चंडीगढ़ [अनुराग अग्रवाल]। बात बजट की हो और विधायकों के खाने- पीने का बंदोबस्त न हो, ऐसा कैसे हो सकता है? जी हां... सांसदों और विधायकों के साथ पहली बार प्री-बजट चर्चा करने में जुटी सरकार ने माननीयों की सुख-सुविधा का खास ख्याल रखा है। 17 से 19 फरवरी तक विधायकों के साथ प्री-बजट चर्चा पहले विधानसभा में होने वाली थी, लेकिन इसे अब चंडीगढ़ के होटल माउंट व्यू में कर दिया गया है।

2019 के चुनाव से पहले मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने अपनी आखिरी प्रेस कॉन्फ्रेंस भी इसी होटल में की थी। अब विधायक तीन दिन होटल में रहकर प्रदेश की जनता के राशन-पानी की चिंता करेंगे। हर रोज करीब चार घंटे तक मंथन का दौर चलेगा। एक पूर्व मंत्री को जब यह पता चला तो उन्होंने चुटकी ली, मुखिया जी... सांसद हो गए और विधायक होने वाले हैं। हम भले ही पूर्व मंत्री हो गए, लेकिन हमारी भी राय जान लेते तो अच्छा होता।

मनीष ग्रोवर की सीएम में एंट्री

महम के निर्दलीय विधायक बलराज कुंडू के तमाम विरोध के बावजूद पूर्व मंत्री मनीष ग्रोवर की मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) में एंट्री तय हो गई है। भाजपा नेतृत्व ने आउटर दिल्ली की जिन 17 विधानसभा सीटों पर प्रचार की जिम्मेदारी हरियाणा के नेताओं को सौंपी थी, उनमें से रोहिणी सीट पर भाजपा चुनाव जीत गई। जब बाकी सीटों पर हार का श्रेय भाजपा दिग्गजों को दिया जा सकता है तो फिर एक सीट पर जीत का श्रेय ग्रोवर को क्यों नहीं दिया जा सकता। रोहिणी के लिए मनीष ग्रोवर ने विधानसभा प्रभारी की जिम्मेदारी निभाई है। इसी आधार पर अब उन्हें मुख्यमंत्री मनोहर लाल सीएमओ में एंट्री का तोहफा दे सकते हैं। ग्रोवर को मुख्यमंत्री का राजनीतिक सचिव बनाए जाने की संभावना है। हालांकि उनकी एंट्री बहुत पहले हो जाती, लेकिन कुंडू ने ऐसा मोर्चा खोला कि दिल्ली चुनाव के बहाने से टल गई, जिसका रास्ता अब साफ हुआ है।

नहीं रहेगा दीये तले अंधेरा

पिछले दिनों आपने एक खबर पढ़ी होगी, जिसके मुताबिक अदालतों का कामकाज हिंदी में कराने की पहल हुई है। हाई कोर्ट में भी फैसलों की कॉपी हिंदी में ली जा सके, इसके लिए हरियाणा सरकार ने राज्यपाल के माध्यम से राष्ट्रपति के पास प्रस्ताव भेजा है, ताकि उसे सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचाया जा सके। बहरहाल, हम इस फैसले का जिक्र यहां इसलिए कर रहे, ताकि बता सकें कि हरियाणा सरकार के दीये तले अब अंधेरा नहीं रहने वाला है। राज्य सरकार ने अपने विभागों में कामकाज हिंदी में हो, इसका बंदोबस्त करने की पहल की है। इसके सूत्रधार डीपीआर पीसी मीणा हैं, जिन्होंने हरियाणा साहित्य अकादमी के चेयरमैन डा. पूर्णमल गौड़ को उस कमेटी की जिम्मेदारी सौंपी,जो सरकारी विभागों को हिंदी में कामकाज के लिए प्रेरित करेगी। संकट यह है कि अभी इस कमेटी को काबिल या यूं कहिये कि सरकार के मिजाज वाले लोग नहीं मिल रहे हैं।

कांग्रेस का 4200 वोट का गणित

हरियाणा कांग्रेस की कप्तानी छिनने के बाद पार्टी को अलविदा कहने वाले अशोक तंवर का हुड्डा फोबिया कम होने का नाम नहीं ले रहा। इसे संयोग कहें या कुछ और, तंवर की ताजपोशी के साथ ही चुनावी रण में कांग्रेस की हार का सिलसिला जारी रहा। हालांकि अशोक तंवर इसका दोष टीम हुड्डा पर ही मढ़ते हैं। इस दौरान दोनों नेताओं की केमिस्ट्री ऐसी बिगड़ी कि दिल्ली में मारपीट तक की नौबत आ गई। बहरहाल हुड्डा-सैलजा की जोड़ी को कमान मिलने के तुरंत बाद कांग्रेस से किनारा करने वाले तंवर सबसे ज्यादा हुड्डा पर ही हमलावर हैं। पूर्व मुख्यमंत्री के दावे कि अगर 4200 वोट मिल जाते तो सूबे में सरकार कांग्रेस की होती, पर तंवर कहते हैं कि अगर वह मुखिया होते तो कुल वोट ही 4200 मिलने थे। हुड्डा हैं कि तंवर की किसी टिप्पणी को भाव नहीं दे रहे। पूछने पर सिर्फ हाथ हिला देते हैं।

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Posted By: Kamlesh Bhatt

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