हरियाणा BJP के विधायकों की दुविधा दूर, PM मोदी संग बैठक के क्या है सियासी मायने? मनोहर-राव के गुटों को बड़ा संदेश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरियाणा के भाजपा विधायकों और मंत्रियों के साथ बैठक कर राज्य में नेतृत्व को लेकर बनी ...और पढ़ें
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PM मोदी ने की हरियाणा BJP के विधायकों के साथ बैठक। फोटो जागरण
HighLights
पीएम मोदी ने हरियाणा भाजपा विधायकों से दो घंटे की बैठक की।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व को स्पष्ट और मजबूत किया।
राज्य में भाजपा की खेमेबंदी समाप्त करने का कड़ा संदेश दिया।
राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी राज्यवार सांसदों के साथ तो बैठक करते रहे हैं, लेकिन शनिवार को हरियाणा के भाजपा विधायकों और मंत्रियों के साथ पहली बार करीब दो घंटे तक हुई बैठक को सामान्य शिष्टाचार मुलाकात मानना राजनीतिक रूप से पर्याप्त नहीं होगा।
वस्तुतः हरियाणा में खेमेबंदी बड़ी समस्या है। खासतौर से चुनाव से पहले राज्य में नेतृत्व परिवर्तन के बाद यह तेज हुई थी। ऐसे में पीएम मोदी की विधायकों संग हुई बैठक ने परोक्ष रूप से संदेश दे दिया कि जो मंच पर उनके साथ बैठे हैं, वही नेतृत्व है और सबको एक साथ चलना होगा।
विधायकों का एक बड़ा वर्ग मुख्यमंत्री के साथ खड़ा
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ मंच पर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के अतिरिक्त भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, हरियाणा की प्रभारी स्मृति इरानी, प्रदेश अध्यक्ष डा. अर्चना गुप्ता, सह प्रभारी भोला सिंह और संगठन महामंत्री पवन राणा मौजूद थे।
दरअसल, राज्य भाजपा की राजनीति में एक से अधिक प्रभाव केंद्र सक्रिय हैं, जिस कारण विधायकों के बीच नेतृत्व को लेकर दुविधा की स्थिति बनी रहती है।
कुछ विधायक केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल को अपना नेता मानते हैं तो कुछ केंद्रीय राज्य मंत्री राव इंद्रजीत के प्रभाव में काम कर रहे हैं। इसके साथ ही विधायकों का एक बड़ा वर्ग मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के साथ खड़ा है।
ऐसे माहौल में प्रधानमंत्री का सभी विधायकों को एक मंच पर लाना इस संदेश के तौर पर देखा जा रहा है कि व्यक्तिगत राजनीतिक समीकरण अपनी जगह हैं, लेकिन राज्य सरकार का नेतृत्व स्पष्ट है।
मनोहर लाल की भूमिका अब राष्ट्रीय स्तर पर है, जबकि हरियाणा में सरकार का नेतृत्व नायब सिंह सैनी के हाथ में है। दोनों को एक-दूसरे के विकल्प के रूप में देखने के बजाय अलग-अलग जिम्मेदारियों के साथ देखना भाजपा की मौजूदा रणनीति को समझने का अधिक सटीक तरीका होगा।
नायब सैनी के लिए राजनीतिक स्पेस का विस्तार
पीएम की बैठक का सबसे बड़ा असर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की राजनीतिक स्वीकार्यता को लेकर दिखाई दिया। सैनी लंबे समय से मनोहर लाल के विश्वस्त सहयोगी रहे हैं, लेकिन मुख्यमंत्री के रूप में उनकी भूमिका अब अलग स्तर की है।
सरकार चलाने के लिए मुख्यमंत्री के पास प्रशासनिक और राजनीतिक निर्णयों की पर्याप्त स्वतंत्रता होना जरूरी है। प्रधानमंत्री की मौजूदगी में सभी विधायकों से सीधे संवाद ने इसी राजनीतिक स्पेस को पहले से अधिक स्पष्ट कर दिया है।
बैठक में प्रधानमंत्री द्वारा मुख्यमंत्री के कामकाज की सराहना किए जाने और बैठक के बाद नायब सिंह सैनी से अलग बातचीत करने को इसी संदर्भ में देखा जा रहा है। इससे विधायकों के बीच नेतृत्व को लेकर बनी किसी भी दुविधा को खत्म करने का संदेश तो मिला ही, साथ ही विधायकों को भी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की लाइन सही ढंग से समझ में आ गई।
बैठक का राजनीतिक महत्व अध्यक्ष के अनुरोध की पूर्ति तक सीमित नहीं
हरियाणा भाजपा की अध्यक्ष डा. अर्चना गुप्ता अपनी नियुक्ति के बाद पिछले दिनों जब प्रधानमंत्री से मिलने गई थी, तब उन्होंने विधायकों से मुलाकात का अनुरोध किया था। हालांकि, बैठक का राजनीतिक महत्व केवल उस अनुरोध की पूर्ति तक सीमित नहीं रहा।
करीब दो घंटे का सीधा संवाद और पूरी विधायक टीम की मौजूदगी इसे पार्टी के भीतर नेतृत्व की तस्वीर स्पष्ट करने वाली कवायद बनाती दिख रही है। प्रधानमंत्री ने इसे बहुत ही सरल तरीके से पार्टी के समस्त विधायकों को तो समझा ही दिया, साथ ही यह संदेश भी दे दिया कि संगठन में किसी तरह की खेमेबंदी स्वीकार्य नहीं है।
