनमें से 160 पद सीधी भर्ती के लिए आरक्षित होने के कारण अवरुद्ध हैं क्योंकि इस संबंध में सेवा नियमों में अभी तक संशोधन नहीं किया गया है।

    सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और सिविल सर्जन कार्यालय स्तर पर एसएमओ और उप सिविल सर्जन की कमी के कारण राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रम बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। इसलिए एसएमओ के 200 रिक्त पदों को शीघ्र पदोन्नति द्वारा भरा जाना चाहिए।