चंडीगढ़ [बिजेंद्र बंसल़]। Coronavirus के कहर से लागू देशव्यापी Lockdown से पहले ही हरियाणा से राज्यसभा की तीन सीटों प्रत्याशी सर्वसम्मति से कांग्रेस के दीपेंद्र हुड्डा, भाजपा-जजपा के रामचंद्र जांगड़ा और दुष्यंत गौतम निर्वाचित हुए। लॉकडाउन के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं में बढ़ोतरी की आवाज उठी तो दीपेंद्र हुड्डा ने एक ही झटके में दो करोड़ देने की घोषणा कर दी। इसमें भाजपा मुख्यालय में बैठने वाले दुष्यंत गौतम भी कहां पीछे रहने वाले थे, उन्होंने भी सोमवार को एक करोड़ रुपये प्रधानमंत्री राहत कोष में देने की घोषणा कर दी। घोषणा इसलिए कि दोनों ही नवनिर्वाचित सांसदों ने अभी शपथ नहीं ली है मगर यह तय है कि दोनों को अन्य सांसदों की तरह वार्षिक निधि मिलेगी। अभी बेशक दोनों का खजाना खाली है मगर जब भरेगा तो दे देंगे। इतने उधारी से ही काम चलाना होगा। तीसरे रामचंद्र जांगड़ा अभी तक दुष्यंत गौतम की घोषणा का इंतजार कर रहे हैं।

जजपा ने कर दिया भाजपा को मजबूर

Lockdown में मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने बेशक कोरोना राहत कोष खोलने में जरा भी देरी नहीं की, मगर उनकी पार्टी के नेता इसमें पहले चरण में ही सहयोग राशि देने में चूक कर गए, जबकि उनकी सरकार के सहयोगी दल जजपा ने बाजी मार ली। जजपा ने इस कोष में 51 लाख रुपये की राशि देकर सत्तारूढ़ दल भाजपा को उनसे ज्यादा सहयोग राशि देने पर मजबूर कर दिया।

हुआ भी यही, भाजपा ने इस कोष में अगले ही दिन एक करोड़ रुपये की राशि दी। यह क्रम अभी बंद नहीं हुआ है। 15 महीने पुरानी भतीजे की पार्टी जजपा ने 51 लाख रुपये दिए हैं तो चाचा की पार्टी काफी पुरानी है। चाचा भी इसमें पीछे रहने वाले नहीं हैं। चाचा का दिल बड़ा है। अब देखते हैं कि चाचा पहले दरियादिली दिखाते हैं या लॉकडाउन के मुद्दे पर चार बार सीएम को पत्र लिखने वाली कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष कुमारी सैलजा।

कोरोना के बाद घटेगा एक सरकारी खर्चा

कोरोना वायरस के प्रकोप से बचने को लागू देशव्यापी लॉकडाउन से वर्क फ्रॉम होम (घर से काम करना) प्रचलन काफी बढ़ है। प्रोफेशनल के लिए यह नया नहीं है मगर अब राजनेताओं ने भी अपनी अहम बैठकें वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये शुरू कर दी हैं। मंगलवार दोपहर हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक में भी ज्यादातर मंत्रियों ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये ही हिस्सा लिया। मुख्यमंत्री ने भी इसमें सभी मंत्रियों से संवाद किया अन्यथा अक्सर एक-दो मंत्री इसमें नदारद ही रहते हैं। सत्तारूढ़ दल भाजपा के प्रदेश प्रभारी अौर राष्ट्रीय महासचिव डॉ.अनिल जैन भी इन दिनों दिल्ली स्थित अपने निवास से हरियाणा में पार्टी कार्यकर्ताओं की लॉकडाउन के दौरान भूमिका के बारे में पता करते हैं। ऐसे में अब यह बड़ा सवाल हो गया है कि यदि ये अधिकारी और नेता लॉकडाउन में वीडियो कांफ्रेंसिंग से बैठक कर सकते हैं तो सरकारी खर्च घटाने को आम दिनों में क्यों नहीं करते। 

हाईक्यू ने सुनी बेजुबानों की आवाज

मनोहर लाल सरकार पार्ट-एक में उद्योग मंत्री रहे विपुल गोयल का राजनीतिक सितारा बेशक फिलहाल गर्दिश में कहा जा सकता है मगर जब वे मंत्री थे तो लोग उन्हें हाईक्यू (जिसका आइक्यू हाई हो) नेताजी कहकर पुकारते थे। हाईक्यू को 2019 में भाजपा ने टिकट भी नहीं दिया। चलो, यह अलग बात है मगर अब लॉक डाउन के दौरान जहां समाजसेवी और सत्तारूढ़ दल के नेता संवेदनशीलता दिखाते हुए निश्शुल्क राशन-पानी बंटवा रहे हैं वहीं हाईक्य ने बेजुबान बेसहारा पशु, पक्षियों की आवाज सुनी, जो बिना झोली के फकीर हैं। हाईक्यू ने इनके लिए अपील की कि लोग अपने घरों के आंगन के बाहर पशुओं के लिए चारा-पानी और पक्षियों के लिए आंगन या छत पर दाना-पानी रखें। उन्होंने लॉक डाउन के दौरान यह मुहिम संस्थाओं के माध्यम से प्रदेश में चलाने की पहल की। अब राशन-पानी बांटने वाले कह रहे हैं- यह आईडिया उन्हें पहले क्यों नहीं आया।

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Posted By: Kamlesh Bhatt

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