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हरियाणा के डिफॉल्टरों को राहत, अब 30 नवंबर तक जमा करा सकेंगे बकाया कर

Published: Tue, 29 Sep 2026 06:17 PM (IST)

हरियाणा सरकार ने व्यापारियों और छोटे उद्यमियों को बकाया कर जमा करने के लिए एकमुश्त निपटान योजना को 30 नवंबर तक बढ़ा दिया है।

हरियाणा में बकाया कर निपटान योजना, 30 नवंबर तक बढ़ी व्यापारियों को मिली बड़ी राहत।

हरियाणा में बकाया कर निपटान योजना, 30 नवंबर तक बढ़ी व्यापारियों को मिली बड़ी राहत।

HighLights

  1. योजना 30 नवंबर तक बढ़ी, बकाया कर जमा करने का मौका

  2. जीएसटी पूर्व के पुराने कर विवादों में मिलेगी बड़ी छूट

  3. ब्याज और जुर्माने में 100% तक माफी का प्रावधान

राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। हरियाणा में एकमुश्त निपटान योजना के तहत अभी तक बकाया कर जमा नहीं करा सके व्यापारियों और छोटे उद्यमियों को सरकार ने राहत दी है। आबकारी एवं कराधान विभाग ने योजना को 30 नवंबर तक बढ़ा दिया है। अगले दो महीने में बकाया कर जमा किया जा सकेगा।

प्रदेश सरकार ने वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू होने से पहले के पुराने टैक्स विवादों और बकाया वसूली के मामलों को खत्म करने के लिए एक जून को एकमुश्त निपटान योजना लागू की थी, जो 28 सितंबर को खत्म हो गई। बड़ी संख्या में करदाता योजना का लाभ उठाने से चूक गए थे। इसलिए प्रदेश सरकार ने योजना को दो महीने के लिए बढ़ाया है।

योजना के तहत जीएसटी लागू होने से पहले के सात पुराने कर कानूनों से जुड़े मामलों में टैक्स, ब्याज और जुर्माने में छूट दी जाएगी। जिन व्यापारियों का किसी एक असेसमेंट वर्ष में कुल बकाया एक लाख रुपये तक है, उनका पूरा टैक्स, ब्याज और पेनल्टी स्वतः माफ मानी जाएगी।

इसके लिए अलग से आवेदन करने की जरूरत भी नहीं होगी। अन्य व्यापारी और करदाता योजना का लाभ उठाने के लिए आबकारी एवं कराधान विभाग के ऑनलाइन पोर्टल पर आवेदन कर सकते हैं।

योजना के तहत हरियाणा वैट कानून, केंद्रीय बिक्री कर अधिनियम, हरियाणा सामान्य बिक्री कर कानून, मनोरंजन शुल्क, विलासिता कर, स्थानीय क्षेत्र विकास कर और एंट्री टैक्स के बकाया कर दाताओं को राहत दी जाएगी। जिनका कुल बकाया एक लाख रुपये तक है, उन्हें टैक्स, ब्याज और जुर्माने में 100 प्रतिशत राहत मिलेगी।

यानी उनका पूरा बकाया समाप्त माना जाएगा। हरियाणा सामान्य बिक्री कर अधिनियम-1973 के मामलों में एक लाख रुपये तक के टैक्स बकाया पर पूरी छूट मिलेगी, जबकि एक लाख से अधिक राशि पर भी 70 प्रतिशत तक टैक्स माफी दी जाएगी। इसके अलावा ब्याज और जुर्माना पूरी तरह माफ रहेगा।

अन्य छह कर कानूनों के मामलों में सरकार ने स्लैब आधारित राहत योजना लागू की है। एक लाख रुपये से अधिक और 10 लाख रुपये तक के मामलों में 60 प्रतिशत टैक्स छूट मिलेगी। 10 लाख से एक करोड़ रुपये तक के मामलों में 50 प्रतिशत राहत दी जाएगी।

एक करोड़ से 10 करोड़ तक के बकाया पर 40 प्रतिशत, 10 करोड़ से 30 करोड़ तक 35 प्रतिशत और 30 करोड़ से 60 करोड़ रुपये तक 30 प्रतिशत टैक्स राहत का प्रावधान किया गया है। हालांकि 60 करोड़ रुपये से अधिक के मामलों में टैक्स छूट नहीं मिलेगी, लेकिन ब्याज और जुर्माने की 100 प्रतिशत माफी का लाभ यहां भी लागू रहेगा।

तीन किस्तों में भुगतान की सुविधा

पांच लाख रुपये तक की निपटान राशि का भुगतान एकमुश्त करना होगा। पांच लाख से 25 लाख रुपये तक के मामलों में दो किस्तों में भुगतान किया जा सकेगा। वहीं, 25 लाख रुपये से अधिक राशि वाले मामलों में तीन किस्तों की सुविधा दी गई है।

व्यापारी अपनी जरूरत के हिसाब से केवल चुनिंदा वर्षों के लिए भी योजना का लाभ ले सकेंगे। यानी सभी पुराने मामलों को एक साथ शामिल करना जरूरी नहीं होगा। सरकार ने ‘डाक्यूमेंट लिंक्ड वेवर’ का नया प्रविधान भी जोड़ा है।

इसके तहत व्यापारी पुराने वैधानिक फार्म और दस्तावेज जमा कर सकेंगे। दस्तावेजों का सत्यापन होने के बाद टैक्स मांग को और कम या समाप्त किया जा सकेगा। इससे कई ऐसे मामलों में राहत मिलेगी, जहां दस्तावेजी कमी के कारण टैक्स विवाद लंबे समय से फंसे हुए थे।