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काला दिवस कार्यक्रम में विवाद, दो महिला नेताओं पर हरियाणा कांग्रेस का शिकंजा; पार्टी की छवि धूमिल करने पर थमाया नोटिस

Published: Fri, 16 Oct 2026 04:00 PM (IST)

हरियाणा कांग्रेस कमेटी ने फरीदाबाद में 'काला दिवस' कार्यक्रम के दौरान हुए विवाद को गंभीरता से लेते हुए दो महिला ...और पढ़ें

हरियाणा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह। फाइल फोटो

हरियाणा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह। फाइल फोटो

HighLights

  1. फरीदाबाद विवाद पर हरियाणा कांग्रेस का एक्शन।

  2. पराग शर्मा, गजना लांबा को कारण बताओ नोटिस।

  3. अनुशासनहीनता, अमर्यादित व्यवहार पर मांगा जवाब।

राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने फरीदाबाद में पार्टी के काला दिवस कार्यक्रम के दौरान हुए विवाद को गंभीरता से लेते हुए दो महिला नेताओं पर शिकंजा कसा है। प्रदेश कांग्रेस की अनुशासन समिति ने बल्लभगढ़ से पूर्व कांग्रेस प्रत्याशी पराग शर्मा और फरीदाबाद की पूर्व जिला महिला कांग्रेस अध्यक्ष गजना लांबा को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं।

दोनों से कथित अनुशासनहीनता, अमर्यादित व्यवहार और पार्टी की छवि धूमिल करने के मामले में नोटिस मिलने के सात दिन के भीतर लिखित जवाब मांगा गया है। अनुशासन समिति के अध्यक्ष धर्मपाल सिंह मलिक की ओर से जारी दोनों नोटिसों में कहा गया है कि जिला कांग्रेस कमेटी, फरीदाबाद की ओर से 8 अक्टूबर को आयोजित काला दिवस कार्यक्रम के दौरान शांतिपूर्ण प्रदर्शन के समय पराग शर्मा और गजना लांबा के बीच विवाद हुआ।

नोटिस के अनुसार, दोनों ने कथित तौर पर अमर्यादित व्यवहार किया, झगड़े की स्थिति पैदा की और अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया।समिति ने इसे पार्टी के अनुशासन और संगठनात्मक मर्यादा के विपरीत बताया है। नोटिस में यह भी कहा गया है कि काला दिवस कार्यक्रम का उद्देश्य शांतिपूर्ण और अनुशासित तरीके से विरोध दर्ज कराना था। ऐसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम के दौरान विवाद होना संगठन की छवि और दोनों नेताओं की जिम्मेदारी पर सवाल खड़े करता है।

थाने पहुंचने और मीडिया में मामला ले जाने पर भी सवाल

नोटिस में दोनों नेताओं के विवाद को पुलिस थाने तक ले जाने और मीडिया के सामने सार्वजनिक करने पर भी आपत्ति जताई गई है। समिति का कहना है कि पार्टी के आंतरिक विवाद का समाधान संगठन के सक्षम नेतृत्व और निर्धारित प्रक्रिया के माध्यम से किया जाना चाहिए था। इसके बजाय मामले को पुलिस और मीडिया तक ले जाने से पार्टी की आंतरिक एकता, संगठनात्मक गरिमा और सार्वजनिक छवि को नुकसान पहुंचा।

दोनों नेताओं को निर्देश दिया गया है कि वे सात दिन के भीतर स्पष्ट और तथ्यात्मक जवाब दें कि उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों न की जाए। निर्धारित समय में जवाब नहीं मिलने या स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं पाए जाने पर पार्टी उपलब्ध तथ्यों और अभिलेखों के आधार पर एकतरफा कार्रवाई कर सकती है। फिलहाल दोनों नेताओं के जवाब और पार्टी की ओर से आगे की कार्रवाई का इंतजार है।