जेएनएन, चंडीगढ़। हरियाणा में ढाबा, डेयरी और पोल्ट्री फार्म संचालकों को मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने बडी सौगात दी है। अब तक व्यावसायिक श्रेणी में प्रापर्टी टैक्स अदा करने को मजबूर हजारों ढाबा, डेयरी और पोल्ट्री फार्म संचालकों के लिए सरकार ने टैक्स भुगतान की अलग-अलग दरें निर्धारित की हैंं। इन सभी को व्यावसायिक श्रेणी से बाहर कर दिया गया है और व्यावसायिक श्रेणी के प्रापर्टी टैक्स का आधा टैक्स कर दिया है।

शहरी स्थानीय निकाय मंत्री कविता जैन के अनुसार 2013 में प्रापर्टी टैक्स के लिए दर्जनभर श्रेणियां निर्धारित की गई थीं, जिसमें पेट्रोल पंप, बैंक्वेट हाल से लेकर होटल तक शामिल हैं। इनमें ढाबा, डेयरी व पोल्ट्री फार्मों को शामिल नहीं किया गया था, जिस कारण उन्हें प्रापर्टी टैक्स व्यावसायिक श्रेणी के अनुसार प्रापर्टी टैक्स का भुगतान करने को मजबूर होना पड़ रहा था। नई व्यवस्था के अनुसार अब व्यावसायिक श्रेणी के मुकाबले 50 प्रतिशत कम दर पर प्रापर्टी टैक्स का भुगतान करना होगा।

सीएलयू के आवेदन कर चुके ढाबों संचालकों को भी राहत

मंत्री कविता जैन ने बताया कि राष्ट्रीय राजमार्ग पर सीएलयू (चेंज आफ लैंड यूज) ले चुके ढाबा संचालक तथा सीएलयू के लिए आवेदन कर चुके ढाबा संचालकों को नई श्रेणी के दायरे में लाया गया है। अब ढाबों को व्यावसायिक क्षेत्र के प्रापर्टी टैक्स का 50 फीसदी कम भुगतान करना होगा। ढाबों के अंदर खाली क्षेत्र के प्रापर्टी टैक्स का भुगतान व्यवसायिक श्रेणी के खाली भूखंड के अनुसार होगा।

डेयरी, पोल्ट्री फार्मों के लिए यह निर्धारित हुई दर

मंत्री कविता जैन के अनुसार 2 एकड़ में स्थापित डेयरी एवं पोल्ट्री फार्म संचालक को गुरुग्राम एवं फरीदाबाद नगर निगम में पांच रुपये प्रति वर्ग गज प्रति वर्ष तथा बाकी नगर निगमों में 3.75 रुपये प्रति वर्ग गज प्रति वर्ष की दर से प्रापर्टी टैक्स का भुगतान करना होगा। नगर परिषदों में 2.50 रुपये प्रति वर्ग गज प्रति वर्ष तथा सभी नगर पालिकाओं में 2 रुपये प्रति वर्ग गज प्रति वर्ष निर्धारित किया गया है।

ऐसे ढाबे, डेयरी एवं पोल्ट्री फार्म जो दो एकड़ से ज्यादा के स्थान में हैं, उनके लिए अतिरिक्त स्थान के लिए गुरुग्राम एवं फरीदाबाद नगर निगम में एक रूपए प्रति वर्ग गज प्रति वर्ष तथा बाकी नगर निगमों में 75 पैसे प्रति वर्ग गज प्रति वर्ष तथा सभी नगर परिषद में 50 पैसे प्रति वर्ग गज प्रति वर्ष और नगर पालिकाओं में 40 पैसे प्रति वर्ग गज प्रति वर्ष निर्धारित किया गया है।

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Posted By: Kamlesh Bhatt

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