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'बिना सबूत और गवाहों के दोषी ठहराकर सुना दी सजा', गुरमीत राम रहीम की अपील पर CBI से जवाब तलब

Published: Fri, 10 Apr 2026 03:52 PM (IST)

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने साध्वियों के यौन शोषण मामले में डेरा मुखी गुरमीत सिंह की सजा के खिलाफ ...और पढ़ें

साध्वियों के यौन शोषण मामले में सजा काट रहे डेरा मुखी की अपील पर सीबीआई व अन्य से जवाब तलब। फाइल फोटो

साध्वियों के यौन शोषण मामले में सजा काट रहे डेरा मुखी की अपील पर सीबीआई व अन्य से जवाब तलब। फाइल फोटो

HighLights

  1. हाईकोर्ट ने गुरमीत सिंह की अपील पर सुनवाई शुरू की

  2. सीबीआई और अन्य पक्षों को 23 अप्रैल तक जवाब देना होगा

  3. गुरमीत सिंह ने साक्ष्य व गवाहों की कमी का आरोप लगाया

राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। साध्वियों के यौन शोषण मामले में सजा काट रहे डेरा मुखी गुरमीत सिंह की सजा के खिलाफ अपील पर पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने सुनवाई शुरू करते हुए सीबीआई व अन्य पक्ष को 23 अप्रैल तक जवाब दायर करने का आदेश दिया है।

शुक्रवार को हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस विक्रम अग्रवाल की खंडपीठ ने कहा कि इस अपील पर कौन सी बेंच सुनवाई करेगी यह भी तय किया जाएगा, तब तक सभी प्रतिवादी पक्ष अपना जवाब करेंगे।

डेरे की दो साध्वियों के यौन शोषण मामले में पंचकूला की सीबीआई कोर्ट ने अगस्त 2017 में डेरा मुखी को दोषी करार देते हुए उसे 10-10 साल की सजा सुनाई थी और साथ ही डेरा मुखी पर 30 लाख 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगा दिया था। पहले मामले में दस वर्ष की सजा पूरी होने के बाद दूसरे मामले में दस वर्ष की सजा शुरू होनी है। सजा को डेरा मुखी ने हाई कोर्ट में चुनौती देते हुए अपील दायर की थी।

अक्टूबर 2017 में हाई कोर्ट ने डेरा मुखी पर लगाए गए 30 लाख 20 हजार रुपये के जुर्माने पर रोक लगाते हुए डेरा मुखी को दो महीनों के भीतर जुर्माने की यह राशि सीबीआई कोर्ट में जमा करवाए जाने के आदेश दिए थे और साथ ही जमा करवाई जाने वाली जुर्माने की इस राशि को किसी नेशनलाइज बैंक में इसकी एफडी करवाए जाने के भी आदेश दिए गए थे।

डेरा मुखी गुरमीत सिंह हाई कोर्ट में अपील दायर कर कहा, है कि, इस मामले में सीबीआई अदालत ने उसे बिना उचित साक्ष्यों और गवाहों के उसे दोषी ठहरा सजा सुना दी है। जो कि तय प्रक्रिया के अनुसार गलत है। डेरा मुखी ने कहा कि, पहले इस मामले में एफआईआर ही दो तीन वर्षों की देरी से दायर हुई।

यह एक गुमनाम शिकायत पर दर्ज की गई, जिसमें शिकायतकर्ता का नाम तक नहीं था। पीड़िता के बयान ही इस केस में सीबीआई ने छह वर्षों के बाद रिकॉर्ड किए थे। सीबीआई का कहना था कि, वर्ष 1999 में यौन शोषण हुआ था, लेकिन बयान वर्ष 2005 में दर्ज किये गए।

जब सीबीआई ने एफआईआर दर्ज की तब कोई शिकायतकर्ता ही नहीं था। अपनी अपील में डेरा मुखी ने सवाल उठाया है कि, यह कहना की पीड़िताओं पर कोई दबाव नहीं था गलत है। क्योंकि दोनों पीड़िता सीबीआई के संरक्षण में थी। ऐसे में प्रॉसिक्यूशन का उन पर दबाव था 30 जुलाई 2007 तक बिना किसी शिकायत के जांच की जाती रही और पूरी की गई।

उसके पक्ष के साक्ष्य और गवाहों पर सीबीआई अदालत ने गौर ही नहीं किया। यहां तक कि, सीबीआई ने डेरा मुखी के मेडिकल एग्जामिनेशन तक की जरुरत नहीं समझी कि, डेरा मुखी के खिलाफ जो आरोप लगाए गए है, वह सही भी हो सकते है या नहीं।

लिहाजा इन सभी आधारों को लेकर डेरा मुखी ने अपने खिलाफ सुनाई गई सजा को रद कर उसके खिलाफ लगाए गए सभी आरोपों को ख़ारिज किये जाने की हाई कोर्ट से मांग की है। ज्ञात रहे कि रंजीत सिंह हत्याकांड और पत्रकार छत्रपति हत्या मामले में डेरा मुखी को हाईकोर्ट से राहत मिल चुकी है।